PMCH पर पप्पू यादव के निजी सचिव का आरोप, आधे घंटे तक नहीं मिला कमरा, स्ट्रेचर पर गैलरी में पड़े रहे सांसद,पूरा मामला

पूर्णिया से सांसद पप्पू यादव की गिरफ्तारी के बाद बिगड़ी सेहत को लेकर जहां एक ओर राहत की खबर सामने आई है, वहीं दूसरी ओर पटना मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल (PMCH) की व्यवस्थाओं पर सवाल खड़े हो गए हैं। पप्पू यादव के निजी सचिव ने अस्पताल प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं, जिससे यह मामला अब सिर्फ स्वास्थ्य अपडेट तक सीमित न रहकर प्रशासनिक लापरवाही के आरोपों तक पहुंच गया है।


क्या है पूरा मामला

गिरफ्तारी के बाद पप्पू यादव की तबीयत अचानक बिगड़ गई थी। उन्होंने पीठ और छाती में दर्द के साथ-साथ सिरदर्द, घबराहट और दिल की धड़कन तेज होने की शिकायत की थी। स्थिति को देखते हुए शुक्रवार (6 फरवरी) की रात पुलिस उन्हें पटना के इंदिरा गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान (IGIMS) लेकर पहुंची, जहां उन्हें रातभर डॉक्टरों की निगरानी में रखा गया।

इसके बाद शनिवार (7 फरवरी) की रात बेऊर जेल में कागजी प्रक्रिया पूरी होने पर अदालत के निर्देश के तहत उन्हें PMCH में मेडिकल कस्टडी में भर्ती कराया गया। यहीं से अस्पताल की व्यवस्था को लेकर विवाद शुरू हुआ।


निजी सचिव का आरोप: गैलरी में रखा गया स्ट्रेचर

पप्पू यादव के निजी सचिव का कहना है कि PMCH पहुंचने के बाद करीब आधे घंटे तक उन्हें कोई कमरा उपलब्ध नहीं कराया गया। इस दौरान सांसद को अस्पताल की गैलरी में स्ट्रेचर पर पड़े रहना पड़ा। सचिव का आरोप है कि एक जनप्रतिनिधि होने के बावजूद उनके साथ उचित व्यवहार नहीं किया गया, जो अस्पताल की व्यवस्था और संवेदनशीलता पर सवाल खड़े करता है।


अस्पताल प्रशासन की चुप्पी

अब तक PMCH प्रशासन की ओर से इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। न तो कमरे की उपलब्धता को लेकर सफाई दी गई है और न ही गैलरी में रखने के आरोपों पर कोई बयान जारी हुआ है। इसी वजह से यह मुद्दा राजनीतिक और प्रशासनिक बहस का रूप लेता जा रहा है।


मेडिकल रिपोर्ट में राहत

विवाद के बीच राहत की बात यह है कि मेडिकल रिपोर्ट्स में पप्पू यादव की हालत स्थिर बताई गई है। IGIMS के निदेशक डॉ. सुनील कुमार के मुताबिक, सांसद की ईसीजी, इको और एहतियातन सीटी एंजियोग्राफी कराई गई, जिनकी रिपोर्ट सामान्य पाई गई। वहीं PMCH के अधीक्षक डॉ. राजीव कुमार सिंह ने भी पुष्टि की है कि सभी आवश्यक जांचों के बाद फिलहाल किसी तात्कालिक खतरे की स्थिति नहीं है।


निगरानी क्यों है ज़रूरी

डॉक्टरों का कहना है कि शुरुआती लक्षणों के बाद भले ही हालत में सुधार हुआ हो, लेकिन सावधानी के तौर पर पप्पू यादव को अभी भी चिकित्सकीय निगरानी में रखा गया है। गिरफ्तारी, तनाव और स्वास्थ्य शिकायतों को देखते हुए डॉक्टर कोई जोखिम नहीं लेना चाहते।


एक तरफ मेडिकल रिपोर्ट्स पप्पू यादव की सेहत को लेकर राहत देती हैं, तो दूसरी तरफ PMCH की व्यवस्थाओं पर लगे आरोप नए सवाल खड़े करते हैं। क्या अस्पताल प्रशासन से चूक हुई, या हालात को लेकर आरोप बढ़ा-चढ़ाकर लगाए जा रहे हैं—इस पर स्पष्टता तभी आएगी जब PMCH की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आएगी। फिलहाल, मामला स्वास्थ्य से आगे बढ़कर प्रशासनिक जवाबदेही की बहस में बदल चुका है।

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