16 जनवरी 2026 की रात नोएडा के सेक्टर-150 इलाके में 27 वर्षीय सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की दर्दनाक मौत हो गई। उनकी कार एक निर्माणाधीन मॉल के पास पानी से भरे गड्ढे में गिर गई। यह गड्ढा बेसमेंट निर्माण के लिए खोदा गया था, लेकिन मौके पर कोई बैरिकेडिंग, चेतावनी बोर्ड या सुरक्षा व्यवस्था नहीं थी, जिस वजह से यह बड़ा हादसा हुआ।
लापरवाही पर उठे सवाल
घटना के बाद मृतक के परिजनों ने बिल्डर और संबंधित एजेंसियों पर गंभीर लापरवाही के आरोप लगाए। सवाल उठे कि बिना सुरक्षा इंतज़ाम के इतना बड़ा गड्ढा कैसे खुला छोड़ा गया और नोएडा प्राधिकरण ने इसकी निगरानी क्यों नहीं की। मामले ने सोशल मीडिया और प्रशासनिक हलकों में भी नाराज़गी पैदा की।
पुलिस की पहली बड़ी कार्रवाई
जांच के दौरान पुलिस ने नामजद बिल्डर अभय कुमार को गिरफ्तार कर लिया। आरोपी एमजेड विश्टाउन का मालिक है और उसकी गिरफ्तारी नॉलेज पार्क थाना पुलिस ने की। इसके अलावा लोटस ग्रीन परियोजना को लेकर भी मुकदमा दर्ज किया गया है। यह इस केस में पहली अहम गिरफ्तारी मानी जा रही है।
SIT ने संभाली जांच
मामले की गंभीरता को देखते हुए सरकार ने तीन सदस्यीय विशेष जांच टीम (SIT) का गठन किया। मेरठ जोन के एडीजी भानु भास्कर के नेतृत्व में बनी टीम ने मंगलवार से जांच शुरू की और सबसे पहले नोएडा विकास प्राधिकरण के सेक्टर-6 स्थित कार्यालय पहुंचकर दस्तावेजों की जांच की।
परिजनों से मुलाकात और जांच का दायरा
SIT के सदस्यों ने मृतक युवराज मेहता के परिजनों से मुलाकात कर उनका पक्ष जाना। अधिकारियों ने भरोसा दिलाया कि मामले के हर पहलू की निष्पक्ष जांच की जा रही है और दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा।
मुख्यमंत्री का सख्त रुख
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस घटना पर सख्ती दिखाते हुए पांच दिन के भीतर जांच रिपोर्ट तलब की है। सरकार ने कार्रवाई करते हुए नोएडा विकास प्राधिकरण के सीईओ लोकेश एम को पद से हटाकर प्रतीक्षारत कर दिया है। फिलहाल इस पद पर किसी नई नियुक्ति की घोषणा नहीं हुई है।
अब आगे क्या
अब सभी की निगाहें SIT की रिपोर्ट पर टिकी हैं। जांच के आधार पर और भी अधिकारियों या बिल्डरों पर कार्रवाई हो सकती है। यह मामला केवल एक हादसा नहीं, बल्कि शहरी विकास में सुरक्षा मानकों और प्रशासनिक जिम्मेदारी पर बड़ा सवाल बन गया है।




