उत्तराखंड सरकार ने गुरुवार देर शाम एक अहम प्रशासनिक फेरबदल करते हुए 11 आईएएस और पीसीएस अधिकारियों के तबादले कर दिए। कार्मिक विभाग की ओर से जारी आदेश के अनुसार कई जिलों और प्रमुख विभागों में जिम्मेदारियों का पुनर्विन्यास किया गया है। इसे सामान्य ट्रांसफर की प्रक्रिया भर नहीं माना जा रहा, बल्कि शासन की प्राथमिकताओं और आने वाले महीनों की रणनीति के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।
राज्य में पर्यटन सीजन की तैयारियां, चारधाम यात्रा की व्यवस्थाएं, औद्योगिक निवेश को बढ़ावा, शहरी विकास परियोजनाएं, जल जीवन मिशन और नमामि गंगे जैसी योजनाओं की मॉनिटरिंग—इन सबके बीच यह बदलाव हुआ है। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या यह कदम प्रशासनिक दक्षता बढ़ाने के लिए है या फिर सरकार बड़े स्तर पर परिणाम देने की तैयारी में है।
रुद्रप्रयाग में नया डीएम: रणनीतिक जिला, नई जिम्मेदारी
रुद्रप्रयाग में आईएएस विशाल मिश्रा को नया जिलाधिकारी नियुक्त किया गया है। रुद्रप्रयाग चारधाम यात्रा मार्ग का एक अहम पड़ाव है और आपदा प्रबंधन की दृष्टि से भी संवेदनशील जिला माना जाता है। यहां प्रशासनिक नेतृत्व की भूमिका सिर्फ कानून-व्यवस्था तक सीमित नहीं रहती, बल्कि यात्रा प्रबंधन, आपदा नियंत्रण और स्थानीय विकास कार्यों के समन्वय में भी अहम होती है।
यहां तैनात रहे आईएएस प्रतीक जैन को गढ़वाल मंडल विकास निगम (जीएमवीएन) का प्रबंध निदेशक बनाया गया है। जीएमवीएन राज्य में पर्यटन अवसंरचना के विकास और संचालन की प्रमुख एजेंसी है। चारधाम यात्रा, ट्रैकिंग मार्ग, पर्यटन गेस्ट हाउस और एडवेंचर गतिविधियों के संचालन की जिम्मेदारी इसी निगम के पास होती है।
प्रतीक जैन को इसके साथ मिशन निदेशक जल जीवन मिशन, निदेशक नमामि गंगे और परियोजना निदेशक केएफडब्ल्यू की अतिरिक्त जिम्मेदारी भी सौंपी गई है। इससे स्पष्ट है कि सरकार पर्यटन और जल संरक्षण से जुड़ी योजनाओं में समन्वित दृष्टिकोण अपनाना चाहती है।
विभागीय संतुलन: कौशल विकास से सेवायोजन तक
कार्मिक विभाग के आदेश के अनुसार निदेशक कौशल विकास आईएएस संजय कुमार से निदेशक सेवायोजन का अतिरिक्त प्रभार वापस ले लिया गया है, जबकि उनके अन्य पद यथावत रहेंगे। यह संकेत देता है कि सरकार विभागीय जिम्मेदारियों को स्पष्ट रूप से विभाजित कर अधिकारियों को उनके मुख्य कार्यों पर केंद्रित रखना चाहती है। ऐसे बदलाव आमतौर पर तब किए जाते हैं जब सरकार किसी विशेष क्षेत्र में लक्ष्य आधारित कार्यप्रणाली लागू करना चाहती है।
उद्योग, निवेश और नियोजन पर जोर
आईएएस सौरभ गहरवार को एमडी सिडकुल के साथ-साथ अपर सचिव उद्योग और निदेशक राजकीय मुद्रणालय की जिम्मेदारी दी गई है। सिडकुल राज्य में औद्योगिक निवेश को आकर्षित करने और औद्योगिक क्षेत्रों के विकास का प्रमुख संस्थान है। ऐसे में उद्योग विभाग और सिडकुल की जिम्मेदारी एक ही अधिकारी को सौंपना निवेश को गति देने की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है।
आईएएस नरेंद्र सिंह भंडारी को अपर सचिव नियोजन के साथ पर्यटन विकास परिषद में अपर मुख्य कार्यकारी अधिकारी और निदेशक सेवायोजन का दायित्व दिया गया है। इससे नियोजन, पर्यटन और रोजगार सृजन के बीच बेहतर तालमेल की संभावना बनती है।
आईएएस विनोद गिरी गोस्वामी को अपर सचिव शहरी विकास के साथ अपर सचिव आवास और मुख्य कार्यपालक अधिकारी भागीरथी घाटी विकास प्राधिकरण की जिम्मेदारी दी गई है। तेजी से शहरी विस्तार और हाउसिंग प्रोजेक्ट्स को देखते हुए यह नियुक्ति महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
पीसीएस अधिकारियों में व्यापक बदलाव
फेरबदल सिर्फ आईएएस अधिकारियों तक सीमित नहीं रहा। पीसीएस अधिकारियों में भी महत्वपूर्ण परिवर्तन किए गए हैं।
गिरधारी सिंह रावत को अपर सचिव कार्मिक के साथ अल्पसंख्यक कल्याण विभाग, निदेशक अल्पसंख्यक कल्याण, निदेशक मदरसा शिक्षा परिषद और प्रबंध निदेशक अल्पसंख्यक कल्याण निगम की जिम्मेदारी दी गई है। सामाजिक समावेशन और कल्याण योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के लिहाज से यह पद अहम माने जाते हैं।
सुरेश जोशी को दुग्ध एवं दुग्ध विकास विभाग के साथ जनगणना कार्य का दायित्व सौंपा गया है। कवींद्र सिंह को सचिवालय प्रशासन, संस्कृत शिक्षा और कार्यक्रम क्रियान्वयन विभाग की जिम्मेदारी दी गई है।
त्रिलोक सिंह मर्तोलिया को आयुक्त गन्ना चीनी पद से हटाकर प्रधान प्रबंधक शुगर मिल किच्छा का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है। अब्ज प्रसाद वाजपेयी को सिटी मजिस्ट्रेट हल्द्वानी नियुक्त किया गया है। राज्य निर्वाचन आयोग में उप सचिव कमलेश मेहता की प्रतिनियुक्ति समाप्त कर उन्हें डिप्टी कलेक्टर टिहरी बनाया गया है।
क्या है इस फेरबदल का बड़ा संकेत?
विश्लेषकों का मानना है कि यह फेरबदल आगामी पर्यटन सीजन, औद्योगिक निवेश की संभावनाओं और केंद्र प्रायोजित योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन को ध्यान में रखकर किया गया है। पर्यटन, उद्योग, जल संरक्षण, शहरी विकास और सामाजिक कल्याण—इन सभी क्षेत्रों में एक साथ बदलाव यह संकेत देता है कि सरकार प्रशासनिक मशीनरी को अधिक परिणामोन्मुख बनाना चाहती है। उत्तराखंड जैसे पहाड़ी और आपदा-संवेदनशील राज्य में प्रशासनिक दक्षता का सीधा असर जमीनी विकास, आपदा प्रबंधन और रोजगार सृजन पर पड़ता है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि नए पदभार संभालने वाले अधिकारी अपने-अपने क्षेत्रों में कितनी तेजी और प्रभावशीलता से परिणाम दे पाते हैं।




