हरिद्वार, 13 मार्च 2021

महाशिवरात्रि के मौके पर गुरुवार को पहला शाही स्नान संपन्न हो गया। इस दौरान आह्वान अखाड़ा, किन्नर अखाड़ा, जूना अखाड़ा और अग्नि अखाड़ा ने हरकी पौड़ी ब्रह्मकुंड पर स्नान किया। किन्नर अखाड़े के महामंडलेश्वर (प्रमुख) लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी के मुताबिक उनके अखाड़े को स्वतंत्र अखाड़े के रूप में मान्यता दी जानी चाहिए। इस कुंभ में उनकी पेशवाई को जूना अखाड़े के साथ मिला दिया गया है, जहां त्रिपाठी एक ऊंट पर सवार हुए थे।

खबरों के मुताबिक लक्ष्मीनारायण ने कहा कि धर्म को पितृसत्तात्मक बना दिया गया है। अखाड़ा परिषद पुरुष प्रधान, पितृसत्तात्मक है। उन्होंने अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद (एबीएपी) दशनामी पंचायती मजीवाड़ा (महिला संतों का एक आदेश) को स्वीकार नहीं किया है, जिससे उन्हें ट्रांस व्यक्तियों को स्वीकार करने की उम्मीद है। त्रिपाठी ने कहा कि किन्नरों ने एक लंबा सफर तय किया था, जब हमें ‘उपदेवता’ माना जाता था। साल 2015 में जब हमने अपने अखाड़े की स्थापना की और पहला शाही स्नान किया, तो सभी अखाड़े हमारे खिलाफ थे।

उन्होंने बताया कि जूना अखाड़े के केवल हरिगिरि महाराज ही हमारे साथ जुड़ने की हिम्मत रखते थे। सनातन धर्म में जिन संस्थाओं का उल्लेख मिलता है। उनमें देव, दानव, यक्ष, गंधर्व, किन्नर, अप्सरा संत, महात्मा, साधु शामिल हैं। यह धर्म जिसके आधार पर आज के सभी अखाड़ों का गठन किया गया था, भेदभाव नहीं करता है। त्रिपाठी ने कहा कि इसमें किसी और सभी के लिए जगह है।

देवभूमि उत्तराखंड के हरिद्वार में लगने वाले कुंभ मेला एक अप्रैल से ही शुरू होगा। इसकी जानकारी मुख्य सचिव की ओर से दी गई। जानकारी साझा करते हुए मुख्य सचिव ने बताया कि मेले की अवधि को लेकर कोई परिवर्तन नहीं किया गया है। वहीं मेले की तैयारियों से लेकर व्यवस्था से जुड़े सभी मुद्दों पर मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत बैठक करेंगे।