Maha Shivratri Special: 24 घंटे पानी में डूबा रहता है यह शिवलिंग, बिना छत का मंदिर और सदियों पुराना रहस्य

कर्नाटक के ऐतिहासिक शहर हम्पी में स्थित बडाविलिंगा मंदिर आस्था और रहस्य का अनोखा संगम माना जाता है। यह क्षेत्र यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल है और अपनी प्राचीन स्थापत्य कला, विशाल चट्टानों और खंडहरों के लिए प्रसिद्ध है। महाशिवरात्रि के अवसर पर यहां श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है। मान्यता है कि इस दिन यहां शिव की दिव्य ऊर्जा विशेष रूप से सक्रिय रहती है।


एकाश्म शिवलिंग: एक ही पत्थर से बनी अद्भुत कृति

बडाविलिंगा हम्पी का सबसे विशाल एकाश्म (एक ही पत्थर से तराशा गया) शिवलिंग है। इसकी ऊंचाई लगभग तीन मीटर बताई जाती है और इसे एक ही ग्रेनाइट पत्थर से गढ़ा गया है। सदियों पहले की गई यह नक्काशी आज भी उस दौर की अद्भुत शिल्पकला का प्रमाण देती है। इतना विशाल और संतुलित आकार इसे दक्षिण भारत के प्रमुख शिव प्रतीकों में शामिल करता है। इसकी भव्यता और सादगी, दोनों मिलकर इसे आध्यात्मिक और स्थापत्य दृष्टि से विशेष बनाते हैं।


24 घंटे पानी में डूबा क्यों रहता है यह शिवलिंग?

इस मंदिर का सबसे रहस्यमय पहलू यह है कि शिवलिंग का आधार हमेशा पानी में डूबा रहता है। गर्मियों में भी यह जल पूरी तरह सूखता नहीं है। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, यह पानी पास की तुंगभद्रा नदी से आता है। आध्यात्मिक दृष्टि से इसे गंगा का प्रतीक माना जाता है, जिसे शिव अपनी जटाओं में धारण करते हैं। जल शिव के संरक्षण और जीवनदायी स्वरूप का प्रतीक है। यही कारण है कि यह स्थान भक्तों के लिए विशेष आस्था का केंद्र बन गया है।


‘बडाविलिंगा’ नाम की कहानी

‘बडवा’ का अर्थ है गरीब, और ‘लिंग’ शिव का प्रतीक। मान्यता है कि इस शिवलिंग का निर्माण एक गरीब किसान महिला ने करवाया था, जो पास के विरुपाक्ष मंदिर क्षेत्र में रहती थी। आर्थिक सीमाओं के बावजूद उसकी गहरी श्रद्धा ने इस भव्य शिवलिंग को जन्म दिया। यह कथा इस मंदिर को केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि भक्ति और समर्पण की मिसाल भी बनाती है।


बिना छत का मंदिर: सूर्य की सीधी किरणें

इस मंदिर की एक और विशेषता है कि इसके ऊपर पारंपरिक छत नहीं है। संरचना में ऊपर की ओर खुला स्थान छोड़ा गया है, जिससे सूर्य की रोशनी सीधे शिवलिंग पर पड़ती है। जब सूर्य की किरणें जल पर गिरकर शिवलिंग को स्पर्श करती हैं, तो एक दिव्य आभा उत्पन्न होती है। यह दृश्य भक्तों के लिए आध्यात्मिक अनुभव जैसा माना जाता है। प्राकृतिक प्रकाश और जल की चमक मिलकर पूरे परिसर को शांत और ध्यानमय वातावरण में बदल देती है।


आस्था, इतिहास और रहस्य का संगम

हम्पी का बडाविलिंगा मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि इतिहास, स्थापत्य और आध्यात्मिक चेतना का अनूठा संगम है। सदियों से जल में डूबा यह शिवलिंग आज भी श्रद्धालुओं और पर्यटकों को समान रूप से आकर्षित करता है। महाशिवरात्रि के अवसर पर यहां की ऊर्जा, वातावरण और श्रद्धा का भाव कई गुना बढ़ जाता है। जल, पत्थर और प्रकाश का यह अद्भुत मेल मानो समय को थाम लेता है और हर आगंतुक को कुछ क्षणों के लिए भीतर झांकने पर मजबूर कर देता है। यह स्थल केवल दर्शन का स्थान नहीं, बल्कि आत्मचिंतन और आस्था की गहराई को महसूस करने का अवसर है। जहां इतिहास की विरासत और आध्यात्मिक अनुभव एक साथ जीवंत हो उठते हैं।

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