अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस 2026: वो 10 भारतीय महिलाएं जिन्होंने देश में बदलाव की नई मिसाल कायम की

अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस 2026: वो 10 भारतीय महिलाएं जिन्होंने देश में बदलाव की नई मिसाल कायम की

द फ्रंट डेस्क: हर साल 8 मार्च को दुनिया भर में अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस मनाया जाता है। यह दिन महिलाओं की सामाजिक, राजनीतिक, आर्थिक और सांस्कृतिक उपलब्धियों को सम्मान देने के लिए समर्पित होता है। साथ ही यह दिन समाज में लैंगिक समानता को बढ़ावा देने और महिलाओं के अधिकारों के प्रति जागरूकता फैलाने का भी अवसर देता है। साल 2026 के अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस का विषय “अधिकार, न्याय और कार्रवाई: सभी महिलाओं और लड़कियों के लिए” रखा गया है। इस विषय का उद्देश्य महिलाओं और लड़कियों के अधिकारों, न्याय और समान अवसरों को मजबूत करना है। भारत में भी कई ऐसी महिलाएं हुई हैं जिन्होंने अपने साहस, संघर्ष और उपलब्धियों से देश का नाम रोशन किया और समाज की सोच को बदलने का काम किया। एवरेस्ट की ऊंचाइयों से लेकर अंतरिक्ष की विशालता तक, खेल से लेकर विज्ञान और प्रशासन तक, इन महिलाओं ने अपने-अपने क्षेत्र में नई मिसाल कायम की है। आइए जानते हैं ऐसी ही 10 भारतीय महिलाओं के बारे में, जिन्होंने अपनी उपलब्धियों से देश को गर्व महसूस कराया।

छेंद्री पाल

बछेंद्री पाल भारत की सबसे प्रेरणादायक पर्वतारोहियों में से एक हैं। उन्होंने 23 मई 1984 को माउंट एवरेस्ट पर चढ़कर इतिहास रच दिया और ऐसा करने वाली पहली भारतीय महिला बनीं। एवरेस्ट तक पहुंचने का उनका सफर बेहद कठिन और जोखिम भरा था। चढ़ाई के दौरान एक भयंकर हिमस्खलन (Avalanche) ने उनके कैंप को तबाह कर दिया था। इस हादसे में टीम के कई सदस्य घायल हो गए थे और बछेंद्री पाल भी गंभीर खतरे में आ गई थीं। लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और कठिन परिस्थितियों का सामना करते हुए एवरेस्ट की चोटी तक पहुंचने में सफल रहीं। उनकी इस ऐतिहासिक उपलब्धि के लिए उन्हें कई सम्मान मिले और 2019 में भारत सरकार ने उन्हें पद्म भूषण से सम्मानित किया।

कल्पना चावला

कल्पना चावला भारत की उन महान महिलाओं में शामिल हैं जिन्होंने अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में इतिहास रचा। उनका जन्म 17 मार्च 1962 को हरियाणा के करनाल में हुआ था। कल्पना चावला अंतरिक्ष में जाने वाली पहली भारतीय महिला बनीं। उन्हें दिसंबर 1994 में NASA द्वारा चुना गया और बाद में STS-87 मिशन में मिशन स्पेशलिस्ट और रोबोटिक आर्म ऑपरेटर के रूप में नियुक्त किया गया। हालांकि 1 फरवरी 2003 को एक दुखद दुर्घटना में उनकी मृत्यु हो गई। पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश के दौरान स्पेस शटल कोलंबिया दुर्घटनाग्रस्त हो गया और कल्पना चावला समेत सभी अंतरिक्ष यात्रियों की जान चली गई। इसके बावजूद उनकी उपलब्धियां आज भी करोड़ों लोगों को प्रेरित करती हैं।

टेसी थॉमस

टेसी थॉमस को अक्सर “मिसाइल वुमन ऑफ इंडिया” कहा जाता है। वह भारत की पहली महिला वैज्ञानिक हैं जिन्होंने किसी बड़े मिसाइल प्रोजेक्ट का नेतृत्व किया। उन्होंने अग्नि-IV मिसाइल परियोजना का नेतृत्व किया, जिसका सफल परीक्षण 2011 में किया गया। इसके बाद उन्होंने अग्नि-V मिसाइल प्रोजेक्ट की भी जिम्मेदारी संभाली। लगभग 5000 किलोमीटर की रेंज वाली परमाणु क्षमता से लैस अग्नि-V मिसाइल का 2012 में सफल परीक्षण टेसी थॉमस के नेतृत्व में हुआ। रक्षा और विज्ञान के क्षेत्र में उनका योगदान भारत की तकनीकी प्रगति का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

किरण बेदी

किरण बेदी भारतीय प्रशासनिक इतिहास में एक महत्वपूर्ण नाम हैं। वह 1972 में भारतीय पुलिस सेवा (IPS) में शामिल हुईं और ऐसा करने वाली पहली भारतीय महिला अधिकारी बनीं। अपने करियर के दौरान उन्होंने कई महत्वपूर्ण पदों पर काम किया और खास तौर पर तिहाड़ जेल में सुधारों के लिए जानी जाती हैं। उन्होंने जेल प्रशासन में कई सकारात्मक बदलाव किए, जिनके लिए उन्हें 1994 में प्रतिष्ठित रेमन मैग्सेसे पुरस्कार से सम्मानित किया गया। बाद में वह पुडुचेरी की 24वीं उपराज्यपाल भी रहीं और मई 2016 से फरवरी 2021 तक इस पद पर कार्य किया।

किरण मजूमदार-शॉ

किरण मजूमदार-शॉ भारत की अग्रणी उद्यमियों में से एक हैं। उन्होंने 1978 में बेंगलुरु के एक छोटे से गैराज में केवल 10,000 रुपये की पूंजी के साथ बायोकॉन कंपनी की स्थापना की। शुरुआती दिनों में उन्हें लैंगिक भेदभाव, संसाधनों की कमी और निवेश की चुनौतियों का सामना करना पड़ा। लेकिन उन्होंने अपने दृढ़ संकल्प और मेहनत से बायोकॉन को एक वैश्विक बायोटेक कंपनी बना दिया। आज बायोकॉन 120 से अधिक देशों में इंसुलिन और कैंसर जैसी बीमारियों की सस्ती दवाइयां उपलब्ध कराती है।

आनंदी गोपाल जोशी

आनंदी गोपाल जोशी को भारत की पहली महिला डॉक्टर माना जाता है। उनका जन्म 31 मार्च 1865 को महाराष्ट्र के कल्याण (ठाणे जिला) में हुआ था। उन्होंने उस दौर में चिकित्सा शिक्षा प्राप्त की जब महिलाओं के लिए पढ़ाई करना भी बेहद कठिन था। आनंदी गोपाल जोशी ने 1886 में पेनसिल्वेनिया के वुमन मेडिकल कॉलेज से पश्चिमी चिकित्सा में डिग्री हासिल की। भारत लौटने के बाद उन्हें कोल्हापुर के अल्बर्ट एडवर्ड अस्पताल में चिकित्सक-इन-चार्ज नियुक्त किया गया।

ग्रुप कैप्टन शालिजा धामी

ग्रुप कैप्टन शालिजा धामी भारतीय वायुसेना की एक ऐतिहासिक शख्सियत हैं। 2023 में वह फ्रंटलाइन कॉम्बैट यूनिट की कमान संभालने वाली पहली महिला अधिकारी बनीं। उन्हें पश्चिमी सेक्टर में एक मिसाइल स्क्वाड्रन का नेतृत्व करने की जिम्मेदारी दी गई। इससे पहले 2019 में वह फ्लाइंग यूनिट में फ्लाइट कमांडर बनने वाली भारतीय वायुसेना की पहली महिला अधिकारी भी बनी थीं।

मैरी कॉम

मैरी कॉम भारत की सबसे सफल महिला मुक्केबाजों में से एक हैं। वह छह बार की विश्व एमेच्योर बॉक्सिंग चैंपियन रह चुकी हैं। गरीबी और कई सामाजिक चुनौतियों के बावजूद उन्होंने अपनी मेहनत से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सफलता हासिल की। उन्होंने 2012 लंदन ओलंपिक में कांस्य पदक जीतकर भारत का नाम रोशन किया। मणिपुर के एक छोटे से गांव से निकलकर विश्व मंच तक पहुंचने की उनकी कहानी लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा है।

सुष्मिता सेन

सुष्मिता सेन ने 1994 में मिस यूनिवर्स का खिताब जीतकर इतिहास रच दिया। वह मिस यूनिवर्स बनने वाली पहली भारतीय महिला बनीं। यह प्रतियोगिता फिलीपींस की राजधानी मनीला में आयोजित हुई थी, जिसमें दुनिया भर की प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया था। सुष्मिता सेन की बुद्धिमत्ता, आत्मविश्वास और व्यक्तित्व ने उन्हें सिर्फ 18 साल की उम्र में यह खिताब दिलाया। इसके बाद उन्होंने भारतीय फिल्म इंडस्ट्री में भी अपनी अलग पहचान बनाई।

साइना नेहवाल

साइना नेहवाल भारत की सबसे सफल बैडमिंटन खिलाड़ियों में से एक रही हैं। वह ओलंपिक पदक जीतने वाली पहली भारतीय महिला बैडमिंटन खिलाड़ी बनीं। उन्होंने 2012 लंदन ओलंपिक में कांस्य पदक जीतकर इतिहास रचा। साल 2015 में वह विश्व बैडमिंटन रैंकिंग में नंबर-1 खिलाड़ी भी बनीं। इसी साल उन्होंने BWF वर्ल्ड चैंपियनशिप में सिल्वर मेडल भी जीता था। लंबे और सफल करियर के बाद साइना नेहवाल ने जनवरी 2026 में बैडमिंटन से संन्यास लेने की घोषणा की।

इन सभी महिलाओं ने अपने साहस, संघर्ष और उपलब्धियों से यह साबित किया है कि दृढ़ संकल्प और मेहनत के दम पर किसी भी बाधा को पार किया जा सकता है। उनकी कहानियां केवल प्रेरणा नहीं हैं, बल्कि यह दिखाती हैं कि अगर अवसर और समर्थन मिले तो महिलाएं हर क्षेत्र में असाधारण उपलब्धियां हासिल कर सकती हैं।

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