मध्य प्रदेश के इंदौर में दूषित पानी से फैली बीमारी ने पूरे शहर को हिला कर रख दिया है। जिस इंदौर को देशभर में स्वच्छता का मॉडल माना जाता रहा, वहीं अब पीने के पानी की आपूर्ति लोगों की जान पर भारी पड़ गई है। भागीरथपुरा इलाके में सरकारी जलापूर्ति से फैले संक्रमण के कारण अब तक 16 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि सैकड़ों लोग अस्पतालों में इलाजरत हैं।
इस त्रासदी के बाद सामने आई एक्सक्लूसिव सरकारी नोटशीट और लैब रिपोर्ट ने साफ कर दिया है कि यह हादसा अचानक नहीं, बल्कि तीन साल की प्रशासनिक लापरवाही का नतीजा है।
कैसे शुरू हुआ संकट
भागीरथपुरा इलाके में बीते कुछ हफ्तों से लोगों में उल्टी, दस्त, पेट दर्द और तेज बुखार की शिकायतें लगातार बढ़ने लगीं। शुरुआत में इसे सामान्य मौसमी बीमारी माना गया, लेकिन जब मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ी और मौतें होने लगीं, तब प्रशासन हरकत में आया। जांच के बाद यह साफ हुआ कि बीमारी की जड़ सरकारी नल से आने वाला पानी था, जो नर्मदा लाइन से सप्लाई किया जा रहा था।
लैब रिपोर्ट ने खोली खौफनाक सच्चाई
पानी के सैंपल की जांच में फीकल कॉलीफॉर्म, ई-कोलाई और क्लेसिबेला जैसे खतरनाक बैक्टीरिया पाए गए। ये बैक्टीरिया सीधे तौर पर मानव मल-मूत्र से जुड़े होते हैं और गंभीर आंतों के संक्रमण का कारण बनते हैं।
कुछ सैंपल में विब्रियो कोलेरी जैसे तत्व भी मिले हैं, जो हैजा जैसी जानलेवा बीमारी से जुड़े होते हैं। अब तक करीब 80 सैंपल जांच के लिए भेजे जा चुके हैं। अधिकारियों का कहना है कि पूरी और अंतिम रिपोर्ट आने में अभी 1–2 दिन का समय और लग सकता है।
तीन साल पहले ही मिल गई थी चेतावनी
इस मामले का सबसे चौंकाने वाला पहलू यह है कि खतरे की जानकारी प्रशासन को तीन साल पहले ही मिल चुकी थी। नगर निगम इंदौर की 2022 की एक आंतरिक नोटशीट सामने आई है, जिसमें साफ तौर पर लिखा था कि भागीरथपुरा इलाके की पानी की पाइपलाइन में सीवेज और मल-मूत्र की मिलावट हो रही है।
यह नोटशीट तत्कालीन निगमायुक्त प्रतिभा द्वारा तैयार की गई थी। इसके बाद जनवरी 2023 में समस्या के समाधान के लिए बजट भी पास कर दिया गया, लेकिन इसके बावजूद नई पाइपलाइन बिछाने का काम शुरू नहीं हुआ।
यानी प्रशासन को खतरे की पूरी जानकारी थी, संसाधन भी मंजूर थे, फिर भी ग्राउंड पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
मौतों का आंकड़ा और भयावह स्थिति
इस लापरवाही की कीमत अब आम लोगों को अपनी जान देकर चुकानी पड़ी है—
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16 लोगों की मौत
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करीब 200 मरीज अस्पताल में भर्ती
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4 की हालत गंभीर
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लगभग 1500 लोग प्रभावित
भागीरथपुरा में घर-घर मातम पसरा है। कई परिवारों ने अपने कमाने वाले सदस्य खो दिए हैं। लोगों के मन में एक ही सवाल है— अगर समय रहते काम हो जाता, तो क्या ये जानें बच सकती थीं?
स्वच्छता मॉडल पर गहरा सवाल
इंदौर को सालों से देश का सबसे साफ शहर बताया जाता रहा है। लेकिन इस हादसे ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या सफाई के दावे सिर्फ दिखावे तक सीमित थे?
जहां एक ओर शहर को पुरस्कार और रैंकिंग मिलती रहीं, वहीं दूसरी ओर पीने का पानी ही जानलेवा साबित हो गया।
जिम्मेदार कौन?
अब सवाल सीधे और तीखे हैं—
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जब 2022 में चेतावनी मिल चुकी थी, तो कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
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बजट पास होने के बाद भी काम क्यों लटका रहा?
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क्या फाइलें सिर्फ दफ्तरों में घूमती रहीं?
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और सबसे बड़ा सवाल— 16 मौतों की जिम्मेदारी कौन लेगा?
आगे क्या?
फिलहाल प्रशासन की ओर से जांच और सैंपलिंग जारी है। दोषियों पर कार्रवाई और सिस्टम सुधार के दावे किए जा रहे हैं, लेकिन जनता का भरोसा टूट चुका है।
यह मामला अब सिर्फ स्वास्थ्य संकट नहीं, बल्कि प्रशासनिक जवाबदेही, लापरवाही और मानव जीवन की कीमत से जुड़ा एक बड़ा सवाल बन चुका है।




