ईरान-इजराइल युद्ध का असर: संकट में फिरोजाबाद का कांच उद्योग, 500 करोड़ का निर्यात अटका, पूरा मामला

ईरान-इजराइल युद्ध का असर: संकट में फिरोजाबाद का कांच उद्योग, 500 करोड़ का निर्यात अटका, पूरा मामला

मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और ईरान-इजराइल युद्ध का असर अब भारत के कई उद्योगों पर भी दिखने लगा है। उत्तर प्रदेश के सुहागनगरी फिरोजाबाद का विश्व प्रसिद्ध कांच उद्योग इस समय गंभीर संकट का सामना कर रहा है। पश्चिम एशिया में बिगड़ते हालात और समुद्री मार्गों पर बढ़े खतरे की वजह से कांच के सामान और चूड़ियों का निर्यात लगभग ठप हो गया है। उद्योग से जुड़े व्यापारियों के मुताबिक करीब 500 करोड़ रुपये का माल विदेशों में फंसा हुआ है, जिससे कारोबारियों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है।

फिरोजाबाद का कांच उद्योग दशकों से अंतरराष्ट्रीय बाजार में अपनी अलग पहचान रखता है। यहां तैयार होने वाली रंगीन चूड़ियां, कांच के सजावटी सामान, झूमर और अन्य उत्पाद दुनिया के कई देशों में निर्यात किए जाते हैं। लेकिन मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष ने वैश्विक सप्लाई चेन को प्रभावित कर दिया है, जिसका सीधा असर इस उद्योग पर पड़ रहा है। अगर हालात जल्द सामान्य नहीं हुए तो कांच उद्योग की रफ्तार धीमी पड़ने के साथ-साथ हजारों लोगों की रोजी-रोटी पर भी संकट गहरा सकता है।

निर्यात पर पड़ा बड़ा असर

फिरोजाबाद का कांच उद्योग अपनी बारीक कारीगरी, अनोखे डिज़ाइन और पारंपरिक तकनीक के लिए दुनिया भर में मशहूर है। यहां बने कांच के सामान और चूड़ियां करीब 150 से अधिक देशों में निर्यात की जाती हैं। खासकर यूरोप, अमेरिका और मध्य-पूर्व के देशों में इनकी अच्छी मांग रहती है। लेकिन मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के कारण कई महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग प्रभावित हो गए हैं। इसका असर अंतरराष्ट्रीय शिपिंग और माल ढुलाई पर पड़ा है। निर्यातकों के मुताबिक फ्रांस, जर्मनी, ब्रिटेन और अमेरिका जैसे बड़े बाजारों के लिए भेजे गए ऑर्डर अब रास्ते में ही अटक गए हैं। जहाजों की आवाजाही प्रभावित होने के कारण माल की डिलीवरी तय समय पर नहीं हो पा रही है। इससे निर्यातकों का करोड़ों रुपये का भुगतान भी अटका हुआ है। कई व्यापारियों का कहना है कि अगर यह स्थिति लंबे समय तक बनी रही तो विदेशी खरीदार दूसरे देशों से सामान खरीदने लगेंगे, जिससे भारतीय कांच उद्योग को बड़ा नुकसान हो सकता है।

गैस संकट ने बढ़ाई मुश्किल

कांच उद्योग पहले से ही उत्पादन लागत में बढ़ोतरी और ऊर्जा संकट से जूझ रहा था। कांच बनाने के लिए बड़ी मात्रा में प्राकृतिक गैस की जरूरत होती है, क्योंकि भट्टियों को लगातार उच्च तापमान पर चलाना पड़ता है। लेकिन हाल के दिनों में गैस की आपूर्ति में कमी आने से उद्योग की मुश्किलें और बढ़ गई हैं। उद्योग से जुड़े लोगों का कहना है कि प्राकृतिक गैस की आपूर्ति में लगभग 3 लाख घनमीटर तक की कटौती हुई है। इससे उत्पादन लागत काफी बढ़ गई है और कई छोटे-मध्यम उद्योगों के लिए भट्टियां चलाना मुश्किल हो गया है। गैस की कीमतें पहले ही बढ़ चुकी थीं, ऐसे में सप्लाई में कमी ने उत्पादन प्रक्रिया को और महंगा बना दिया है। कई फैक्ट्रियों को मजबूरी में उत्पादन कम करना पड़ा है, जबकि कुछ छोटे यूनिट अस्थायी रूप से बंद होने की कगार पर पहुंच गए हैं।

हजारों लोगों की रोजी-रोटी पर खतरा

फिरोजाबाद का कांच उद्योग केवल एक व्यापार नहीं, बल्कि हजारों परिवारों की आजीविका का आधार है। यहां के कारीगर पीढ़ियों से कांच की चूड़ियां और अन्य उत्पाद बनाने का काम करते आ रहे हैं। यह उद्योग सीधे तौर पर हजारों मजदूरों, कारीगरों और छोटे व्यापारियों को रोजगार देता है। निर्यात रुकने और उत्पादन लागत बढ़ने की वजह से कई फैक्ट्रियों में काम की गति धीमी पड़ गई है। अगर यह स्थिति ज्यादा समय तक बनी रहती है तो मजदूरों की आय पर असर पड़ सकता है और कई कारीगर बेरोजगार भी हो सकते हैं। स्थानीय उद्योग संगठनों का कहना है कि अगर निर्यात पूरी तरह ठप हो गया तो फिरोजाबाद की अर्थव्यवस्था पर भी इसका बड़ा असर पड़ेगा। क्योंकि शहर की बड़ी आबादी सीधे या परोक्ष रूप से कांच उद्योग से जुड़ी हुई है।

उद्योगपतियों की सरकार से मांग

कांच उद्योग से जुड़े व्यापारियों और निर्यातकों ने सरकार से इस संकट को गंभीरता से लेने की अपील की है। उनका कहना है कि सरकार को गैस की कीमतों में राहत देने और निर्यात को सुचारू बनाने के लिए ठोस कदम उठाने चाहिए। उद्योगपतियों का सुझाव है कि सरकार वैकल्पिक समुद्री मार्गों और लॉजिस्टिक्स व्यवस्था को मजबूत करे ताकि विदेशों में फंसे माल को जल्द से जल्द गंतव्य तक पहुंचाया जा सके। साथ ही गैस सप्लाई को स्थिर करने और छोटे उद्योगों को राहत देने के लिए विशेष पैकेज की भी जरूरत है। व्यापारियों का कहना है कि अगर जल्द समाधान नहीं निकला तो सुहागनगरी फिरोजाबाद की चूड़ियों और कांच उद्योग की चमक दुनिया भर में फीकी पड़ सकती है। ऐसे में सरकार और उद्योग संगठनों के बीच मिलकर काम करने से ही इस संकट से बाहर निकलने का रास्ता निकल सकता है।

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