ईरान के साथ जारी तनाव के बीच अमेरिका ने हालिया सैन्य हमलों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का इस्तेमाल किया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक अमेरिका और उसके सहयोगी देश इजराइल ने सिर्फ 24 घंटे के भीतर करीब 1000 ठिकानों को निशाना बनाया। इन हमलों की योजना बनाने और उन्हें अंजाम देने में AI तकनीक की अहम भूमिका बताई जा रही है। कहा जा रहा है कि इस ऑपरेशन में “क्लॉड” नाम का AI मॉडल इस्तेमाल किया गया, जिसे अमेरिकी कंपनी एंथ्रोपिक ने विकसित किया है। AI की मदद से सेना को लक्ष्य ढूंढने, उनकी प्राथमिकता तय करने और हमले की रणनीति बनाने में तेजी मिलती है। सैन्य भाषा में इस पूरी प्रक्रिया को “किल चेन” कहा जाता है। रिपोर्ट्स के मुताबिक इसी AI तकनीक का इस्तेमाल इससे पहले जनवरी में वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को पकड़ने के ऑपरेशन में भी किया गया था। हालांकि एंथ्रोपिक कंपनी ने इस तरह के सैन्य इस्तेमाल पर आपत्ति जताई थी। कंपनी का कहना था कि उसके नियमों के अनुसार क्लॉड AI का इस्तेमाल हिंसा, हथियार बनाने या निगरानी के लिए नहीं किया जाना चाहिए।
ट्रंप और एंथ्रोपिक के बीच क्यों हुआ विवाद?
इस मुद्दे को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और एंथ्रोपिक कंपनी के बीच विवाद भी सामने आया। ट्रंप ने कंपनी के रुख पर नाराजगी जताते हुए एंथ्रोपिक के साथ सभी सरकारी कॉन्ट्रैक्ट खत्म करने का आदेश दिया और इसे एक कट्टर वामपंथी एआई कंपनी बताया। हालांकि अमेरिकी रक्षा विभाग के पास तुरंत कोई दूसरा AI सिस्टम उपलब्ध नहीं था। ऐसे में कुछ समय तक इसी तकनीक का इस्तेमाल जारी रखने का फैसला किया गया। अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने कहा कि एंथ्रोपिक अगले छह महीने तक रक्षा विभाग को अपनी सेवाएं देता रहेगा, ताकि इस दौरान किसी दूसरे AI सिस्टम पर बदलाव किया जा सके।
युद्ध में AI की भूमिका क्यों बढ़ रही है?
रिपोर्ट्स के अनुसार, युद्ध के शुरुआती 12 घंटों में ही अमेरिकी सेना ने ईरान के ठिकानों पर करीब 900 मिसाइलें दाग दीं। इस पूरे ऑपरेशन में AI तकनीक ने अहम भूमिका निभाई। अमेरिकी सेना यह तकनीक एंथ्रोपिक और युद्ध तकनीक कंपनी पलांटिर (Palantir) की साझेदारी से इस्तेमाल कर रही है। यह तकनीक पलांटिर के मेवन स्मार्ट सिस्टम में लगी होती है। यह सिस्टम सैटेलाइट और निगरानी से मिलने वाले खुफिया डेटा का विश्लेषण करता है और सेना को तुरंत संभावित टारगेट्स की जानकारी देता है।
AI सिस्टम कैसे तय करता है टारगेट?
हमले से पहले AI सिस्टम सेना को सैकड़ों संभावित टारगेट्स की सूची देता है। इन लक्ष्यों को महत्व और खतरे के आधार पर क्रम में रखा जाता है और उनके सटीक स्थान की जानकारी भी दी जाती है। यह सिस्टम यह भी सुझाव देता है कि किस लक्ष्य पर कौन सा हथियार इस्तेमाल करना ज्यादा प्रभावी होगा। इसमें हथियारों की उपलब्धता और पहले ऐसे ही टारगेट्स पर उनके असर जैसे पहलुओं को भी ध्यान में रखा जाता है। न्यूकैसल यूनिवर्सिटी के विशेषज्ञ क्रेग जोन्स के मुताबिक, AI सिस्टम की गति कई बार इंसानी विश्लेषण से भी तेज होती है। पहले ऐसे हमलों की योजना बनाने और उन्हें अंजाम देने में कई दिन या हफ्ते लग जाते थे, लेकिन अब AI की मदद से कई हमले एक साथ और बहुत तेजी से किए जा सकते हैं। यही वजह है कि आधुनिक युद्ध में AI तकनीक की भूमिका तेजी से बढ़ती जा रही है।




