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बांके बिहारी मंदिर में उमड़ा होली का रंग, गुलाल उड़ाकर झूमे श्रद्धालु

बांके बिहारी मंदिर में उमड़ा होली का रंग, गुलाल उड़ाकर झूमे श्रद्धालु

वृंदावन: ब्रज की होली की बात हो और वृंदावन के बांके बिहारी मंदिर का जिक्र न हो, यह असंभव है। इस वर्ष भी यहां होली का रंग अनोखे उल्लास के साथ बिखरा। हजारों श्रद्धालु ठाकुरजी के साथ रंगों में सराबोर हो गए। गुलाल की बौछार और अबीर की खुशबू से पूरा मंदिर परिसर रंगीन हो उठा। हर भक्त कान्हा के रंग में रंगा नजर आया।

गुलाल और अबीर से सराबोर हुए श्रद्धालु

वृंदावन के बांके बिहारी मंदिर में सुबह से ही श्रद्धालुओं का तांता लग गया था। जैसे ही मंदिर के पट खुले, भगवान श्रीकृष्ण और राधारानी की आरती के साथ होली की शुरुआत हुई। श्रद्धालुओं ने भगवान पर गुलाल चढ़ाया, और फिर पूरे मंदिर परिसर में रंगों की बारिश होने लगी। भक्त झूमते-गाते हुए “राधे-राधे” और “बांके बिहारी लाल की जय” के जयकारे लगा रहे थे। देशभर से आए श्रद्धालुओं ने इस दिव्य होली महोत्सव में भाग लिया। मंदिर की गलियों में फूलों और रंगों की होली खेली गई, जिससे पूरा माहौल भक्तिमय हो उठा।

मुस्लिम कारीगरों की पोशाक बनाने पर विवाद, मंदिर ने दिखाई एकता की मिसाल

बांके बिहारी मंदिर ने एक बार फिर भाईचारे की मिसाल पेश की। कुछ दक्षिणपंथी संगठनों ने मांग उठाई थी कि भगवान श्रीकृष्ण की पोशाक मुस्लिम कारीगरों से न बनवाई जाए। लेकिन मंदिर के सेवायतों ने इस मांग को ठुकराते हुए कहा कि भगवान की सेवा में किसी प्रकार का भेदभाव नहीं किया जाएगा।

मंदिर सेवायत ज्ञानेंद्र किशोर गोस्वामी ने कह, “हम धर्म, जाति या संप्रदाय के आधार पर किसी को नहीं आंकते। भगवान कृष्ण के प्रति श्रद्धा रखने वाला कोई भी व्यक्ति, चाहे वह किसी भी धर्म का हो, सेवा कर सकता है।” उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि ठाकुरजी की पोशाक बनाने वाले सभी कारीगर शुचिता का पालन करते हैं और उनकी भक्ति पर कोई संदेह नहीं किया जा सकता।

धर्म के आधार पर नहीं हो सकता भेदभाव

मंदिर प्रशासन ने हिंदू धर्मग्रंथों का हवाला देते हुए कहा कि अच्छाई और बुराई किसी भी कुल, धर्म या संप्रदाय में हो सकती है। हिरण्यकश्यप के घर भक्त प्रह्लाद का जन्म हुआ था और कंस जैसे पापी के नाना स्वयं पुण्यात्मा उग्रसेन थे।

मंदिर सेवायतों ने स्पष्ट किया कि भगवान की सेवा में केवल श्रद्धा और भक्ति का स्थान है, न कि संप्रदाय या धर्म का। उन्होंने कहा, “बांके बिहारी सबके हैं, और उनकी सेवा में किसी भी तरह की राजनीति या भेदभाव को स्वीकार नहीं किया जा सकता।”

होली के उल्लास में बंधी एकता की डोर

जहां एक ओर रंगों की मस्ती में श्रद्धालु झूमते नजर आए, वहीं बांके बिहारी मंदिर ने धार्मिक सद्भाव का एक अनूठा उदाहरण पेश किया। मंदिर प्रशासन ने यह संदेश दिया कि प्रेम और भक्ति में कोई भेदभाव नहीं होना चाहिए।

होली के इस रंगीन उत्सव में मंदिर परिसर में भक्तों की भीड़ उमड़ी रही, और ठाकुरजी के दर्शन के साथ ही श्रद्धालु भक्ति और प्रेम के रंग में रंगते चले गए।

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