चेन्नई, 12 मई 2021

तमिलनाडु के चेंगलपेट में चेन्नई से 55 किलोमीटर दूर स्थित एचएलएल बायोटेक का 100 एकड़ का विशाल परिसर सभी आधुनिक सुविधाओं से लैस है और टीके के निर्माण के लिए यहां अत्याधुनिक तकनीक है। इसके बावजूद कोविड-19 महामारी की पहली लहर के दौरान वैक्सीन निर्माण के लिए इसका उपयोग नहीं किया गया। वैक्सीन के निर्माण के लिए एकीकृत वैक्सीन कॉम्प्लेक्स (आईवीसी) के लिए निविदा जारी किए जाने के बाद भी सार्वजनिक क्षेत्र के इस उपक्रम की सुविधा का उपयोग करने के लिए कोई आगे नहीं आया।

एचएलएल बायोटेक की वार्षिक क्षमता 58.5 करोड़ वैक्सीन खुराक बनाने की है । इसका उद्देश्य भारत सरकार के यूनिवर्सल टीकाकरण कार्यक्रम (यूआईपी) के तहत टीके बनाना था। कंपनी का गठन यूआईपी के तहत टीकों की निर्बाध आपूर्ति के लिए किया गया था। किसी भी महामारी की स्थिति में जरूरत पूरी करने के लिए यहां अत्याधुनिक बहु-जीवाणु और बहु-वायरल सुविधाएं हैं।

हालांकि, अब केंद्र सरकार ने इसमें रुचि दिखाई है और बोलियों के लिए समय सीमा 21 मई तक बढ़ा दी है। इस बीच चार निजी कंपनियों ने संपर्क किया है। निजी फर्मो ने एचएलएल बायोटेक के अधिकारियों के साथ 52 करोड़ रुपये के बड़े अग्रिम शुल्क के कारण आ रही कठिनाइयों पर चर्चा की है।

गुमनाम कंपनी एचएलएल बायोटेक के एक वरिष्ठ अधिकारी ने आईएएनएस को बताया, “चार कंपनियों ने प्री-बिड मीटिंग में हमसे संपर्क किया है और अपफ्रंट मनी पर चिंता जताई है। वे 52 करोड़ रुपये के इस अपफ्रंट मनी को कम करना चाहते हैं। अपफंट्र मनी अब कम कर दी गई है और हमें उम्मीद है कि बोली के माध्यम से टेंडर हो जाएगा।”

हालांकि, अभी यह स्पष्टता नहीं है कि एचएलएल बायोटेक में कब आईवीसी से वैक्सीन उतारी जाएगी।

संसद सदस्य और द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (डीएमके) नेता पी. विल्सन ने मुखर रूप से मांग की है कि केंद्र सरकार को तमिलनाडु में वैक्सीन निर्माण सुविधाओं का उपयोग करना चाहिए, जिनमें राज्य के पीएसयू, जैसे कुन्नूर के उधगमंडलम में पाश्चर इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया और चेन्नई के गिंडी में किंग्स इंस्टीट्यूट ऑफ प्रिवेंटिव मेडिसिन एंड रिसर्च भी शामिल हैं।