पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की जयंती के अवसर पर 25 दिसंबर को उत्तर प्रदेश में किसानों को जोड़ने का यह सबसे बड़ा मेगा कार्यक्रम होने जा रहा है. अकेले अवध में 377 जगह होंगे जबकि पूरे उत्तर प्रदेश में ढाई हजार से ज्यादा जगहों पर कार्यक्रम होंगे.

25 दिसंबर यानि पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के जन्मदिन पर पीएम नरेंद्र मोदी किसानों से फिर संवाद करेंगे. इस बार अवध के किसानों के पीएम मोदी नए कृषि कानूनों की खूबियां बताएंगे. इसके साथ ही उत्तर प्रदेश बीजेपी कार्यकर्ता, केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर की चिट्ठी लेकर घर-घर जाएंगे.

यही नहीं प्रधानमंत्री मोदी अटल बिहारी वाजपेयी की जयंती पर 25 दिसंबर को पूरे उत्तर प्रदेश में ढाई हजार किसानों के चौपाल के साथ जुड़ेंगे. बीजेपी पूरे प्रदेश में ढाई हजार से अधिक जगहों पर किसानों से संपर्क का अभियान चलाएगी जिसमें प्रधानमंत्री वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए जुड़ेंगे.

उत्तर प्रदेश में किसानों को जोड़ने का यह सबसे बड़ा मेगा कार्यक्रम होने जा रहा है. अकेले अवध में 377 जगह होंगे जबकि पूरे उत्तर प्रदेश में ढाई हजार से ज्यादा जगहों पर कार्यक्रम होंगे.

दूसरी ओर, दिल्ली में 28वें दिन किसानों का आंदोलन जारी है. किसानों ने टीम बनाई है. बातचीत के ड्राफ्ट तैयार हो रहे हैं. सरकार के प्रस्ताव पर मंथन है, तो उधर सरकार की तरफ से भी किसानों को मनाने की कवायद हो रही है. रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने ट्वीट कर किसानों से आंदोलन वापस लेने की अपील की है.

25 को 7वीं किस्त जारी करेंगे पीएम

गौरतलब है कि 25 दिसंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, किसान सम्मान निधि की सातवीं किस्त जारी करेंगे. इस दौरान पीएम नरेंद्र मोदी अवध के किसानों से बात करेंगे. इसके लिए उत्तर प्रदेश बीजेपी ने खास तैयारी की है. हर जिले में किसान संवाद का आयोजन किया जाएगा. ताकि कृषि कानूनों पर पीएम मोदी के संदेश को लोगों तक पहुंचाया जा सके.

किसान संवाद के अगले दिन से भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने नए कृषि कानूनों के समर्थन में अपना अभियान चलाएगी. उत्तर प्रदेश में 26 और 27 दिसंबर को बीजेपी के कार्यकर्ता घर-घर जाएंगे और केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र तोमर की चिट्ठी को दिखाकर किसान हित में किए कार्यों को गिनाएंगे. इसके साथ ही मलिन बस्तियों में केंद्र की योजनाओं को बताएंगे.

कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों के आंदोलन का आज 28वां दिन है, लेकिन अब तक कोई बात नहीं बनी है. सरकार अपने इरादे पर अडिग है तो किसान तीनों नए कानून वापस लेने की मांग पर डटे हैं. सरकार ने एक बार फिर से बातचीत का प्रस्ताव भेजा है, जिस पर किसान आज विचार करेंगे. इसके लिए किसानों ने पांच सदस्यीय एक कमेटी बनी है.