राहुल ने उठाया अडाणी का मुद्दा तो क्यों खफा हो गईं ममता?

इंडिया गठबंधन की दो दिवसीय बैठक के बाद राहुल गांधी का बयान सामने आया है। उन्होंने जहां एक ओर विपक्ष के एकजुट होने का दावा किया तो दूसरी ओर मोदी सरकार को चीन और अडाणी का मुद्दा उठाकर सरकार को घेरा है लेकिन ममता बनर्जी को राहुल गांधी के अडाणी का मुद्दा उठाना रास नहीं आया है।

उन्होंने इस पर अपनी नाराजगी जाहिर की है। ममता ने कहा कि राहुल ने अचानक से ही इस मामले को खड़ा कर दिया, उन्होंने इस मुद्दे पर चर्चा करने से पहले विपक्षी गठबंधन इंडिया के घटक दलों से परामर्श भी नहीं किया, क्या ये सही और सामरिक कदम है? बता दें कि राहुल गांधी इंडिया गठबंधन की दो दिवसीय बैठक के बाद प्रेस वार्ता में इस पर अपना बयान जारी किया था। उधर एक खबर ये भी चल रही है कि ममता इस बात से भी नाराज हैं कि कांग्रेस बंगाल में वाम दलों के साथ गठबंधन को लेकर भी अनिच्छुक है।

बता दें कि राहुल ने बैठक के बाद प्रेस वार्ता के दौरान अडाणी का मुद्दा उठाया था। उन्होंने मोदी सरकार पर बड़ा हमला बोलते हुए कहा था कि जी20 की मीटिंग का समय है।

अलग-अलग देशों से नेता आ रहे हैं। राहुल ने कहा कि एक बिलियन डॉलर हिंदुस्तान से अडानी की कंपनी के नेटवर्क के जरिए अलग-अलग देशों में गए और वापस आए। उससे शेयर प्राइस को इनफ्लुएट किया।

इससे हिंदुस्तान का इंफ्रास्ट्रक्चर एयरपोर्ट, पोर्ट को खरीद रहे हैं। अखबारों ने कहा कि उनके पास इसके सबूत है। राहुल गांधी यहीं नहीं रूके उन्होंने सरकार से सवाल पूछते हुए कहा कि ये पैसा यूज किया जा रहा है, वो किसका? ये अडानी का है या किसी और का है. इस काम को करने के लिए मास्टरमाइंड विनोद अडानी हैं।

उनके साथ 2 पार्टनर्स हैं। नासिर अली सबान अली और एक चाइनीज चैंग चोंग लिंग है। कुल मिलाकर ममता बनर्जी का मानना है कि राहुल गांधी ने ये मामला उठाया लेकिन विपक्षी गठबंधन इंडिया के घटक दलों से परामर्श भी नहीं किया। अब देखना होगा कि कांग्रेस कैसे ममता की नाराजगी दूर करती है। अब भी बड़ा सवाल है कि कैसे ये लोग चुनाव तक एकजुट रहते हैं और सीट शेयररिंग को लेकर क्या फॉमूर्ला निकलता है।

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