होली से पहले उत्तराखंड सरकार ने राज्य आंदोलनकारियों को लेकर बड़ा फैसला किया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने गृह विभाग के प्रस्ताव को मंजूरी देते हुए विभिन्न श्रेणियों में दी जाने वाली पेंशन राशि बढ़ा दी है। यह घोषणा पहले राज्य स्थापना दिवस पर की गई थी, जिसे अब औपचारिक स्वीकृति मिल गई है। सरकार का कहना है कि यह निर्णय राज्य गठन में योगदान देने वाले आंदोलनकारियों के सम्मान और उनके प्रति कृतज्ञता का प्रतीक है।
क्या बदला है?
नई व्यवस्था के तहत सात दिन या उससे अधिक जेल गए अथवा आंदोलन के दौरान घायल हुए आंदोलनकारियों की पेंशन 6,000 रुपये से बढ़ाकर 7,000 रुपये प्रतिमाह कर दी गई है। शहीद आंदोलनकारियों के आश्रितों की पेंशन 3,000 रुपये से बढ़ाकर 5,500 रुपये कर दी गई है। पूर्णतः शय्याग्रस्त और विकलांग आंदोलनकारियों की पेंशन में उल्लेखनीय वृद्धि करते हुए इसे 20,000 रुपये से बढ़ाकर 30,000 रुपये प्रतिमाह किया गया है। अन्य पात्र आंदोलनकारियों को अब 4,500 रुपये के बजाय 5,500 रुपये प्रतिमाह मिलेंगे।
फैसला क्यों अहम है?
उत्तराखंड का गठन वर्ष 2000 में लंबे आंदोलन के बाद हुआ था। 1994 के आंदोलन में बड़ी संख्या में लोगों ने गिरफ्तारी दी थी, कई घायल हुए और कुछ ने अपने प्राण गंवाए थे। राज्य की राजनीति में आंदोलनकारियों का मुद्दा हमेशा संवेदनशील रहा है। ऐसे में त्योहार से पहले पेंशन वृद्धि का ऐलान सामाजिक और राजनीतिक दोनों दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
397 करोड़ रुपये की विकास योजनाओं को भी मंजूरी
पेंशन वृद्धि के साथ ही मुख्यमंत्री ने विभिन्न विकास परियोजनाओं के लिए कुल 397.39 करोड़ रुपये की वित्तीय स्वीकृति भी दी है। चमोली जिले के नंदानगर में पार्किंग निर्माण के लिए 3.20 करोड़ रुपये मंजूर किए गए हैं। विश्व बैंक समर्थित यू-प्रिपेयर परियोजना के लिए 30 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं, जो आपदा प्रबंधन क्षमता को मजबूत करने से जुड़ी है।
राज्य आपदा मोचन निधि से 92.50 करोड़ रुपये विभिन्न जिलों में सहायता, सड़क मरम्मत और पुनर्निर्माण कार्यों के लिए जारी किए जाएंगे। जिला पंचायतों को 79.09 करोड़ रुपये की चौथी तिमाही किस्त जारी करने को मंजूरी दी गई है। शिक्षा का अधिकार अधिनियम के तहत 178 करोड़ रुपये की धनराशि भी स्वीकृत की गई है। इसके अलावा हरिद्वार में सतीकुंड पुनर्विकास और अल्मोड़ा में ऑटोमेटेड ड्राइविंग टेस्ट ट्रैक निर्माण के लिए भी बजट दिया गया है।
आगे क्या?
सरकार इसे सम्मान और विकास दोनों मोर्चों पर संतुलित कदम बता रही है। अब देखना होगा कि पेंशन वृद्धि और विकास योजनाओं की स्वीकृति का लाभ जमीनी स्तर पर कितनी तेजी से पहुंचता है और इसका सामाजिक-राजनीतिक असर क्या होता है।




