नई दिल्ली, 4जनवरी, 2021

सरकार और किसानों के बीच सातवें दौर की बैठक खत्म हो गई. दोनों पक्षों के बीच तीन घंटे तक चली ये बैठक बेनतीजा रही. अब अगले दौर की बैठक 8 जनवरी को होगी. किसान संगठनों (Farmer Organization) के प्रतिनिधि कानूनों को निरस्त करने की मांग पर कायम हैं. हालांकि सरकार की ओर से कहा गया है कि वह कानूनों को वापस नहीं लेगी पर वह संशोधन के लिए तैयार है. सूत्रों ने बताया कि करीब एक घंटे तक चली बैठक के बाद दोनों पक्षों ने भोजनावकाश लिया. उन्होंने बताया कि सरकार इन कानूनों को निरस्त नहीं करने के रूख पर कायम है और समझा जाता है कि उसने इस विषय पर विचार के लिये समिति गठित करने का सुझाव दिया है.

बैठक के बाद कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर (Agriculture Minister Narendra Singh Tomar) ने कहा कि हम चाहते हैं कि किसान संगठन तीनों कानूनों पर चर्चा करें. हम किसी समाधान तक नहीं पहुंच सकें क्योंकि किसान संगठन कानूनों को निरस्त करने पर अड़े हैं. भारतीय किसान यूनियन युद्धवीर सिंह ने कहा कि मंत्री चाहते थे कि हम कानून पर बिंदुवार चर्चा करें. हमने इसे खारिज कर दिया और कहा कि चर्चा का कोई मतलब नहीं क्योंकि हम कानूनों को पूरी तरह से खारिज करने की मांग कर रहे हैं. सरकार का हमें संशोधन की ओर ले जाने का इरादा है लेकिन हम इसे नहीं स्वीकारेंगे.

किसान संगठन खुद लेकर आए थे भोजन
अनाज की खरीद प्रणाली से जुड़ी न्यूनतम समर्थन मूल्य (Minimum Support Price) की कानूनी गारंटी देने की किसानों की महत्वपूर्ण मांग पर भी गतिरोध कायम है. किसान संगठन के प्रतिनिधि अपने लिये खुद भोजन लेकर आये थे. भोजन अवकाश के दौरान ‘लंगर’ लगा. हालांकि 30 दिसंबर की तरह आज केंद्रीय नेता लंगर में शामिल नहीं हुए और भोजनावकाश के दौरान अलग से चर्चा करते रहे.

केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर, रेलवे, वाणिज्य और खाद्य मंत्री पीयूष गोयल और वाणिज्य राज्य मंत्री एवं पंजाब से सांसद सोम प्रकाश ने विज्ञान भवन में 40 किसान यूनियनों के प्रतिनिधियों के साथ बातचीत शुरू की. सूत्रों ने बताया कि मौजूदा प्रदर्शन के दौरान जान गंवाने वाले किसानों को श्रद्धांजलि देने के साथ बैठक शुरू हुई.

30 दिसंबर को हुई थी छठे दौर की वार्ता
इससे पहले, सरकार और किसान संगठनों के बीच छठे दौर की वार्ता 30 दिसंबर को हुई थी. उस दौरान पराली जलाने को अपराध की श्रेणी से बाहर रखने और बिजली पर रियायत जारी रखने की दो मांगों पर सहमति बनी थी.

सूत्रों ने बताया कि तोमर ने रविवार को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से मुलाकात की और मौजूदा संकट के जल्द समाधान के लिए सरकार की रणनीति पर चर्चा की. उन्होंने बताया कि तोमर ने सिंह के साथ संकट का समाधान निकालने के लिए ‘बीच का कोई रास्ता’ निकालने को लेकर सभी मुमकिन विकल्पों पर चर्चा की.

केंद्र के तीनों कृषि कानूनों के खिलाफ पिछले एक महीने से ज्यादा समय से हजारों किसान दिल्ली की अलग-अलग सीमाओं पर प्रदर्शन कर रहे हैं. इनमें से ज्यादातर पंजाब, हरियाणा और पश्चिमी उत्तरप्रदेश के किसान हैं. राष्ट्रीय राजधानी और आसपास के क्षेत्रों में भीषण ठंड के अलावा पिछले कुछ दिनों में भारी बारिश और प्रदर्शन स्थल पर जलजमाव के बावजूद किसान अपनी मांग पर डटे हुए हैं.