अयोध्या राम मंदिर परिसर में हाल ही में एक व्यक्ति को नमाज़ पढ़ते हुए पाए जाने के बाद हिरासत में लिया गया है। आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, यह व्यक्ति मंदिर परिसर के एग्ज़िट गेट के पास नमाज़ अदा कर रहा था। मौके पर मौजूद लोगों ने इस पर आपत्ति जताई, जिसके बाद सुरक्षा कर्मियों को सूचना दी गई और तत्काल कार्रवाई की गई।
कश्मीर के शोपियां का निवासी बताया जा रहा व्यक्ति
प्राथमिक जानकारी के मुताबिक, हिरासत में लिया गया व्यक्ति जम्मू-कश्मीर के शोपियां जिले का रहने वाला है। सूत्रों का कहना है कि युवक की पहचान अबू अहमद शेख के रूप में हुई है। घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस के साथ-साथ सुरक्षा एजेंसियां भी सतर्क हो गईं और व्यक्ति से पूछताछ शुरू की गई।
किन कानूनी प्रावधानों के तहत हो सकती है कार्रवाई?
इस मामले में पुलिस भारतीय न्याय संहिता (BNS) के कई प्रावधानों के तहत कार्रवाई पर विचार कर रही है।
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धारा 298 और 299: ये धाराएं धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने या किसी पूजा स्थल को अपवित्र करने के इरादे से किए गए कृत्य से जुड़ी हैं। यदि जांच में यह साबित होता है कि ऐसा इरादा था, तो आरोपी को दो साल तक की जेल, जुर्माना या दोनों हो सकते हैं।
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धारा 300: अगर यह पाया जाता है कि इस कृत्य से मंदिर में चल रही धार्मिक गतिविधियों या किसी धार्मिक आयोजन में बाधा उत्पन्न हुई, तो यह धारा भी लागू हो सकती है, जिसमें एक साल तक की जेल या जुर्माने का प्रावधान है।
हाई-सिक्योरिटी ज़ोन में सुरक्षा उल्लंघन का सवाल
राम मंदिर परिसर को हाई-सिक्योरिटी ज़ोन घोषित किया गया है, जहां सख्त सुरक्षा नियम और प्रोटोकॉल लागू हैं। ऐसे में किसी भी तरह का अनधिकृत या असामान्य आचरण सुरक्षा उल्लंघन माना जा सकता है। इस आधार पर आरोपी के खिलाफ अलग से प्रशासनिक या कानूनी कार्रवाई भी संभव है।
इरादे और पृष्ठभूमि की हो रही है जांच
फिलहाल आरोपी हिरासत में है और इंटेलिजेंस एजेंसियां, स्थानीय पुलिस और वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी संयुक्त रूप से मामले की जांच कर रहे हैं। जांच का फोकस इस बात पर है कि—
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आरोपी का इरादा क्या था,
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उसका बैकग्राउंड और गतिविधियां क्या रही हैं,
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और क्या इस घटना के पीछे कोई बड़ा मकसद या साजिश जुड़ी हो सकती है।
सज़ा का फैसला जांच के बाद
अधिकारियों का कहना है कि जब तक जांच पूरी नहीं हो जाती, तब तक यह तय नहीं किया जा सकता कि आरोपी पर कौन-सी धाराएं अंतिम रूप से लागू होंगी। हालांकि, यदि लगाए गए आरोप साबित होते हैं, तो आरोपी को जुर्माने के साथ 1 से 3 साल तक की जेल का सामना करना पड़ सकता है।




