अविमुक्तेश्वरानंद की अग्रिम जमानत पर फैसला सुरक्षित, अगले आदेश तक गिरफ्तारी पर रोक

अविमुक्तेश्वरानंद की अग्रिम जमानत पर फैसला सुरक्षित, अगले आदेश तक गिरफ्तारी पर रोक

द फ्रंट डेस्क: स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के खिलाफ दर्ज यौन उत्पीड़न मामले में शुक्रवार को इलाहाबाद हाईकोर्ट में अहम सुनवाई हुई। दोनों पक्षों की विस्तृत दलीलें सुनने के बाद अदालत ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका पर फैसला सुरक्षित रख लिया है। साथ ही कोर्ट ने स्पष्ट किया कि अगला आदेश आने तक स्वामी की गिरफ्तारी नहीं की जाएगी। इस अंतरिम राहत से उन्हें फिलहाल बड़ी कानूनी राहत मिल गई है, जबकि मामले को लेकर राजनीतिक और सामाजिक हलकों में बहस तेज हो गई है।

कोर्ट में क्या हुई बहस?

सुनवाई के दौरान राज्य सरकार और शिकायतकर्ता की ओर से पेश अधिवक्ताओं ने अग्रिम जमानत का जोरदार विरोध किया। अभियोजन पक्ष का कहना था कि मामला गंभीर प्रकृति का है और जांच प्रभावित होने की आशंका को देखते हुए अग्रिम जमानत नहीं दी जानी चाहिए। अदालत में एफआईआर के बिंदुओं को पढ़कर सुनाया गया, जिसमें कथित रूप से कुंभ और माघ मेले के दौरान यौन शोषण के आरोपों का जिक्र है। जमानत याचिका की पोषणीयता पर भी विस्तृत बहस हुई। सरकारी वकीलों ने तर्क दिया कि आरोपों की प्रकृति और परिस्थितियों को देखते हुए अदालत को सतर्क रुख अपनाना चाहिए। वहीं बचाव पक्ष ने कहा कि मामला तथ्यों से परे है और आरोप राजनीतिक या व्यक्तिगत दुर्भावना से प्रेरित हो सकते हैं।

स्वामी का पक्ष: ‘फर्जी और बेबुनियाद आरोप’

हाईकोर्ट की सुनवाई के बाद स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा कि अदालत में विस्तार से चर्चा हुई है और न्यायालय ने फैसला सुरक्षित रखते हुए गिरफ्तारी पर रोक लगाई है। उन्होंने दावा किया कि कोर्ट में यह बात सामने आई कि जिन बच्चों का जिक्र किया गया है, वे कथित रूप से मठ में कभी नहीं रहे। स्वामी ने कहा कि जब विस्तृत आदेश आएगा, तब उसका विश्लेषण किया जाएगा। उन्होंने आरोपों को “झूठा और बेबुनियाद” बताया और कहा कि उन्हें साजिश के तहत फंसाने की कोशिश की जा रही है।

समर्थन और विरोध की आवाजें

मामले को लेकर देशभर में अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। कुछ धार्मिक संगठनों और समर्थकों ने स्वामी के समर्थन में बयान दिए हैं। भोपाल के झरनेश्वर महादेव मंदिर में उनके समर्थन में हवन भी आयोजित किया गया, जिसमें स्थानीय लोग और कुछ राजनीतिक व्यक्तित्व शामिल हुए। समर्थकों का कहना है कि स्वामी की छवि को धूमिल करने का प्रयास किया जा रहा है। वहीं दूसरी ओर, शिकायतकर्ता पक्ष का कहना है कि मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और पीड़ितों को न्याय मिलना चाहिए।

मध्य प्रदेश से जुड़ाव

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का मध्य प्रदेश से भी गहरा संबंध बताया जाता है। नरसिंहपुर जिले के गोटेगांव स्थित झोतेश्वर आश्रम से उनका आध्यात्मिक और संगठनात्मक जुड़ाव रहा है। उनके गुरु स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती भी इसी आश्रम से जुड़े रहे थे। समय-समय पर स्वामी यहां प्रवास करते रहे हैं, जिसके चलते मध्य प्रदेश में भी इस मामले को लेकर चर्चा तेज है।

फिलहाल इलाहाबाद हाईकोर्ट के अंतिम आदेश का इंतजार है। अदालत के विस्तृत फैसले से यह तय होगा कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को अग्रिम जमानत मिलेगी या जांच एजेंसियों को आगे की कार्रवाई का रास्ता साफ होगा। यह मामला केवल एक कानूनी प्रक्रिया तक सीमित नहीं रहा, बल्कि धार्मिक, सामाजिक और राजनीतिक स्तर पर भी व्यापक बहस का विषय बन चुका है। अब सबकी नजर हाईकोर्ट के अंतिम निर्णय पर टिकी है, जो इस पूरे विवाद की दिशा तय करेगा।

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