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पीएम मोदी की अपील पर किसान कल करेंगे बैठक, कृषि मंत्री की चिट्ठी पर भी लेंगे फैसला

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25 december,2020

किसानों के नेशनल मोर्चा की आज कोई बैठक नहीं हुई, केवल पंजाब के संगठन की बैठक हुई. नेशनल किसान संयुक्त मोर्चा कल शनिवार को बैठक करेगा. हालांकि बैठक कब होगी इसका समय निर्धारित नहीं किया गया है.

किसान संयुक्त मोर्चा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भाषण और कृषि मंत्रालय के सचिव की ओर से भेजी गई चिट्ठी को लेकर प्रतिक्रिया देने के लिए कल शनिवार को बैठक करेगा. प्रधानमंत्री मोदी ने आज एक कार्यक्रम में कहा कि कुछ राजनीतिक दलों द्वारा किसानों को बरगलाने की कोशिश की जा रही है और आंदोलन को मुद्दे से भटकाया जा रहा है.

जानकारी के मुताबिक किसानों के नेशनल मोर्चे की आज कोई बैठक नहीं हुई, केवल पंजाब के संगठन की बैठक हुई. नेशनल किसान संयुक्त मोर्चा कल शनिवार को बैठक करेगा. हालांकि बैठक कब होगी इसका समय निर्धारित नहीं किया गया है. किसान संयुक्त मोर्चा में देशभर की 40 किसान यूनियनें शामिल हैं. पंजाब के 36 संगठनों ने आज बैठक की.

हमारी मांगें नहीं पढ़ रही सरकारः एआईकेएससीसी

अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति (एआईकेएससीसी) ने आज शुक्रवार को कहा कि सरकार जानबूझकर किसानों की ‘तीन कानून और बिजली बिल’ वापसी की मांग को ‘नहीं पढ़ रही’ और वह ‘अन्य मुद्दों’ की मांग कर रही है.  किसानों के जवाब में स्पष्ट लिखा था कि सवाल कानून वापसी का है, सुधार का नहीं है.

एआईकेएससीसी के वर्किंग ग्रुप ने सरकार द्वारा किसानों की ‘तीन कृषि कानून’ और ‘बिजली बिल 2020’ को रद्द करने की मांग को पहचानने तक से इंकार करने की कड़ी निंदा की और कहा कि सरकार इसे हल नहीं करना चाहती. 24 दिसंबर को सरकार के पत्र में ‘3 दिसंबर की वार्ता में चिन्हित मुद्दों’ का बार-बार हवाला है, जिन्हें सरकार कहती है, उसने हल कर दिया है और वह उन ‘अन्य मुद्दों’ की मांग कर रही है, जिन पर किसान चर्चा करना चाहते हैं. सरकार ने जानबूझकर उनकी मांग को नजरंदाज किया. पिछले 7 माह से चल रहे संघर्ष, जिसमें 2 लाख से अधिक किसान पिछले 29 दिन से अनिश्चित धरने पर बैठे हैं, लेकिन समस्या को हल करने को सरकार राजी नहीं है.

सरकार के प्रस्ताव पर एआईकेएससीसी ने कहा कि सरकार का प्रस्ताव बंद दिमाग के साथ शर्तों के साथ है. किसानों को वार्ता से इंकार नहीं है. किसान जल्दी में नहीं, जब तक सरकार न सुने यहीं डटे रहेंगे.

एआईकेएससीसी ने 26 दिसंबर को ‘धिक्कार दिवस’ और ‘कॉरपोरेट बहिष्कार’ करने की अपील की है. साथ ही 200 से ज्यादा जिलों में विरोध कार्यक्रमऔर स्थायी धरने जारी रहेगा. यही नहीं 27 दिसंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘मन की बात’ कार्यक्रम के प्रसारण के समय ‘थाली पीटेंगे’. एआईकेएससीसी ने हरियाणा में 13 किसानों द्वारा मुख्यमंत्री का विरोध करने पर 307 के केस की निंदा की है.

हमारी सरकार ने खेती को आसान कियाः पीएम

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से आज शुक्रवार को किसान सम्मान निधि योजना की नई किस्त जारी की गई जिसमें 9 करोड़ किसानों के खाते में 18 हजार करोड़ रुपये ट्रांसफर किए गए. इस दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि किसानों को बदनाम कर कुछ लोग अपनी राजनीति चमका रहे हैं. पहले की सरकारों की नीति के कारण वो किसान बर्बाद हुआ, जिसके पास कम जमीन थी.

कृषि कानूनों का समर्थन करते हुए पीएम नरेंद्र मोदी ने कहा कि हमारी सरकार ने आधुनिक खेती को लेकर बल दिया. हमारा फोकस किसानों के खर्च को कम करने पर किया गया. पीएम फसल बीमा योजना, किसान कार्ड, सम्मान निधि योजना की मदद से खेती को आसान किया गया है.

पीएम मोदी ने अपने संबोधन में विपक्ष पर जमकर हमला बोला और किसानों को नए कृषि कानून के मसले पर गुमराह करने का आरोप लगाया. पीएम मोदी ने आज अपने भाषण में कहा, ‘मैं हैरान हूं और बेहद तकलीफ के साथ कहना चाहता हूं कि जो बंगाल पर सर्वोच्च शासन करते थे, वे ममता बनर्जी के 15 साल पुराने भाषण सुनें. आप जान जाएंगे कि किस तरह राजनीति ने सब कुछ बर्बाद कर दिया. उन्होंने किसानों को पैसा नहीं दिया. अगर आप किसानों को दिल में रखते हैं तो आपने उनके लिए आंदोलन क्यों नहीं किया? आवाज क्यों नहीं उठाई? और आप उनके लिए पंजाब पहुंच गए.’

पीएम मोदी ने टोल नाकों को फ्री कराने का मुद्दा भी उठाया. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, ‘जब आंदोलन शुरू हुआ तो उनकी मांग थी कि MSP की गारंटी होनी चाहिए. अब ये आंदोलन भटक गया, ये लोग कुछ लोगों के पोस्टर लगाकर उनकी रिहाई की मांग कर रहे हैं.’

कृषि मंत्रालय की चिट्ठी

पीएम मोदी ने एक बार फिर कहा कि सरकार हर विषय पर बात करने को तैयार है. जो लोग लोकतंत्र को नहीं मानते हैं, वही आज किसानों को गलत भाषा का प्रयोग करके बरगला रहे हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को 2,500 किसान चौपालों को संबोधित किया. इस दौरान पीएम ने नौ करोड़ किसानों के बैंक खातों में 18 हजार करोड़ रुपये ट्रांसफर किए.

इस बीच किसान आंदोलन को देखते हुए सरकार ने एक बार फिर किसानों को एक चिट्ठी लिखी और फिर से बातचीत का न्योता दिया. किसानों और सरकार के बीच कृषि कानून को लेकर 6 से अधिक राउंड की बातचीत हो चुकी है. लेकिन कोई सहमति नहीं बन सकी. सरकार फिर चर्चा को आगे बढ़ाने की कोशिश में लगी है.

कृषि मंत्रालय की ओर से गुरुवार को फिर से किसानों को चिट्ठी लिखी गई, इसमें कहा गया कि किसान संगठनों द्वारा सभी मुद्दों का तर्कपूर्ण समाधान करने के लिए सरकार प्रतिबद्ध है. चिट्ठी में बीते दिनों लिखित संशोधन प्रस्ताव का जिक्र किया गया है, साथ ही आवश्यक वस्तु अधिनियम पर सफाई दी.

कृषि मंत्रालय के मुताबिक, जिन विषयों को किसान संगठनों ने उठाया उसी का जवाब लिखित में दिया गया, लेकिन अन्य मुद्दों पर चर्चा के लिए तैयार हैं.

पंजाब के किसानों से कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर की अपील- आंदोलन खत्म कर शुरू करें बातचीत

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24 december

नई दिल्ली। Farmers Protest News: नए कृषि कानूनों के खिलाफ पिछले 30 दिनों से जारी किसानों का आंदोलन अब केंद्र की मोदी सरकार (Modi government) के लिए मुश्किलें खड़ी कर रहा है। भारत में जारी किसान आंदोलन (kisan andolan) की हलचल अब अमेरिका में भी दिखाई देने लगी है। किसानों की समस्या दूर करने को लेकर गुरुवार को केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर (Narendra Singh Tomar) ने एक बार फिर वार्ता का प्रस्ताव रखा है। कृषि मंत्री ने पंजाब (Punjab) के किसानों से आग्रह किया है कि वह अपना आंदोलन खत्म कर बातचीत के दौर को फिर से शुरू करें।

केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर (Union Agriculture Minister Narendra Singh Tomar) ने शुक्रवार को कहा, पंजाब के किसानों से आग्रह है कि वह अपने विरोध को खत्म करने और नए कृषि कानूनों पर गतिरोध को हल करने के लिए सरकार के साथ विचार-विमर्श करने के लिए आगे आएं। बता दें कि किसान आंदोलन के बीच नरेंद्र सिंह तोमर 40 किसान यूनियनों के साथ वार्ता का नेतृत्व कर रहे हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि किसान इन तीन विधानों के महत्व को समझेंगे और इस गतिरोध को तोड़ने के लिए एक समाधान तक पहुंचने के लिए सरकार के साथ चर्चा करेंगे।

कृषि मंत्री ने कहा, पंजाब के किसानों के मन में कुछ गलतफहमी हैं, मैं उनसे आग्रह करना चाहता हूं कि वे विरोध छोड़ दें और बातचीत के लिए आगे आएं। मुझे उम्मीद है कि किसान नए कानूनों के महत्व को समझेंगे और समाधान तक पहुंचेंगे। बता दें कि आंदोलन शुरू होने के बाद से अब तक केंद्र सरकार और किसान संगठनों के बीच पांच दौर की वार्ता हो चुकी है लेकिन इसमें भी कोई हल नहीं निकाला जा सका। इस बीच सरकार ने किसानों की सुविधा के अनुसार उन्हें अगले दौर की वार्ता के लिए दो बार आमंत्रित किया है।

पीएम केयर्स “सरकार द्वारा स्थापित” लेकिन आरटीआई के दायरे में नहीं, दस्तावेजों में दी गई जानकारी

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25 दिसम्बर, 2020

नई दिल्ली: 

पीएम केयर्स फंड (PM-CARES Fund) कोविड काल में अनुदान के लिए सरकार द्वारा बनाया गया था और यह एक सार्वजनिक निकाय है. केंद्र सरकार ने एक आरटीआई (RTI) के जवाब में यह जानकारी दी है. हालांकि यह जवाब उसके उसी हालिया दावे के उलट प्रतीत होता है, जिसमें कहा गया है कि यह फंड निजी है. सरकार ने कहा है कि पीएम-केयर्स भारत सरकार का, उसके द्वारा स्थापित और नियंत्रित संस्थान है. लेकिन यह सूचना के अधिकार (आरटीआई) कानून के दायरे में नहीं आता, क्योंकि  यह निजी फंड को स्वीकार करता है. पीएम केयर्स प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) ने मार्च में स्थापित किया था, ताकि कोरोना काल (Corona Pandemic) के दौरान की आपातकालीन जरूरतों को पूरा किया जा सके.

24 दिसंबर को एक RTI के जवाब में कहा गया, “पीएम-केयर्स फंड पूरी तरह से व्यक्तियों, संगठनों, सीएसआर, विदेशी व्यक्तियों, विदेशी संगठनों और पीएसयू से प्राप्त अनुदानों से चलता है. यह किसी भी सरकार से वित्त पोषित नहीं है औऱ ट्रस्टी के तौर पर निजी व्यक्ति ही इसका संचालन करते हैं. लिहाजा यह आरटीआई कानून की धारा 2 (एच) के तहत नहीं आता है. ऐसे में पीएम-केयर्स फंड (PM-CARES Fund)  को किसी भी तरह से सार्वजनिक निकाय नहीं माना जा सकता.”

27 मार्च को स्थापित पीएम-केयर्स फंड की ट्रस्टी डीड में कहा गया है कि यह सरकार का या उसके द्वारा नियंत्रित नहीं है. इस दस्तावेज से भ्रम और गहरा गया है कि क्योंकि आधिकारिक दस्तावेजों के मुताबिक इससे विरोधाभास पैदा हो रहा है.अब ऐसा प्रतीत हो रहा है कि यह फंड सरकारी निकाय के तौर पर चिन्हित किया गया है, जो दानदाताओं से करोड़ों रुपये का अनुदान स्वीकार करता है, लेकिन यह ऐसे अन्य सरकारी संगठनों की तरह दान की जानकारी देने को बाध्य नहीं है.

पीएम केयर्स ट्रस्ट ( (PM-CARES Trust) को दिल्ली के राजस्व विभाग में पंजीकृत कराया गया है. इसके चेयरपर्सन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हैं और कई वरिष्ठ मंत्री इसके ट्रस्टी हैं. लेकिन फंड की जो ट्रस्टी डीड हाल ही में इसकी वेबसाइट में डाली गई है, उसमें इसे सरकारी संस्थान के तौर पर नहीं दर्शाया गया है.पीएम केयर्स या प्राइम मिनिस्टर्स सिटीजन असिस्टेंस एंड रिलीफ इन इमरजेंसी सिचुएशंस फंड 27 मार्च को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा स्थापित किया गया था, ताकि कोरोना की महामारी के दौरान किसी भी आपात स्थिति के लिए धन का प्रबंध किया जा सके.

Farmers Protest: राजनाथ सिंह की अपील- दो साल के लिए लागू होने दें कृषि कानून, फायदा ना हुआ तो करेंगे बदलाव

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New delhi, 25 december,2020

केंद्र सरकार के कृषि कानूनों के खिलाफ पिछले कई दिनों से दिल्ली की सीमाओं पर चल रहे विरोध प्रदर्शन के बीच प्रधानमंत्री नरेद्र मोदी (Narendra Modi) ने शुक्रवार को अलग-अलग राज्यों के किसानों से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए बात की। पीएम मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि नए कृषि कानून किसानों की आय बढ़ाने और उन्हें बेहतर विकल्प देने के मकसद से लाए गए हैं। इस दौरान केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी दिल्ली के द्वारका इलाके में एक सभा को संबोधित किया। राजनाथ सिंह (Rajnath Singh) ने कहा कि आंदोलन कर रहे किसान इन कृषि कानूनों को एक प्रयोग के तौर पर दो साल के लिए लागू होने दें, इसके बाद अगर इनसे उन्हें फायदा नहीं होता मैं भरोसा देता हूं कि सरकार इन कानूनों में सभी जरूरी संशोधन करेगी।

राजनाथ सिंह ने आंदोलनकारी किसानों से कृषि कानूनों पर बातचीत के लिए आगे आने की अपील करते हुए कहा, ‘आज जो लोग कृषि कानूनों के खिलाफ धरने पर बैठे हैं, वो किसान हैं और किसानों के परिवार में उनका जन्म हुआ है। हमारे मन में उनके लिए बहुत सम्मान है। मैं भी एक किसान का बेटा हूं और आपको भरोसा दिलाता हूं कि मोदी सरकार ऐसा कोई काम नहीं करेगी, जो किसानों के हित में ना हो।’

सरकार के पास आकर चर्चा करें किसान-

राजनाथ राजनाथ सिंह ने कहा, ‘मैं आप लोगों से निवेदन करता हूं कि इन कानूनों को एक प्रयोग के तौर पर देश में लागू होने दें, अगर इनसे किसानों को फायदा नहीं हुआ, तो सरकार सभी जरूरी संशोधन करने के लिए तैयार है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी चाहते हैं कि किसानों के मन में जो भी शंका है, उसे बातचीत के जरिए सुलझाया जाए और इसीलिए सरकार ने एक बार फिर किसानों को बातचीत के लिए बुलाया है। मैं आंदोलन कर रहे किसानों से अपील करता हूं कि वो आकर सरकार से बातचीत करें और अपना आंदोलन वापस लें।’

महाराष्ट्रः MNS-अमेजन विवाद में राज ठाकरे को नोटिस, 5 जनवरी को कोर्ट में पेशी

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मुंबई,25 दिसंबर 2020

मुंबई की कोर्ट ने राज ठाकरे को नोटिस जारी किया है. कोर्ट ने राज ठाकरे को 5 जनवरी के दिन कोर्ट में पेश होने के लिए कहा है. कोर्ट ने यह नोटिस ऑनलाइन मार्केटिंग कंपनी अमेजन की ओर से दायर याचिका पर जारी किया है.

महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (एमएनएस) के प्रमुख राज ठाकरे की मुश्किलें बढ़ती दिख रही हैं. एमएनएस की ओर से मराठी भाषा को लेकर शुरू की गई मुहिम के मामले में मुंबई की कोर्ट ने राज ठाकरे को नोटिस जारी किया है. कोर्ट ने राज ठाकरे को 5 जनवरी के दिन कोर्ट में पेश होने के लिए कहा है. कोर्ट ने यह नोटिस ऑनलाइन मार्केटिंग कंपनी अमेजन की ओर से दायर याचिका पर जारी किया है.

अदालत के नोटिस के बाद एमएनएस ने कहा है कि हमारी लीगल टीम इस मामले को देख रही है. एमएनएस की यूथ विंग के उपाध्यक्ष अखिल चित्रे ने इस पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि पार्टी की ओर से मराठी भाषा के इस्तेमाल को लेकर लिखे गए पत्र के जवाब में अमेजन के प्रमुख जे बेजोस ने माफी मांगी थी. हाल ही में मुंबई के बीकेसी स्थित अमेजन के दफ्तर में पार्टी के पदाधिकारियों और अमेजन के अधिकारियों की बैठक भी हुई थी.

अखिल चित्रे के मुताबिक बैठक में अमेजन के अधिकारियों ने इस मसले के समाधान के लिए 20 दिन का समय मांगा था. लेकिन इसी बीच अमेजन की ओर से केस दायर कर दिया गया. हमारी लीगल टीम इस मसले को देख रही है. गौरतलब है कि राज ठाकरे की पार्टी एमएनएस की ओर से पिछले दिनों अमेजन के प्रमुख को पत्र लिखकर कंपनी के एप में मराठी भाषा का भी इस्तेमाल करने की अपील की थी.

एमएनएस की ओर से अमेजन प्रमुख को लिखे गए पत्र में कहा गया था कि कंपनी के एप में तमिल, तेलगू, कन्नड़ और मलयालम जैसी क्षेत्रीय भाषाओं का इस्तेमाल किया जा रहा है लेकिन मराठी का नहीं. मराठी भाषा भारत में तीसरी सबसे अधिक उपयोग की जाने वाली भाषा है. एमएनएस की ओर से इसके बाद ‘नो मराठी, नो अमेजन’ मुहिम शुरू की थी. पिछले दिनों एमएनएस कार्यकर्ताओं ने अमेजन के पोस्टर्स भी फाड़े थे. पोस्टर फाड़े जाने की घटना के बाद अमेजन ने एमएनएस के खिलाफ कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था.

PM मोदी बोले- नए कृषि कानून से देश में आधुनिक खेती के अवसर बढ़ेंगे

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25 december 2020

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को किसानों से संवाद करते हुए कृषि कानून पर चर्चा की. पीएम मोदी ने कहा कि किसानों को बरगला कर विपक्ष अपनी राजनीति चला रहा है. पीएम मोदी ने अपने संबोधन में कृषि कानून के फायदे भी गिनाए.

6.    अगर कोई किसान से एग्रीमेंट करेगा, तो वो चाहेगा कि फसल अच्छी हो. ऐसे में एग्रीमेंट करने वाला व्यक्ति बाजार के ट्रेंड के हिसाब से ही किसानों को आधुनिक चीजें उपलब्ध करवाएगा. अगर किसी वजह से किसान की फसल अच्छी नहीं होती या बर्बाद हो जाती है, तो भी किसान को फसल का पैसा मिलेगा. एग्रीमेंट करने वाला समझौता नहीं तोड़ सकता है, लेकिन किसान अपनी मर्जी से एग्रीमेट खत्म कर सकता है.

7.    देश की सभी सरकारें इस योजना से जुड़ी हैं लेकिन सिर्फ बंगाल के 70 लाख किसानों के ये लाभ नहीं मिल पा रहा है. बंगाल की सरकार राजनीतिक कारणों से किसानों को फायदा नहीं पहुंचाने दे रही है, वहां के किसानों ने सीधा भारत सरकार से अपील की है.

8.    जिन लोगों ने बंगाल में 30 साल सरकार चलाई आज वो इस मुद्दे पर कोई आंदोलन नहीं करते हैं. बंगाल के उसी विचारधारा के लोग आज पंजाब पहुंच गए हैं. बंगाल की सरकार अपने राज्यों में किसानों के लाभ को रोक रही है, लेकिन पंजाब पहुंच अपने राजनीतिक दुश्मनों के साथ मिलकर लड़ती हैं.

9.    MSP खत्म नहीं होगी, मंडियां भी चालू रहेंगी. सरकार ने किसानों को इस बात का भरोसा दिया है, अगर फिर भी कोई शंका है तो सरकार चर्चा के लिए तैयार है.

10.    सरकार का फोकस खेती की लागत को कम करने पर है. कई योजनाओं के तहत किसानों को लाभ दिया जा रहा है, मुफ्त बिजली-गैस-पानी सरकार ही दे रही है.

Amshipora Shopian encounter:राजौरी में तीन मजदूरों की हत्या का मामला, मेजर गुनहगार-रिपोर्ट

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25 दिसंबर, 2020

Amshipora Shopian encounter:भारतीय सेना के मेजर रैंक के एक अधिकारी को जम्मू-कश्मीर के राजौरी के तीन मजदूरों की हत्या का दोषी माना गया है। इन तीनों मजदूरों को शुरू में सुरक्षा बलों ने आतंकी होने का दावा किया था। यह एनकाउंटर इस साल जुलाई में प्रदेश के शोपियां जिले में हुआ था। बाद में जब इन तीनों के शवों को कब्र से निकालकर डीएनए टेस्ट किया गया तो ये लोग राजौरी के निवासी निकले, जिनके परिवार वालों ने उनकी गुमशुदगी की शिकायत दर्ज कर रखी थी। माना जा रहा है कि जब सारे सबूत मेजर के खिलाफ मिले हैं तो उनके कोर्ट मार्शल की प्रक्रिया शुरू की जा सकती

मेजर के खिलाफ मिले सबूत-रिपोर्ट

इंडियन एक्सप्रेस की एक खबर के मुताबिक इस साल जुलाई में जम्मू-कश्मीर के शोपियां जिले के अमशीपोरा में हुई तीन मजदूरों की हत्या के मामले में सेना के एक मेजर के खिलाफ सबूत मिल गए हैं। इस घटना में मारे जाने वाले लोगों में 16 साल का एक लड़का भी था,जो अपने गृहनगर राजौरीसे काम की तलाश में घाटी गए थे। लेकिन, 18 जुलाई को तड़के शोपियां के अमशीपोरा गांव में इनकी हत्या कर दीगई थी। शुरू में सुरक्षा बलों ने इन्हें आतंकी बताया था और उन्हें एनकाउंटर में मारे जाने की बात कही गई थी। सितंबर में एक कोर्ट ऑफ इनक्वायरी ने ही प्रथमदृष्टया इस मामले को सुरक्षा बलों को मिले अधिकारों का उल्लंघन हुआ है। इस मामले में सबूत जुटाने का काम पिछले हफ्ते ही पूरा हुआ है और पाया गया है कि दोषी मेजर के खिलाफ कई धाराओं में मुकदमा चलना चाहिए।

अब कोर्ट मार्शल की तैयारी

अखबार ने सूत्रों के हवाले से दावा किया है कि मेजर के खिलाफ तमाम सबूतों को नॉर्दर्न कमांड के जीओसी-इन-चार्ज लेफ्टिनेंट वाईके जोषी क भेज दिया गया है। इस मामले में अगली प्रक्रिया कोर्ट मार्शल (court martial) की होती है। रक्षा मंत्रालय के एक प्रवक्ता ने गुरुवार को कहा कि, ‘सबूत इकट्ठा करने की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। अब आगे की कार्रवाई के लिए संबंधित अधिकारी उसकी छानबीन के साथ ही कानूनी सलाकारों से राय ले रहे हैं। भारतीय सेना नैतिक व्यवहार के प्रति प्रतिबद्ध है। अगली जानकारी इस तरह से साझा की जाएगी ताकि सेना के कानून के तहत प्रक्रिया को लेकर कोई पूर्वाग्रह ना रहे।’

पहले आई थी एनकाउंटर की बात

अमशीपोरा की वारदात 18 जुलाई को हुई थी, जिसमें 62 राष्ट्रीय राइफल्स के एक मेजर और दो जवानों ने एक एनकाउंटर पार्टी बनाई, जिसमें बाद में जम्मू-कश्मीर और पुलिस की टीम भी शामिल हो गई। 19 जुलाई को आरआर के एक कमांडर ने प्रेस कांफ्रेंस में तीन आतंकियों के एनकाउंटर में मारे जाने की घोषणा की। बताया गया कि खास सूचना के आधार पर सर्च ऑपरेशन के दौरान यह मुठभेड़ हुई। कहा गया कि शवों की बरामदगी के दौरान हथियार, गोला-बारूद और आईईडी मटेरियल भी बरामद हुई।

शवों के डीएनए टेस्ट से सच आया सामने

लेकिन, बाद में खुलासा हुआ कि वो तीनों शव राजौरी के रहने वाले इम्तियाज अहमद, अबरार अहमद और मोहम्मद इबरार के थे, जिनके परिवार वालों ने अगस्त में उनकी गुमशुदगी की शिकायत दर्ज कराई। ये लोग 16 जुलाई तक परिवार वालों से फोन पर संपर्क में थे। परिवार वालों का कहना है कि जब उन्होंने एनकाइंटर में मारे गए लोगों के शवों को देखा तो उन्हें पहचान लिया। फिर इसपर काफी विवाद शुरू हो गया और सेना ने कोर्ट ऑफ इनक्वायरी गठित कर दी और पुलिस अपनी ओर से जांच में जुटी रही। इन लोगों को बारामुला में दफनाया गया था, अक्टूबर में उनके शवों को निकाल हुए डीएनए टेस्ट में पता चल गया कि ये तीनों वही गुमशुदा लोग थे।

 

पीएम मोदी ने किसानों के खाते में ट्रांसफर किए 18 हजार करोड़, शाह और राजनाथ बोले- खत्म नहीं होगी MSP

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25 दिसंबर, 2020

किसान आंदोलन (Farmers Protest) के बीच शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (PM Kisan Samman Nidhi) के तहत मिलने वाले 18 हजार करोड़ रुपए के वित्तीय लाभ की किस्त जारी कर दी है। पीएमओ की ओर से जारी बयान के मुताबिक पीएम मोदी ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए नौ करोड़ से अधिक किसान लाभार्थियों को वित्तीय सहायता की सौगात दी। कार्यक्रम के दौरान पीएम मोदी ने छह राज्यों के किसानों को संबोधित भी किया। बता दें कि कृषि कानूनों को लेकर जारी आंदोलन के बीच भारतीय जनता पार्टी (BJP)आज देश के अलग-अलग हिस्सों में किसान चौपाल का आयोजन किया है।

बीजेपी के इस कार्यक्रम में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह (Amit Shah), रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह (Rajnath Singh), वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (Nirmala Sitharaman) जैसे केंद्रीय मंत्रियों ने किसानों को संबोधित किया। शुक्रवार को दिल्ली के द्वारका में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और महरौली में गृह मंत्री अमित शाह ने किसानों को संबोधित करते हुए विपक्ष पर जमकर हमला किया। राजनाथ सिंह ने कहा, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा किसानों के लिए तीन कानून बनाए गए हैं। लेकिन आज कुछ लोगों के द्वारा गलतफहमी पैदा की जा रही है कि MSP खत्म कर दी जाएगी। मैं किसानों को वचन दे रहा हूं कि किसी भी कीमत पर MSP खत्म नहीं होगी।

 

जो लोग अपनी अहमियत नहीं समझते, उन्हें ज़रूर सुनाएं ये छोटी सी कहानी

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चीनी कंपनी को झटका, भारतीय रेलवे ने ‘वंदे भारत’ प्रोजेक्ट से दिखाया बाहर का रास्ता

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24 दिसंबर, 2020

44 डिब्बों को तैयार करने के लिए करीब 1800 करोड़ रुपये के इस प्रोजेक्ट में चाइनीज कंपनी के टेंडर को अयोग्य घोषित किया गया है. इस नीलामी में केवल तीन कंपनियां शामिल हुईं थी.

भारतीय रेलवे (Indian Railway) ने चाइनीज कंपनी को झटका देते हुए उसे वंदे भारत (Vande Bharat) ट्रेन सेट निर्माण के लिए होने वाली नीलामी से बाहर का रास्ता दिखा दिया है. 44 डिब्बों को तैयार करने के लिए करीब 1800 करोड़ रुपये के इस प्रोजेक्ट में चाइनीज कंपनी के टेंडर को अयोग्य घोषित कर दिया गया है. बता दें कि इस नीलामी में केवल तीन कंपनियां शामिल हुईं थीं.

इस तरह अब अब सिर्फ दो ही कंपनियां BHEL और Medha Servo Drives होड़ में रह गई हैं. बताया जा रहा है कि Medha कंपनी ने सबसे कम बोली लगाई थी, इसलिए उसको पहले ऐसी दो ट्रेन सेट के निर्माण का ठेका मिला था.

बता दें कि सीआरपीसी पायनियर इलेक्ट्रिक इंडिया (CRRC-Pioneer Electric India) भी बोली में शामिल थी, लेकिन रेलवे द्वारा इसके कंसोर्टियम को अयोग्य ठहराते हुए बोली से बाहर कर दिया गया. यह कंपनी चीन की कंपनी CRRC Yongji Electric Ltd और भारत की Pioneer Fil-Med Ltd कंपनियों की साझेदारी वाली कंपनी है. Pioneer का प्लांट हरियाणा में लगा हुआ है.

मालूम हो कि भारतीय रेलवे को इन टेंडर्स का मूल्यांकन करने और फाइनल कॉल लेने में करीब चार हफ्ते का समय लगा. इंटीग्रल कोच फैक्ट्री यानी कि ICF से रेलवे ‘वंदे भारत’ ट्रेन के 44 डिब्बों को खरीदेगा.

गौरतलब है कि पूर्वी लद्दाख में चीन और भारत की सेनाओं के बीच हुई हिंसक झड़प के बाद सरकार लगातार चीन की कंपनियों पर सख्त रवैया अपना रही है. इससे पहले सरकार ने कई चाइनीज ऐप्स को भी बैन किया था. साथ ही चाइनीज कंपनियों के निवेश को लेकर भी कई नियमों पर भी सख्ती बरती जा रही है.