महाराष्ट्र की राजनीति में बुधवार को बड़ा मोड़ आया जब उद्धव ठाकरे की शिवसेना (UBT) और राज ठाकरे की महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) ने 20 साल बाद गठबंधन का ऐलान किया। दोनों दल 2026 के BMC चुनाव समेत राज्य की 29 नगर निगमों में एक साथ चुनाव लड़ेंगे। यह गठबंधन पिछले कई हफ्तों से तैयार किया जा रहा था और अब इसकी औपचारिक घोषणा प्रेस कॉन्फ्रेंस के जरिए की गई।
गठबंधन के पीछे की रणनीति
ठाकरे भाइयों के गठबंधन का मुख्य उद्देश्य मराठी वोट का बंटवारा रोकना और BMC में सत्ता कायम रखना है। उद्धव ठाकरे ने कहा कि मुंबई को महाराष्ट्र से अलग नहीं होने देंगे और दिल्ली से गठबंधन को तोड़ने की कोशिश हो रही है, लेकिन इस बार वे टूटने नहीं देंगे। उन्होंने यह भी कहा कि मराठियों के बलिदान को याद रखना और आपसी लड़ाई से शहर को नुकसान नहीं पहुंचाना जरूरी है। वहीं राज ठाकरे ने कहा कि महाराष्ट्र किसी भी व्यक्तिगत झगड़े से बड़ा है और अगला महापौर मराठी होगा, जो उनके गठबंधन से आएगा। उन्होंने यह भी साफ किया कि कोई भी मराठी व्यक्ति गठबंधन में शामिल हो सकता है।
BMC सीट शेयरिंग का फॉर्मूला
BMC के लिए सीटों का फॉर्मूला भी तय कर लिया गया है। शिवसेना (UBT) 145–150 सीटों पर उम्मीदवार उतारेगी, जबकि MNS को 65–70 सीटें मिलेंगी। शरद पवार गुट की NCP को मात्र 10–12 सीटें मिलने की संभावना है। मुख्य मराठी बहुल इलाके जैसे दादर, माहिम, विक्रोली और भांडुप में गठबंधन की रणनीति से वोट बंटवारा नहीं होगा। अन्य नगर निगम जैसे पुणे, नवी मुंबई, ठाणे और नासिक में भी सीटों पर लगभग सहमति बन चुकी है।
राजनीतिक असर और एनालिसिस
विश्लेषकों का मानना है कि यह गठबंधन मराठी राजनीति को फिर से मजबूत करेगा और BMC चुनाव का समीकरण पूरी तरह बदल सकता है। गठबंधन के कारण बीजेपी और कांग्रेस के लिए चुनौती बढ़ गई है, जबकि उद्धव–राज गठबंधन BMC में सत्ता और महापौर पद पर मजबूत स्थिति में दिख रहा है। सीट शेयरिंग स्पष्ट होने से उम्मीदवार तय करना और प्रचार रणनीति बनाना भी आसान हो जाएगा।
यह गठबंधन केवल चुनावी कदम नहीं है, बल्कि मराठी राजनीति को मजबूत करने और मुंबई की पहचान बचाने की रणनीति है। यदि गठबंधन और सीट शेयरिंग योजना सही ढंग से लागू हुई, तो 2026 के BMC चुनाव का परिणाम इस गठबंधन के पक्ष में जा सकता है।




