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BMC चुनाव के बाद महाराष्ट्र की राजनीति गरमाई राज ठाकरे का ‘मराठी मानुष’ कार्ड, बीएमसी मेयर पद पर एकनाथ शिंदे का दावा

BMC चुनाव के बाद महाराष्ट्र की राजनीति गरमाई राज ठाकरे का ‘मराठी मानुष’ कार्ड, बीएमसी मेयर पद पर एकनाथ शिंदे का दावा

महाराष्ट्र नगर निगम चुनावों के नतीजों के बाद राज्य की राजनीति एक बार फिर गरमा गई है। एक तरफ महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना प्रमुख Raj Thackeray ने हार स्वीकार करते हुए ‘मराठी मानुष’ की लड़ाई जारी रखने का ऐलान किया है, तो दूसरी ओर बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) के त्रिशंकु नतीजों के बीच डिप्टी सीएम Eknath Shinde ने महापौर पद पर खुलकर दावा ठोक दिया है।

राज ठाकरे का संदेश: हार नहीं, संघर्ष अहम

चुनाव नतीजों के बाद राज ठाकरे ने सोशल मीडिया के ज़रिये अपनी पहली प्रतिक्रिया दी। उन्होंने ‘सस्नेह जय महाराष्ट्र’ कहते हुए मनसे और शिवसेना के सभी निर्वाचित नगरसेवकों को बधाई दी।
राज ठाकरे ने माना कि यह चुनाव आसान नहीं था और अपार धनशक्ति व सत्ता की ताकत के सामने लड़ाई बेहद कठिन रही, लेकिन इसके बावजूद कार्यकर्ताओं ने जिस तरह संघर्ष किया, वह सराहनीय है।

उन्होंने कहा कि मनसे को भले ही अपेक्षित सफलता न मिली हो, लेकिन पार्टी हिम्मत हारने वालों में से नहीं है। चुने गए नगरसेवक अपने-अपने क्षेत्रों में सत्ताधारियों को कड़ी चुनौती देंगे और मराठी मानुष के खिलाफ किसी भी कदम का जवाब देंगे।

‘मराठी मानुष’ और अस्मिता की राजनीति

राज ठाकरे ने साफ किया कि मनसे की लड़ाई मराठी मानुष, मराठी भाषा और मराठी अस्मिता के लिए है। उन्होंने कहा कि यह लड़ाई लंबी है और चुनाव आते-जाते रहेंगे, लेकिन मराठी पहचान की लड़ाई कभी नहीं रुकेगी।
उन्होंने कार्यकर्ताओं से संगठन की कमियों का विश्लेषण कर नए सिरे से मजबूती के साथ खड़े होने का आह्वान किया।

बीएमसी नतीजों ने बदला सत्ता का गणित

इधर बीएमसी चुनाव नतीजों ने मुंबई की राजनीति को पूरी तरह असमंजस में डाल दिया है। किसी भी दल को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला, जिससे हालात त्रिशंकु बन गए हैं।
शुरुआती रुझानों में भाजपा और ठाकरे गुट के बीच कड़ा मुकाबला देखने को मिला। दोपहर तक महायुति मजबूत स्थिति में दिखी, लेकिन शाम होते-होते शिवसेना (उद्धव गुट) का आंकड़ा बढ़ता गया, जिससे तस्वीर और जटिल हो गई।

मेयर पद पर शिंदे का सियासी दांव

इन बदले हालातों के बीच एकनाथ शिंदे ने बीएमसी के महापौर पद पर दावा ठोककर सियासी हलचल बढ़ा दी है। शिंदे गुट का कहना है कि महायुति के प्रदर्शन और संख्याबल के आधार पर शिवसेना (शिंदे गुट) का दावा मजबूत बनता है।
राजनीतिक जानकार इसे Bharatiya Janata Party पर दबाव बनाने की रणनीति के तौर पर देख रहे हैं। शिवसेना का यह भी तर्क है कि बालासाहेब ठाकरे की जन्मशताब्दी के वर्ष में मुंबई का महापौर शिवसेना का ही होना चाहिए और इसके लिए ढाई साल का फॉर्मूला अपनाया जा सकता है।

कांग्रेस और AIMIM बनीं किंगमेकर

बीएमसी नतीजों में कांग्रेस ने 20 से अधिक सीटें जीतकर अपनी स्थिति मजबूत की है, जबकि AIMIM ने 8 सीटों के साथ चौंकाने वाला प्रदर्शन किया। इन दोनों दलों की भूमिका अब मेयर चुनाव में निर्णायक मानी जा रही है।

एक ओर राज ठाकरे सड़क और संगठन के स्तर पर मराठी अस्मिता की राजनीति को धार देने का संकेत दे रहे हैं, तो दूसरी ओर बीएमसी में सत्ता की कुर्सी को लेकर जोड़-तोड़ तेज़ हो चुकी है।
नगर निगम चुनावों के बाद साफ है कि महाराष्ट्र की राजनीति फिलहाल ठहरने वाली नहीं है। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि बीएमसी का अगला महापौर कौन बनेगा और यह फैसला मुंबई ही नहीं, पूरे राज्य की राजनीति की दिशा कैसे तय करेगा।

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