अमेरिका द्वारा वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की गिरफ्तारी ने पूरी दुनिया को चौंका दिया है। शुरुआत में इस कार्रवाई को ड्रग्स तस्करी और नार्को-टेररिज्म के खिलाफ कदम बताया गया, लेकिन अब सामने आ रही अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट्स इस कहानी का दूसरा पहलू उजागर कर रही हैं।
ब्रिटिश मीडिया संस्था Sky News की एक रिपोर्ट के मुताबिक, इस पूरे घटनाक्रम के केंद्र में वेनेजुएला का विशाल तेल भंडार है।
ड्रग्स तस्करी या ऊर्जा रणनीति?
अमेरिका लंबे समय से मादुरो सरकार पर ड्रग्स तस्करी को संरक्षण देने के आरोप लगाता रहा है। अमेरिकी नौसेना की तैनाती, तट के पास टैंकरों की निगरानी और समुद्री सुरक्षा अभियानों को भी इसी अभियान का हिस्सा बताया गया।
हालांकि स्काई न्यूज की रिपोर्ट कहती है कि यह सिर्फ सतही वजह हो सकती है। असल कारण अमेरिका की ऊर्जा सुरक्षा और तेल से जुड़ी रणनीति से जुड़ा हो सकता है।
जब अमेरिका खुद सबसे बड़ा तेल उत्पादक है, फिर वेनेजुएला क्यों?
पहली नजर में यह सवाल अटपटा लगता है। शेल ऑयल क्रांति के बाद अमेरिका दुनिया का सबसे बड़ा तेल उत्पादक बन चुका है।
लेकिन जानकार बताते हैं कि समस्या तेल की मात्रा नहीं, बल्कि तेल की किस्म है।
हल्का बनाम भारी तेल: यहीं है पूरा खेल
कच्चा तेल कई प्रकार का होता है।
अमेरिका में निकलने वाला शेल ऑयल ज्यादातर हल्का होता है, जो आसानी से बहता है।
वहीं वेनेजुएला का तेल बेहद भारी और गाढ़ा होता है। अमेरिका की कई बड़ी रिफाइनरियां खास तौर पर भारी कच्चे तेल को प्रोसेस करने के लिए डिजाइन की गई हैं।
अमेरिकी रिफाइनरियों की मजबूरी
टेक्सास, लुइज़ियाना और खाड़ी तट पर स्थित कई अमेरिकी रिफाइनरियां दशकों पहले बनाई गई थीं, जब भारी कच्चे तेल की उपलब्धता ज्यादा थी।
इन रिफाइनरियों को हल्के तेल के अनुरूप बदलना न केवल बेहद महंगा है, बल्कि तकनीकी रूप से भी जटिल प्रक्रिया है। यही वजह है कि अमेरिका आज भी भारी तेल के आयात पर निर्भर बना हुआ है।
उत्पादन ज्यादा, फिर भी आयात क्यों?
भले ही अमेरिका तेल उत्पादन में अव्वल हो, लेकिन भारी कच्चे तेल की जरूरत के लिए उसे आयात करना पड़ता है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका के कुल तेल आयात में करीब 70 प्रतिशत हिस्सा भारी तेल का है। यही वह सेगमेंट है, जिसमें वेनेजुएला अमेरिका के लिए अहम बन जाता है।
भारी तेल के सबसे बड़े भंडार कहां हैं?
दुनिया में भारी कच्चे तेल के बड़े भंडार कुछ ही देशों के पास हैं—
कनाडा, वेनेजुएला और रूस।
इनमें वेनेजुएला के पास दुनिया का सबसे बड़ा प्रमाणित तेल भंडार है, जिसका बड़ा हिस्सा अब भी जमीन के नीचे मौजूद है।
यहीं से जुड़ती है भू-राजनीति
स्काई न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका की नजर वेनेजुएला के उसी भारी और गाढ़े तेल पर है, जो उसकी रिफाइनरियों के लिए सबसे उपयुक्त है।
इसी वजह से विशेषज्ञ मानते हैं कि मादुरो की गिरफ्तारी को सिर्फ ड्रग्स तस्करी के एंगल से देखना अधूरी तस्वीर पेश करता है।
क्या तेल ही असली गेमचेंजर है?
ऊर्जा विशेषज्ञों का कहना है कि वेनेजुएला का तेल अमेरिका के लिए केवल आर्थिक संसाधन नहीं, बल्कि एक रणनीतिक हथियार भी है।
अगर अमेरिका इस तेल पर नियंत्रण या प्रभाव बढ़ाने में सफल होता है, तो इससे वैश्विक ऊर्जा राजनीति और शक्ति संतुलन में बड़ा बदलाव आ सकता है।
मादुरो की गिरफ्तारी ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या यह कार्रवाई ड्रग्स के खिलाफ जंग थी या फिर तेल के लिए लड़ी जा रही एक बड़ी भू-राजनीतिक लड़ाई।
जवाब चाहे जो भी हो, लेकिन इतना तय है कि वेनेजुएला का तेल इस पूरी कहानी का सबसे अहम किरदार बन चुका है।




