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देहरादून, 28 अगस्त 2021

विधानसभा के मानसून सत्र में नेता सदन, नेता विपक्ष से लेकर संसदीय कार्यमंत्री के लिए पहली परीक्षा की तरह था। इस दौरान तीनों ने अपनी भूमिका से पूरा न्याय किया। नेता सदन पुष्कर सिंह धामी ने जहां अहम मौकों पर विपक्षी विधायकों की नाराजगी खुद दूर की वहीं, नेता विपक्ष प्रीतम सिंह सदन के अंदर लगातार सरकार पर हमलावर रहे। संसदीय कार्यमंत्री बंशीधर भगत भी बिना खास व्यवधान के सदन की कार्रवाई पूरा होने का श्रेय ले सकते हैं।

विपक्ष से मिली तारीफ:सीएम पुष्कर सिंह धामी
शनिवार को समाप्त हुआ सत्र पुष्कर सिंह का बतौर सीएम पहला सत्र था। धामी सत्र के सभी दिन सदन में पहुंचे, जबकि पहले चार साल के कार्यकाल में तत्कालीन सीएम त्रिवेंद्र रावत खास मौकों पर ही सदन में आते थे। धामी ने ना सिर्फ सदन में सरकार की तरफ से मोर्चा संभाला बल्कि अलग-अलग मांगों को लेकर धरना दे रहे विपक्षी विधायकों के बीच पहुंच उन्हें वार्ता के लिए अपने कमरे में ले गए। विपक्ष को सम्मान देने की नीति के चलते, सदन में विपक्ष आक्रामक होकर भी सरकार की राह में खास बाधा खड़ी नहीं कर पाया। विपक्षी विधायक भी उनके इस व्यवहार के मुरीद नजर आए। यही नहीं सीएम ने सदन में लगातार राहत पैकेज की घोषणा करके भी सदन के मंच का बेहतर इस्तेमाल किया।
बदली भूमिका में आक्रामक: नेता प्रतिपक्ष प्रीतम सिंह 
प्रीतम सिंह के लिए बतौर नेता विपक्ष यह पहला सत्र था। पूर्व के सत्र में प्रीतम सिंह कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष होने के बावजूद तत्कालीन नेता विपक्ष स्वर्गीय इंदिरा हृदयेश की छाया से बाहर नहीं निकल पाते थे। लेकिन इस बार उन्होंने विपक्ष के हमलों का बखूबी नेतृत्व किया। आमतौर पर शांत मिजाज के प्रीतम सिंह ने मौके अनुसार भरपूर आक्रामकता दिखाई। इस दौरान भ्रष्टाचार के मुद्दे पर उन्होने सभी लोगों की जांच की मांग करते हुए, खुद से जांच शुरू किए जाने का प्रस्ताव सरकार के सामने दिया। यही नहीं शिक्षा मंत्री अरविंद पांडेय के साथ बहस के दौरान उन्होंने विनम्रता दिखाते हुए अपने शब्दों को वापस लेकर राजनैतिक शिष्टाचार का भी आदर्श प्रस्तुत किया।
सरकार पर नहीं आने दी आंच: संसदीय कार्यमंत्री बंशीधर भगत
इस सत्र में बंशीधर भगत को भी पहली बार संसदीय कार्यमंत्री का दायित्व निभाने का मौका मिला। जबकि पूर्व के सत्र में अस्थायी तौर पर मदन कौशिक यह भूमिका निभाते थे। वरिष्ठतम विधायकों में शामिल भगत ने ना सिर्फ सरकार के सभी जवाबों को पूरे तथ्यों के साथ दिया बल्कि अन्य साथी मंत्रियों को घेरने की विपक्ष की कोशिश को भी फेल किया। इससे पहले मदन कौशिक की आक्रामकता से कई बार विपक्ष के साथ सत्ता पक्षा की तनातनी हो जाती थी, लेकिन इस बार बंशीधर भगत ने काफी हद तक विपक्ष को हावी होने से रोके रखा।