देहरादून, 25 अगस्त 2021

उत्तराखंड में आपदा से प्रभावित परिवारों का विस्थापन या मुआवजा अब 2011 की जनगणना के अनुसार नहीं होगा। सरकार आपदा के मानकों में बदलाव करने जा रही है। आपदा प्रबंधन मंत्री डॉ धन सिंह रावत ने विधानसभा में इसकी घोषणा की। उन्होंने कहा कि सरकार जल्द इस संदर्भ में प्रस्ताव तैयार कर अगली कैबिनेट में प्रस्तुत करेगी ताकि आपदा से प्रभावित राज्य के लोगों को लाभ मिल सके। दरअसल कांग्रेस विधायक हरीश धामी ने शून्य काल में आपदा प्रभावितों का मुद्दा उठाया था।

उन्होंने कहा कि उनकी विधानसभा क्षेत्र के एक भी परिवार का विस्थापन नहीं हो पाया है। कई सड़कें महीनों बाद भी नहीं खुल पाई हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि बीआरओ और सीपीडब्ल्यूडी उनके क्षेत्र के कई प्रमुख सड़कों को नहीं खोल रहे हैं। एक बार जब वे ग्रामीणों की मदद के लिए खुद सड़क खोलने के लिए पहुंचे तो उन पर उल्टा केस कर दिया गया। उन्होंने कहा कि सरकार उन्हें न्याय दे और उनके क्षेत्र के आपदा प्रभावित लोगों की मदद की जाए।

उन्होंने 2011 के मानकों के अनुसार विस्थापन और मुआवजे का भी विरोध किया। इस दौरान नेता प्रतिपक्ष प्रीमत सिंह ने भी आपदा प्रभावितों का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि बड़ी संख्या में राज्य में लोग आपदा से प्रभावित हो रहे हैं लेकिन सरकार कुछ नहीं कर रही। उन्होंने कहा कि आपदा से जुड़े मुआवजे के लिए सरकार मौजूदा आंकड़ों के अनुसार मुआवजा दे।

इसके जबाव में आपदा प्रबंधन मंत्री ने कहा कि सरकार इस संदर्भ में कार्रवाई कर रही है। और मानकों में बदलाव का प्रस्ताव तैयार कर अगली कैबिनेट में लाया जाएगा। उन्होंने कहा कि आपदा के मानक केंद्र सरकार के हैं इसके बावजूद राज्य सरकार इसमें प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि मानकों में बदलाव के बाद परिवार के सभी सदस्यों को मुआवजा मिल जाएगा।