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लखनऊ, 29 जुलाई 2021

उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग (Uttar Pradesh Electricity Regulatory Commission) ने गुरूवार को प्रदेश के बिजली उपभोक्ताओ के हित में एक बड़ा फैसला लिया है. इसके तहत विद्युत नियामक आयोग ने बीते दिनों उत्तर प्रदेश पावर कॉर्पोरेशन द्वारा बिजली उपभोक्ताओं पर रेगुलेटरी सरचार्ज लगाने समेत सभी प्रस्तावों को सिरे से खारिज कर दिया है. UPPCL के इन प्रस्तावों से बिजली उपभोक्ता के बिल में एक बड़ी बढ़ोत्तरी हो सकती थी. लेकिन आज विद्युत नियामक आयोग द्वारा इन सभी प्रस्तावों को खारिज कर दिए जाने से अब इस साल बिजली उपभोक्ताओं पर कोई अतिरिक्त बोझ नहीं झेलना पड़ेगा. इसके चलते राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद ने भी विद्युत नियामक आयोग के इस फैसले को ऐतिहासिक बताया है.

दरअसल, UPPCL ने बीते दिनों उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग को अपने आर्थिक लाभ के लिए बिजली उपभोक्ताओं पर रेगुलेटरी सरचार्ज लगाने और स्लैब में बदलाव के साथ बिजली दरों में बढ़ोत्तरी समेत कई प्रस्ताव भेजे थे. इस पर विद्युत नियामक आयोग के अध्यक्ष आरपी सिंह ने एक लंबे समय तक सुनवाई करने के बाद आज इन सभी प्रस्तावों को सिरे से खारिज कर ये साफ कर दिया है कि यूपी में बिजली उपभोक्ताओं पर न तो रेगुलेटरी सरचार्ज लगेगा और न ही मौजूदा बिजली दरों में कोई बढ़ोत्तरी की जाएगी. इसके चलते उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद ने आज नियामक आयोग के इस फैसले की तारीफ करते हुए इसे ऐतिहासिक फैसला करार दिया है.

पुनर्विचार याचिका दाखिल होगी

उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उपभोक्ता संघ के अध्यक्ष अवधेश वर्मा के मुताबिक ‘ विद्युत नियामक आयोग ने राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के उस दावे पर भी मुहर लगा दी है जिसके मुताबिक उत्तर प्रदेश की बिजली कंपनियो पर इस वर्ष भी उदय और ट्रू-अप से मिलने वाले लाभ से बिजली उपभोक्ताओं का ही 1059 करोड रूपये समेत अबतक करीब 20 हजार करोड रूपये से अधिक का सरप्लस निकल रहा है. इसके चलते बिजली की दरों में बढ़ोत्तरी के बजाय कमी होनी थी, लेकिन उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन और सरकार का सहयोग न मिलने के चलते इस बार बिजली दरों में कमी नहीं हो सकी है. इसके चलते अब एक बार फिर टैरिफ का गहन अध्ययन कर बिजली दरों में कमी के लिए राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद  विद्युत नियामक आयोग में एक पुनर्विचार याचिका दाखिल करेंगा.’