नई दिल्ली, 5 जुलाई 2021

भारत में सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया के द्वारा बनाई जा रही कोविशील्ड वैक्सीन को लेकर एक नई स्टडी के चौंकाने वाले नतीजे सामने आए हैं। दरअसल, ICMR की स्टडी में ये सामने आया है कि कोविशील्ड की दोनों डोज लेने के बाद करीब 16.1 फीसदी सैंपल में कोरोना के डेल्टा वेरिएंट के खिलाफ एंटीबॉडी नहीं मिली है। वहीं कोविशील्ड की सिंगल डोज लेने के बाद करीब 58.1 फीसदी सैंपल में एंटीबॉडी डेवलेप नहीं हुई।

इस स्टडी के नतीजों को लेकर वेल्लोर स्थित क्रिश्चियन मेडिकल कॉलेज में माइक्रोबायोलॉजी विभाग के पूर्व प्रमुख डॉ टी जैकब जॉन ने हिंदुस्तान टाइम्स को बताया है कि किसी व्यक्ति में एंटीबॉडी का होना और एंटीबॉडी नजर आना, दोनों अलग बात हैं। डॉक्टर जैकब जॉन ने बताया कि हो सकता है एंटीबॉडी हों, लेकिन वो इतनी कम हो कि उन्हें डिटेक्ट कर पाना मुश्किल हो, लेकिन वो एंटीबॉडी किसी व्यक्ति को संक्रमण से बचा सकती है।

जिनमें एंटीबॉडी नहीं तो उन्हें बूस्टर डोज की जरूरत पड़ सकती है

डॉक्टर जैकब जॉन ने आगे कहा कि इस स्टडी के लिए जो सीरम लिया गया वो स्वस्थ व्यक्तियों से था, तो जिन लोगों में एंटीबॉडी नहीं देखी गई, वो बुजुर्ग हैं या उन्हें पहले से कोई गंभीर बीमारी है, क्योंकि उनका इम्युन रिस्पॉन्स कम है। ऐसे में उन लोगों को तीसरा डोज दिया जा सकता है। डॉक्टर जॉन का कहना है कि इस स्टडी से इतना तो पता चलता है कि भारत में कुछ लोगों को कोविशील्ड के बूस्टर डोज की जरूरत पड़ सकती है, लेकिन जो लोग कोविड से ठीक हो चुके हैं, उनके लिए एक ही डोज काफी है।