नई दिल्ली, 4 जून 2021

कोरोना महामारी को देखते हुए मोदी सरकार ने दो दिन पहले एक बड़ा फैसला लिया, जिसके तहत CBSE की 12वीं की परीक्षा रद्द कर दी गई। अब सभी छात्रों को आंतरिक मूल्यांकन के आधार पर पास किया जाएगा, लेकिन एक सवाल छात्रों के सामने तब से खड़ा था कि मूल्यांकन का आधार क्या होगा? इसका मामला सुप्रीम कोर्ट में भी पहुंचा था, जहां से सरकार को 2 हफ्ते के अंदर पूरा प्लान तैयार करने के निर्देश मिले। जिस पर अब CBSE ने एक बड़ा फैसला लिया है।

CBSE ने एक कमेटी का गठन किया है, जो अच्छी तरह से परिभाषित वस्तुनिष्ठ मानदंड तय करेगी। इसके अलावा कमेटी को 10 दिनों के अंदर रिपोर्ट पेश करने को कहा गया है, ताकी 14 दिन के अंदर सुप्रीम कोर्ट को जवाब दिया जा सके। इस कमेटी में शिक्षा मंत्रालय के ज्वाइंट सेक्रेट्री विपिन कुमार, आईएएस उदित प्रकाश, केंद्रीय विद्यालय की कमिश्नर निधि पांडे, IRSEE विनायक गर्ग, पीके बनर्जी, बीसीएसई डायरेक्टर अंतरिक्ष जोहरी जैसे कई नाम शामिल हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने कही थी ये बात
जस्टिस एएम खानविलकर और दिनेश माहेश्वरी की बेंच ने सुनवाई के दौरान परीक्षा रद्द करने के फैसले पर खुशी जाहिर की। साथ ही कहा कि याचिका का निपटारा तब तक नहीं किया जा सकता, जब तक केंद्र मूल्यांकन योजना के साथ सामने नहीं आता। वहीं केंद्र का प्रतिनिधित्व करने वाले अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने चार हफ्ते का समय मांगा, लेकिन कोर्ट ने उन्हें दो हफ्ते के बाद मूल्यांकन निर्णय के साथ आने को कहा। खंडपीठ ने कहा कि कई बच्चों को उच्च शिक्षा के लिए विदेश जाना है, ऐसे में अगर आप देर से अपना प्लान लेकर आएंगे, तो उनका भविष्य खतरे में पड़ सकता है। ऐसे में इसे तत्काल निपटाना जरूरी है।