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ग्लोबल ऑयल क्राइसिस का असर, लेकिन भारत में राहत, जानिए एक्साइज ड्यूटी कटौती का पूरा गणित

ग्लोबल ऑयल क्राइसिस का असर, लेकिन भारत में राहत, जानिए एक्साइज ड्यूटी कटौती का पूरा गणित

द फ्रंट डेस्क: अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आई तेज बढ़ोतरी के बीच केंद्र सरकार ने बड़ा फैसला लेते हुए पेट्रोल और डीजल पर एक्साइज ड्यूटी घटा दी है। इस कदम का उद्देश्य आम जनता को राहत देना और बढ़ती महंगाई पर नियंत्रण बनाए रखना है। अगर सरकार यह फैसला नहीं लेती, तो देश में ईंधन की कीमतों में बड़ा उछाल देखने को मिल सकता था, जिसका सीधा असर आम लोगों की जेब पर पड़ता।

मिडिल ईस्ट संकट से बढ़ीं कच्चे तेल की कीमतें

पश्चिम एशिया में जारी तनाव और संघर्ष का असर वैश्विक तेल बाजार पर साफ दिखाई दे रहा है। कच्चे तेल की सप्लाई को लेकर अनिश्चितता बढ़ने के कारण कीमतों में तेज उछाल आया है। पेट्रोलियम मंत्रालय के पीपीएसी (PPAC) के आंकड़ों के अनुसार, फरवरी 2026 में भारतीय बास्केट का औसत कच्चा तेल मूल्य 69.01 डॉलर प्रति बैरल था, जो 24 मार्च तक बढ़कर 123.15 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गया। यह बढ़ोतरी करीब 78 प्रतिशत है, जो यह दर्शाती है कि वैश्विक स्तर पर ऊर्जा संकट की स्थिति बन रही है। इस तेजी ने भारत जैसे आयात पर निर्भर देशों के लिए चिंता बढ़ा दी थी।

तेल कंपनियों पर बढ़ा दबाव, कीमतें बढ़ने का खतरा

कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी का सीधा असर तेल कंपनियों की लागत पर पड़ता है। जब कच्चा तेल महंगा होता है, तो पेट्रोल और डीजल की कीमतें बढ़ाना लगभग तय हो जाता है। इस स्थिति में तेल कंपनियों पर दबाव था कि वे खुदरा कीमतों में वृद्धि करें। अगर ऐसा होता, तो आम लोगों को ज्यादा पैसे खर्च करने पड़ते और परिवहन से लेकर रोजमर्रा की चीजों तक हर चीज महंगी हो जाती।

सरकार ने टैक्स घटाकर दिया राहत का विकल्प

इस चुनौतीपूर्ण स्थिति में सरकार ने आम जनता को राहत देने का रास्ता चुना। पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने बताया कि सरकार के सामने दो विकल्प थे—या तो अंतरराष्ट्रीय बाजार के अनुसार कीमतें बढ़ाई जाएं या फिर टैक्स में कटौती कर लोगों को राहत दी जाए। सरकार ने दूसरा विकल्प अपनाया और एक्साइज ड्यूटी घटाकर कीमतों को नियंत्रित करने की कोशिश की। इस फैसले से यह साफ है कि सरकार ने राजस्व से ज्यादा जनता के हित को प्राथमिकता दी है।

वैश्विक स्तर पर भी ईंधन महंगा, भारत ने चुना संतुलन

अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतें 70 डॉलर से बढ़कर 120 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच चुकी हैं। इसका असर दुनिया के कई देशों में देखने को मिल रहा है। दक्षिण-पूर्व एशिया में 30% से 50% तक, यूरोप में लगभग 20%, उत्तरी अमेरिका में करीब 30% और अफ्रीकी देशों में 50% तक ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इसके बावजूद भारत ने टैक्स में कटौती कर कीमतों को नियंत्रित रखने की कोशिश की है, जो एक संतुलित आर्थिक कदम माना जा रहा है।

महंगाई पर असर और आम आदमी को राहत

पेट्रोल और डीजल की कीमतें पूरी अर्थव्यवस्था को प्रभावित करती हैं। ईंधन महंगा होने से ट्रांसपोर्ट, खाद्य पदार्थ, औद्योगिक उत्पादन और रोजमर्रा की चीजें महंगी हो जाती हैं। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि एक्साइज ड्यूटी में कटौती का उद्देश्य उपभोक्ताओं को बढ़ती कीमतों से बचाना और महंगाई को नियंत्रित रखना है। इस फैसले से आम आदमी को सीधी राहत मिलेगी और बाजार में कीमतों को स्थिर बनाए रखने में मदद मिल सकती है। हालांकि, इससे सरकार के राजस्व पर असर पड़ेगा, लेकिन जनहित को प्राथमिकता देते हुए यह कदम उठाया गया है।

कुल मिलाकर, वैश्विक तेल संकट के बीच सरकार ने एक रणनीतिक और जनहितकारी फैसला लेते हुए पेट्रोल-डीजल पर एक्साइज ड्यूटी घटाई है। यह कदम न सिर्फ आम आदमी को राहत देता है, बल्कि महंगाई को नियंत्रित करने और आर्थिक संतुलन बनाए रखने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

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