मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच इजराइल अब लेबनान में बड़े जमीनी सैन्य अभियान की तैयारी कर रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इजराइल की योजना दक्षिणी लेबनान के उस पूरे इलाके पर कब्जा करने की है जो लितानी नदी के दक्षिण में आता है। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य वहां सक्रिय हिज्बुल्लाह के सैन्य ढांचे, मिसाइल लॉन्चिंग साइट्स और हथियारों के भंडार को खत्म करना है। अगर यह अभियान शुरू होता है तो यह 2006 के लेबनान युद्ध के बाद इजराइल का सबसे बड़ा जमीनी ऑपरेशन माना जाएगा। रिपोर्ट्स के अनुसार, इजराइली सेना इस ऑपरेशन के लिए सीमा पर बड़े स्तर पर सैन्य तैयारी कर चुकी है। इजराइल की डिफेंस फोर्स (IDF) पहले ही लेबनान सीमा पर तीन बख्तरबंद और पैदल सेना डिवीजन तैनात कर चुकी है। पिछले दो हफ्तों में कुछ सीमित जमीनी घुसपैठ भी की गई है, जिससे इलाके की स्थिति और हिज्बुल्लाह की गतिविधियों का आकलन किया जा सके। अब सेना अतिरिक्त सैनिकों और रिजर्व फोर्स को भी तैनात करने की तैयारी कर रही है।
क्या है इजराइल की रणनीति?
इजराइल का कहना है कि इस सैन्य अभियान का उद्देश्य सीमा के पास मौजूद हिज्बुल्लाह के नेटवर्क को पूरी तरह खत्म करना है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, सेना वही रणनीति अपना सकती है जो उसने गाजा में अपनाई थी। यानी जिन इमारतों या ठिकानों में हिज्बुल्लाह के हथियार छिपे होने या हमलों की तैयारी की जानकारी मिलेगी, उन्हें पूरी तरह नष्ट कर दिया जाएगा। इस अभियान का एक बड़ा लक्ष्य हिज्बुल्लाह को इजराइल की सीमा से दूर धकेलना भी है, ताकि उत्तरी इजराइल के शहरों और गांवों पर होने वाले रॉकेट हमलों को रोका जा सके। माना जा रहा है कि अगर ऑपरेशन शुरू होता है तो इजराइली सेना दक्षिणी लेबनान के कुछ इलाकों में लंबे समय तक तैनात भी रह सकती है।
लेबनान पर हमले की नौबत क्यों आई?
कुछ समय पहले तक इजराइल की सरकार लेबनान में बढ़ते तनाव को सीमित रखना चाहती थी। उस समय इजराइल का मुख्य फोकस ईरान के साथ बढ़ते टकराव पर था। लेकिन हालात तब बदल गए जब हिज्बुल्लाह ने ईरान के समर्थन से इजराइल पर बड़े पैमाने पर मिसाइल हमले किए। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस हमले में 200 से ज्यादा मिसाइलें दागी गईं, जबकि ईरान की ओर से भी दर्जनों मिसाइलें छोड़ी गईं। इसके बाद इजराइल ने इसे बड़ा सुरक्षा खतरा मानते हुए जवाबी सैन्य कार्रवाई तेज करने का फैसला लिया। एक इजराइली अधिकारी के मुताबिक, इस हमले से पहले लेबनान में युद्धविराम की संभावना बन रही थी, लेकिन मिसाइल हमलों के बाद अब बड़े सैन्य अभियान से पीछे हटना मुश्किल हो गया है।
इजराइल का मुख्य लक्ष्य क्या है?
इजराइल के सैन्य अभियान के पीछे कई रणनीतिक लक्ष्य बताए जा रहे हैं। इनमें सबसे अहम हैं:
- दक्षिणी लेबनान के लितानी नदी के दक्षिणी इलाके पर नियंत्रण
- हिज्बुल्लाह के सैन्य ठिकानों और हथियारों के भंडार को नष्ट करना
- इजराइल की सीमा से हिज्बुल्लाह को दूर धकेलना
- उत्तरी इजराइल में रॉकेट हमलों को रोकना
इजराइल का मानना है कि अगर हिज्बुल्लाह की सैन्य क्षमता को कमजोर नहीं किया गया तो सीमा पर खतरा लगातार बना रहेगा।
हिज्बुल्लाह की चेतावनी
दूसरी ओर हिज्बुल्लाह ने भी इजराइल को कड़ी चेतावनी दी है। हिज्बुल्लाह के नेता नईम कासिम ने कहा कि लेबनान सरकार की कूटनीतिक कोशिशें देश की संप्रभुता और नागरिकों की सुरक्षा को बचाने में सफल नहीं रहीं। इसलिए अब प्रतिरोध ही एकमात्र रास्ता बचा है। उन्होंने कहा कि अगर इजराइल जमीनी हमला करता है तो यह उसके लिए जाल साबित हो सकता है। उनके मुताबिक, नजदीकी लड़ाई में हिज्बुल्लाह के लड़ाके इजराइली सेना को भारी नुकसान पहुंचा सकते हैं।
युद्ध का मानवीय असर
इस संघर्ष का असर आम लोगों पर भी गंभीर रूप से पड़ा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अब तक करीब 8 लाख लोग अपने घर छोड़ने को मजबूर हो चुके हैं। वहीं इस युद्ध में 773 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है, जिनमें बड़ी संख्या में आम नागरिक भी शामिल हैं। दक्षिणी लेबनान के कई इलाकों में हालात बेहद खराब बताए जा रहे हैं। लगातार हो रहे हमलों के कारण लोगों को अपने घर छोड़कर सुरक्षित जगहों पर शरण लेनी पड़ रही है।
अमेरिका की भूमिका
इस पूरे घटनाक्रम में अमेरिका भी अहम भूमिका निभा रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका हिज्बुल्लाह को कमजोर करने के लिए इजराइल की सैन्य कार्रवाई का समर्थन कर रहा है। हालांकि अमेरिका ने इजराइल से यह भी कहा है कि लेबनान के सरकारी ढांचों और महत्वपूर्ण संस्थानों को निशाना बनाने से बचा जाए। अमेरिका ने खास तौर पर बेरुत-रफिक हरीरी इंटरनेशनल एयरपोर्ट को नुकसान न पहुंचाने की सलाह दी है। रिपोर्ट्स के अनुसार, इजराइल ने एयरपोर्ट को निशाना न बनाने पर सहमति जताई है, लेकिन अन्य सरकारी ढांचों को लेकर कोई स्पष्ट वादा नहीं किया है। हाल ही में इजराइल ने दक्षिणी लेबनान में एक पुल पर हमला भी किया था। इजराइल का कहना है कि इस रास्ते का इस्तेमाल हिज्बुल्लाह हथियार और सैनिकों की आवाजाही के लिए कर रहा था।
हालांकि युद्ध के बीच कूटनीतिक प्रयास भी जारी हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, लेबनान सरकार ने संकेत दिया है कि वह बिना किसी शर्त के युद्धविराम पर बातचीत के लिए तैयार है। इजराइल ने लेबनान से जुड़े मामलों को संभालने की जिम्मेदारी अपने पूर्व मंत्री रॉन डर्मर को दी है, जो अमेरिका के साथ संपर्क बनाए रखेंगे। वहीं अमेरिका की ओर से यह जिम्मेदारी मसाद बोलोस को सौंपी गई है। अमेरिकी प्रशासन की कोशिश है कि दोनों देशों के बीच बातचीत के जरिए एक बड़ा समझौता हो सके और 1948 से चले आ रहे इजराइल-लेबनान संघर्ष को खत्म करने की दिशा में कदम बढ़ाया जा सके।
कुल मिलाकर, मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच लेबनान और इजराइल के बीच टकराव एक बड़े युद्ध का रूप ले सकता है। इजराइल जहां हिज्बुल्लाह को कमजोर करने के लिए बड़ा सैन्य अभियान शुरू करने की तैयारी कर रहा है, वहीं लेबनान और हिज्बुल्लाह इसका कड़ा विरोध कर रहे हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में यह संघर्ष पूरे क्षेत्र की सुरक्षा और स्थिरता के लिए बड़ा खतरा बन सकता है।




