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UPSC की ‘फैक्ट्री’ कहलाता है यूपी का यह गांव, 75 घरों से बने 50 से ज्यादा अफसर, देशभर में बजा डंका

UPSC की ‘फैक्ट्री’ कहलाता है यूपी का यह गांव, 75 घरों से बने 50 से ज्यादा अफसर, देशभर में बजा डंका

द फ्रंट डेस्क: संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की सिविल सेवा परीक्षा को दुनिया की सबसे कठिन और प्रतिष्ठित परीक्षाओं में से एक माना जाता है। हर साल देशभर से लाखों छात्र इस परीक्षा में शामिल होते हैं, लेकिन उनमें से कुछ सौ उम्मीदवार ही अंतिम चयन सूची तक पहुंच पाते हैं। ऐसे में उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिले का माधोपट्टी गांव एक अनोखी मिसाल बनकर सामने आया है। यह गांव अक्सर “UPSC की फैक्ट्री” के नाम से जाना जाता है, क्योंकि यहां से असाधारण संख्या में आईएएस, आईपीएस और पीसीएस अधिकारी निकले हैं। बताया जाता है कि करीब चार हजार की आबादी वाले इस छोटे से गांव से अब तक 40 से अधिक अधिकारी प्रशासनिक सेवाओं में चयनित हो चुके हैं। इन अधिकारियों में कई ऐसे भी हैं जिन्होंने देश और राज्य सरकारों के महत्वपूर्ण पदों पर काम किया है।

जौनपुर शहर से कुछ ही दूरी पर है माधोपट्टी

माधोपट्टी गांव जौनपुर शहर से लगभग 7 किलोमीटर दूर स्थित है। आकार में छोटा होने के बावजूद यह गांव अपनी उपलब्धियों के कारण पूरे देश में चर्चा का विषय बना हुआ है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार इस गांव से निकले कई अधिकारी आज केंद्र और राज्य सरकारों में बड़े पदों पर कार्यरत हैं। इनमें से कुछ अधिकारी प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) और मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) में भी अपनी सेवाएं दे चुके हैं। गांव के लोगों का कहना है कि यहां प्रशासनिक सेवाओं में जाने की परंपरा कई दशकों से चली आ रही है। एक व्यक्ति की सफलता दूसरे युवाओं के लिए प्रेरणा बनती रही और धीरे-धीरे यह गांव सिविल सेवा की तैयारी के लिए एक मिसाल बन गया।

गांव की आबादी कम, लेकिन अफसरों की संख्या ज्यादा

रिपोर्ट्स के मुताबिक माधोपट्टी की आबादी करीब चार हजार के आसपास है और यहां लगभग 70-75 परिवार रहते हैं। इतने छोटे गांव से दर्जनों प्रशासनिक अधिकारियों का निकलना अपने आप में एक अनोखी उपलब्धि मानी जाती है। इस गांव की खास बात यह भी है कि यहां केवल पुरुष ही नहीं, बल्कि महिलाएं भी बड़ी संख्या में प्रशासनिक सेवाओं में चयनित हुई हैं। गांव की बेटियों और बहुओं ने भी IAS, IPS और PCS जैसी परीक्षाओं में सफलता हासिल कर गांव का नाम रोशन किया है। गांव का माहौल भी काफी प्रेरणादायक बताया जाता है। यहां के बच्चे बचपन से ही पढ़ाई को लेकर गंभीर रहते हैं और कॉलेज पहुंचते-पहुंचते कई छात्र UPSC या अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी शुरू कर देते हैं।

आजादी के बाद शुरू हुआ सफलता का सिलसिला

माधोपट्टी गांव में प्रशासनिक सेवाओं में चयन का इतिहास काफी पुराना है। यह सिलसिला देश की आजादी के कुछ साल बाद ही शुरू हो गया था। बताया जाता है कि 1952 में इंदु प्रकाश सिंह भारतीय विदेश सेवा (IFS) में चयनित हुए थे। इसके बाद 1955 में विनय कुमार सिंह IAS बने, जिन्होंने आगे चलकर बिहार राज्य के मुख्य सचिव जैसे महत्वपूर्ण पद पर भी काम किया। इन शुरुआती सफलताओं ने गांव के युवाओं को नई दिशा दी। इसके बाद से यहां के कई छात्र सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी करने लगे और धीरे-धीरे यह गांव प्रशासनिक सेवाओं के लिए प्रसिद्ध हो गया।

एक ही परिवार से कई अधिकारी

माधोपट्टी गांव की एक और खास बात यह है कि यहां एक ही परिवार के कई भाई-बहन भी सिविल सेवा परीक्षा में सफल हुए हैं। किसी ने IAS की परीक्षा पास की, तो किसी ने IPS या अन्य केंद्रीय सेवाओं में स्थान प्राप्त किया। यह परंपरा गांव में पढ़ाई और प्रतियोगी परीक्षाओं को लेकर बने मजबूत माहौल को दर्शाती है। गांव के सफल अधिकारी अक्सर अपने अनुभव और मार्गदर्शन से युवाओं को प्रेरित करते हैं, जिससे नई पीढ़ी को आगे बढ़ने का रास्ता मिलता है। माधोपट्टी गांव के युवा सिर्फ IAS या IPS ही नहीं बने, बल्कि कई लोग देश-विदेश के प्रतिष्ठित संस्थानों में भी काम कर चुके हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार इस गांव के कई लोग इसरो (ISRO), भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र (BARC) और विश्व बैंक (World Bank) जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में भी कार्यरत रहे हैं। इससे यह साफ होता है कि गांव में शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं को लेकर मजबूत माहौल रहा है।

युवाओं के लिए प्रेरणा बना माधोपट्टी

आज जौनपुर का माधोपट्टी गांव उन हजारों युवाओं के लिए प्रेरणा बन चुका है जो सिविल सेवा में जाने का सपना देखते हैं। इतने छोटे गांव से बड़ी संख्या में अधिकारियों का निकलना यह दिखाता है कि संकल्प, शिक्षा का माहौल और प्रेरणा किसी भी जगह को सफलता की मिसाल बना सकते हैं। यही कारण है कि आज माधोपट्टी को देशभर में “UPSC की फैक्ट्री” कहा जाता है। यह गांव इस बात का उदाहरण है कि अगर किसी समाज में शिक्षा और मेहनत की परंपरा बन जाए तो वहां से निकलने वाली पीढ़ियां लगातार नई ऊंचाइयों को छू सकती हैं।

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