राष्ट्रपति की अगवानी का क्या होता है प्रोटोकॉल, बंगाल विवाद के बाद क्यों छिड़ी बहस?

राष्ट्रपति की अगवानी का क्या होता है प्रोटोकॉल, बंगाल विवाद के बाद क्यों छिड़ी बहस?

द फ्रंट डेस्क : भारत में राष्ट्रपति का पद देश का सर्वोच्च संवैधानिक पद माना जाता है। ऐसे में जब राष्ट्रपति किसी राज्य के दौरे पर जाते हैं, तो उनके स्वागत और अगवानी को लेकर सख्त प्रोटोकॉल तय होते हैं। हाल ही में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के पश्चिम बंगाल दौरे के दौरान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की अनुपस्थिति को लेकर इसी प्रोटोकॉल पर बहस तेज हो गई है।
दार्जिलिंग में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान राष्ट्रपति ने कार्यक्रम स्थल बदलने और राज्य सरकार के प्रतिनिधियों की गैरमौजूदगी पर नाराजगी जताई, जिसके बाद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भी इस पूरे मामले पर अपना पक्ष रखा। इस विवाद के बाद यह सवाल उठने लगा कि किसी राज्य में राष्ट्रपति के आगमन पर किन लोगों का मौजूद रहना जरूरी होता है और क्या मुख्यमंत्री की उपस्थिति अनिवार्य होती है।

बंगाल में राष्ट्रपति के दौरे पर क्यों बढ़ा विवाद?

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू हाल ही में पश्चिम बंगाल के दार्जिलिंग क्षेत्र में एक कार्यक्रम में शामिल होने पहुंची थीं। इस दौरान उन्होंने कहा कि कार्यक्रम की लोकेशन अचानक बदल दी गई और कार्यक्रम में न तो मुख्यमंत्री मौजूद थीं और न ही राज्य सरकार का कोई मंत्री दिखाई दिया। राष्ट्रपति ने इस पर नाराजगी जताते हुए कहा कि उन्हें लगता है कि बंगाल सरकार आदिवासियों के हितों को लेकर गंभीर नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि ममता बनर्जी उनके लिए छोटी बहन जैसी हैं और वह खुद भी बंगाल की बेटी हैं। हालांकि नॉर्थ बंगाल दौरे के दौरान न तो मुख्यमंत्री और न ही कोई मंत्री उन्हें रिसीव करने आया, जिससे प्रोटोकॉल को लेकर सवाल खड़े हो गए।

राष्ट्रपति के स्वागत का क्या होता है प्रोटोकॉल?

किसी राज्य में राष्ट्रपति के पहुंचने पर उनका स्वागत केवल औपचारिक शिष्टाचार नहीं होता, बल्कि यह संवैधानिक परंपराओं और प्रोटोकॉल का हिस्सा होता है। आमतौर पर जब राष्ट्रपति किसी राज्य में पहुंचते हैं या हवाई अड्डे पर उतरते हैं, तो उनके स्वागत के लिए गणमान्य व्यक्तियों की एक तय सूची होती है। इस प्रोटोकॉल के अनुसार राज्यपाल सबसे पहले राष्ट्रपति की अगवानी के लिए मौजूद रहते हैं, क्योंकि राज्य में वे राष्ट्रपति के आधिकारिक प्रतिनिधि होते हैं। उनके बाद मुख्यमंत्री का स्थान आता है, जो राज्य की चुनी हुई सरकार और जनता का प्रतिनिधित्व करते हैं। इन दोनों की मौजूदगी राष्ट्रपति के प्रति सर्वोच्च सम्मान का प्रतीक मानी जाती है।

क्या मुख्यमंत्री का मौजूद होना अनिवार्य है?

अक्सर यह सवाल उठता है कि क्या राष्ट्रपति की अगवानी के समय मुख्यमंत्री का मौजूद होना हर स्थिति में जरूरी है। प्रोटोकॉल के लिहाज से मुख्यमंत्री की उपस्थिति को महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि वे राज्य की निर्वाचित सरकार का प्रतिनिधित्व करते हैं। हालांकि अगर किसी वजह से मुख्यमंत्री मौजूद नहीं हो सकते, जैसे स्वास्थ्य कारण या कोई अत्यंत जरूरी सरकारी कार्य, तो वे अपनी जगह किसी वरिष्ठ कैबिनेट मंत्री को प्रतिनिधि के तौर पर भेज सकते हैं। लेकिन अगर मुख्यमंत्री भी मौजूद न हों और उनकी ओर से कोई मंत्री भी प्रतिनिधित्व के लिए न पहुंचे, तो इसे अक्सर प्रोटोकॉल के उल्लंघन के रूप में देखा जाता है।

अधिकारियों और सुरक्षा तंत्र की क्या भूमिका होती है?

राष्ट्रपति के स्वागत में केवल राजनीतिक नेतृत्व ही नहीं, बल्कि प्रशासनिक और सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल होते हैं। आमतौर पर राज्य के मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक भी स्वागत पंक्ति में मौजूद रहते हैं। इन अधिकारियों की जिम्मेदारी केवल औपचारिक स्वागत तक सीमित नहीं होती, बल्कि राष्ट्रपति के पूरे दौरे के दौरान सुरक्षा, प्रशासनिक समन्वय और कार्यक्रमों की व्यवस्था सुनिश्चित करना भी उनका काम होता है। कई मामलों में स्थानीय महापौर या सैन्य क्षेत्र होने पर स्थानीय सैन्य कमांडर भी स्वागत के लिए मौजूद रहते हैं।

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