द फ्रंट डेस्क : पंजाब में आम आदमी पार्टी (AAP) के सरपंच हरपिंदर सिंह की दिनदहाड़े हत्या ने राज्य की कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस सनसनीखेज वारदात के बाद सियासी और प्रशासनिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है। मामले को गंभीरता से लेते हुए मुख्यमंत्री Bhagwant Mann ने खुद घटना की समीक्षा की और साफ संदेश दिया कि दोषियों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा। सरकार ने संकेत दिया है कि इस मामले में न केवल अपराधियों पर सख्त कार्रवाई होगी, बल्कि सुरक्षा में किसी भी स्तर पर हुई लापरवाही की भी जवाबदेही तय की जाएगी।
क्या है पूरा मामला?
प्राप्त जानकारी के अनुसार, सरपंच हरपिंदर सिंह सरहाली थाना क्षेत्र के सिद्धू फार्म में आयोजित एक विवाह समारोह में शामिल होने पहुंचे थे। समारोह के दौरान माहौल सामान्य था, तभी दो अज्ञात हमलावर वहां पहुंचे और अचानक फायरिंग शुरू कर दी। गोली लगने से हरपिंदर सिंह गंभीर रूप से घायल हो गए। मौके पर अफरा-तफरी मच गई। उन्हें तुरंत अस्पताल ले जाया गया, लेकिन रास्ते में ही उनकी मौत हो गई। घटना के दौरान मौजूद एक अन्य व्यक्ति ने हमलावरों का पीछा करने की कोशिश की, लेकिन हमलावरों ने उस पर भी गोली चला दी। उसके पैर में गोली लगी है और फिलहाल उसका अस्पताल में इलाज जारी है।

इस वारदात ने स्थानीय लोगों में दहशत फैला दी है और विपक्ष ने भी राज्य की कानून-व्यवस्था पर सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं।
DGP का सख्त कदम
घटना के बाद पंजाब के डीजीपी Gaurav Yadav ने तुरंत कार्रवाई करते हुए सुरक्षा में लापरवाही के आरोप में डीएसपी पट्टी जगबीर सिंह और सरहाली थाना प्रभारी (SHO) गुरविंदर सिंह को निलंबित कर दिया। इसके अलावा, फिरोजपुर रेंज के डीआईजी स्नेहदीप शर्मा और तरनतारन के एसएसपी सुरेंद्र लांबा को जांच की व्यक्तिगत रूप से निगरानी करने के निर्देश दिए गए हैं। डीजीपी ने स्पष्ट कहा है कि जांच में किसी भी तरह की ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी और दोषियों को जल्द से जल्द गिरफ्तार कर कानून के कटघरे में लाया जाएगा।

जांच किस दिशा में?
एसएसपी सुरेंद्र लांबा के मुताबिक, अब तक की जांच में रंगदारी या किसी संगठित गिरोह की सीधी संलिप्तता का स्पष्ट संकेत नहीं मिला है। प्रारंभिक जांच से यह मामला व्यक्तिगत रंजिश या बदले की भावना से जुड़ा हो सकता है। हालांकि पुलिस सभी संभावित एंगल से जांच कर रही है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए चार विशेष टीमें गठित की गई हैं। ये टीमें सीसीटीवी फुटेज खंगाल रही हैं, मोबाइल कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) की जांच कर रही हैं और तकनीकी साक्ष्य जुटा रही हैं। एफएसएल (फॉरेंसिक साइंस लैब) की टीम भी घटनास्थल से सबूत इकट्ठा कर रही है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि वैज्ञानिक और तकनीकी आधार पर गहन जांच की जा रही है और जल्द ही आरोपियों की पहचान कर उन्हें गिरफ्तार किया जाएगा।
कानून-व्यवस्था पर बड़ा सवाल
इस घटना ने एक बार फिर राज्य की कानून-व्यवस्था को लेकर बहस छेड़ दी है। एक निर्वाचित जनप्रतिनिधि की सार्वजनिक कार्यक्रम में हत्या होना प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती माना जा रहा है। सरकार का दावा है कि मामले की निष्पक्ष और तेज जांच होगी और दोषियों को कड़ी सजा दिलाई जाएगी। अब सबकी नजर इस बात पर है कि पुलिस कब तक आरोपियों को गिरफ्तार कर मामले का खुलासा करती है।




