“मैं गांधीवादी हूं, नेहरूवादी हूं, लेकिन राहुलवादी नहीं…” अय्यर के बयान से कांग्रेस में घमासान, पूरा मामला

“मैं गांधीवादी हूं, नेहरूवादी हूं, लेकिन राहुलवादी नहीं…” अय्यर के बयान से कांग्रेस में घमासान, पूरा मामला

कांग्रेस पार्टी एक बार फिर अपने ही नेताओं के बयानों से घिरी नजर आ रही है। वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री मणि शंकर अय्यर ने ऐसा बयान दिया है, जिसने सियासी पारा बढ़ा दिया है। अय्यर ने साफ कहा, “मैं गांधीवादी हूं, मैं नेहरूवादी हूं, मैं राजीववादी हूं, लेकिन मैं राहुलवादी नहीं हूं।” लइस एक लाइन ने कांग्रेस के भीतर की खींचतान को सार्वजनिक कर दिया है। सवाल उठ रहा है कि क्या यह सिर्फ निजी नाराज़गी है या पार्टी के भीतर गहराता असंतोष?

कैसे शुरू हुआ पूरा विवाद?

विवाद की जड़ केरल में आयोजित एक सेमिनार से जुड़ी है। तिरुवनंतपुरम में कार्यक्रम के दौरान अय्यर ने वाम मोर्चा सरकार और मुख्यमंत्री पिनरई विजयन की खुलकर तारीफ की। उन्होंने यहां तक कहा कि विजयन फिर से मुख्यमंत्री बन सकते हैं। यह बयान ऐसे समय आया है जब केरल में विधानसभा चुनाव नजदीक हैं और कांग्रेस एलडीएफ़ के खिलाफ मुख्य मुकाबले में है। ऐसे में एक वरिष्ठ कांग्रेसी नेता का विपक्षी सरकार की सराहना करना पार्टी के लिए असहज करने वाला साबित हुआ। अय्यर ने पंचायती राज को लेकर भी कांग्रेस पर सवाल उठाए और कहा कि पार्टी ने इस मुद्दे को प्राथमिकता देना छोड़ दिया है।

राहुल गांधी पर सीधा हमला

विवाद तब और गहरा गया जब अय्यर ने कहा कि राहुल गांधी “भूल गए हैं कि मैं पार्टी का सदस्य हूं।”
उन्होंने खुद को गांधी, नेहरू और राजीव गांधी की विचारधारा से जोड़ते हुए कहा कि वे ‘राहुलवादी’ नहीं हैं। राजनीतिक गलियारों में इसे मौजूदा नेतृत्व पर सीधा हमला माना जा रहा है। जानकारों का कहना है कि यह बयान कांग्रेस के अंदर नेतृत्व शैली और फैसलों को लेकर चल रहे असंतोष को उजागर करता है।

पार्टी ने क्या कहा?

कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि अय्यर पिछले कुछ वर्षों से सक्रिय रूप से पार्टी से जुड़े नहीं हैं और उनके बयान व्यक्तिगत हैं। कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने भी स्पष्ट किया कि यह पार्टी की आधिकारिक राय नहीं है। पार्टी ने इस तरह से खुद को बयान से अलग कर लिया, लेकिन विवाद यहीं नहीं थमा।

अय्यर का पलटवार और तीखी भाषा

अय्यर ने पलटवार करते हुए पवन खेड़ा को “पपेट” और “टट्टू” कहा। उन्होंने संचार टीम पर भी सवाल उठाए और संकेत दिया कि पार्टी में असहमति को दबाया जा रहा है। इतना ही नहीं, उन्होंने सांसद शशि थरूर पर भी टिप्पणी करते हुए उन्हें “करियरिस्ट” बताया। इस तीखी बयानबाज़ी ने यह साफ कर दिया कि मामला सिर्फ एक बयान तक सीमित नहीं है, बल्कि यह गहरे मतभेदों की ओर इशारा करता है।

अय्यर और कांग्रेस का पुराना रिश्ता

मणि शंकर अय्यर यूपीए सरकार में पंचायती राज मंत्री रह चुके हैं और राजीव गांधी के करीबी माने जाते थे। 2017 में विवादित टिप्पणी के बाद उन्हें पार्टी से निलंबित किया गया था, हालांकि बाद में वापसी हुई। वे लंबे समय से बेबाक बयानों के लिए जाने जाते हैं और कई बार उनके शब्दों ने पार्टी को असहज किया है।

चुनावी असर कितना?

केरल जैसे अहम राज्य में चुनाव से पहले इस तरह की बयानबाज़ी कांग्रेस के लिए मुश्किलें खड़ी कर सकती है। विपक्ष इसे कांग्रेस की “अंदरूनी कलह” के तौर पर पेश कर सकता है। हालांकि पार्टी नेतृत्व ने बयान से दूरी बनाकर नुकसान सीमित करने की कोशिश की है, लेकिन यह साफ है कि संगठन के भीतर संवाद की कमी की चर्चा अब खुलकर सामने आ गई है।

क्या संकेत देता है यह विवाद?

यह पूरा घटनाक्रम कांग्रेस के भीतर पीढ़ियों के बदलाव, विचारधारात्मक बहस और नेतृत्व शैली को लेकर चल रहे संघर्ष को उजागर करता है। अय्यर का “राहुलवादी नहीं हूं” वाला बयान सिर्फ नाराज़गी नहीं, बल्कि एक राजनीतिक संदेश भी है। अब देखना होगा कि कांग्रेस इसे अनुशासन का मामला मानती है या आत्ममंथन का अवसर। फिलहाल इतना तय है कि कांग्रेस की चुनौती सिर्फ चुनावी मैदान में नहीं, बल्कि अपने ही संगठन के भीतर भी है।

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