SSC परीक्षा में हाईटेक नकल रैकेट का पर्दाफाश, देहरादून में सेप्टिक टैंक के नीचे मिला गुप्त सर्वर रूम

SSC परीक्षा में हाईटेक नकल रैकेट का पर्दाफाश, देहरादून में सेप्टिक टैंक के नीचे मिला गुप्त सर्वर रूम

देहरादून में आयोजित एसएससी मल्टी टास्किंग भर्ती परीक्षा के दौरान एक बड़े हाईटेक नकल गिरोह का खुलासा हुआ है। उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश एसटीएफ की संयुक्त कार्रवाई में परीक्षा केंद्र के भीतर एक छिपा हुआ भूमिगत सर्वर सेटअप मिला, जिसे सेप्टिक टैंक जैसा रूप देकर छिपाया गया था। इस सेटअप में लैपटॉप, राउटर और डेडिकेटेड लीज लाइन के जरिए कथित तौर पर परीक्षा को रिमोट एक्सेस से संचालित किया जा रहा था। मामले में मुख्य आरोपी के तौर पर भास्कर चौहान का नाम सामने आया है।


सख्त कानून के बावजूद नहीं थमे नकल के प्रयास

उत्तराखंड में नकल विरोधी सख्त कानून लागू होने के बावजूद भर्ती परीक्षाओं में धांधली के मामले थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। जांच एजेंसियों का कहना है कि नकल माफिया अब पारंपरिक तरीकों से आगे बढ़कर हाईटेक तकनीकों का सहारा ले रहे हैं। राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं में भी सुनियोजित तरीके से सेंध लगाने की कोशिश की जा रही है। देहरादून में कर्मचारी चयन आयोग (SSC) की मल्टी टास्किंग भर्ती परीक्षा-2025 के दौरान जिस तरह से भूमिगत केबिन बनाकर सर्वर जैसा ढांचा तैयार किया गया, उसने परीक्षा केंद्र की सुरक्षा व्यवस्था और आयोजन एजेंसी की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।


यूपीएस रूम में 24×24 इंच का गड्ढा, अंदर छिपा नेटवर्क

संयुक्त कार्रवाई के दौरान सामने आया कि परीक्षा केंद्र के यूपीएस रूम के भीतर 24×24 इंच का गड्ढा खोदकर उसमें लैपटॉप, राउटर और डेडिकेटेड लीज लाइन फिट की गई थी। ऊपर से ढक्कन लगाकर इसे सेप्टिक टैंक जैसा रूप दे दिया गया था, ताकि किसी को शक न हो। बताया जा रहा है कि इस गुप्त सेटअप के जरिए बाहरी स्थान से परीक्षा प्रणाली को एक्सेस किया जाता था। परीक्षा कक्ष में मौजूद पर्यवेक्षक को इसकी भनक तक नहीं लगती थी और अभ्यर्थी के नाम पर रिमोट तरीके से प्रश्न हल किए जा सकते थे।


मिलीभगत का शक

इस मामले में सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि क्या परीक्षा केंद्र या आयोजन एजेंसी के किसी कर्मचारी की मिलीभगत के बिना ऐसा जटिल सेटअप संभव है? जांच एजेंसियां इस एंगल से भी पड़ताल कर रही हैं कि कहीं अंदरूनी तकनीकी या प्रशासनिक सहयोग तो नहीं मिला। पुलिस महानिरीक्षक नीलेश आनंद भरणे के मुताबिक, यह भी जांच की जा रही है कि गिरोह ने कितने अभ्यर्थियों से सौदा किया था। आशंका है कि कुछ अभ्यर्थी अन्य राज्यों से आए और उन्होंने जानबूझकर देहरादून केंद्र चुना। केंद्र के भीतर जिस स्तर का तकनीकी ढांचा मिला है, उससे संकेत मिलता है कि कई अभ्यर्थी इस नेटवर्क के संपर्क में रहे हो सकते हैं।


STF भी रह गई हैरान

प्लास्टर के नीचे लीज लाइन छिपाना, परीक्षा के दिन नेटवर्क को सक्रिय रखना और सुरक्षा जांच के दौरान उपकरणों का पकड़ में न आना ये सभी बेहद शातिर और सुनियोजित तरीके थे। एसटीएफ अधिकारियों के मुताबिक, यह सेटअप तकनीकी रूप से इतना उन्नत था कि शुरुआती जांच में टीम भी इसकी बारीकियों को देखकर हैरान रह गई।


सुरक्षा प्रोटोकॉल पर गंभीर सवाल

आमतौर पर एसएससी जैसी राष्ट्रीय परीक्षाओं में कड़ी निगरानी व्यवस्था लागू रहती है। सीसीटीवी मॉनिटरिंग, बायोमेट्रिक सत्यापन, जैमर, नेटवर्क कंट्रोल और थर्ड पार्टी ऑडिट जैसी व्यवस्थाएं अनिवार्य होती हैं। इसके बावजूद परीक्षा केंद्र के भीतर अंडरग्राउंड सर्वर रूम का संचालन होना सुरक्षा तंत्र की बड़ी चूक को दर्शाता है। यह मामला न केवल हाईटेक नकल का है, बल्कि पूरी परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता और विश्वसनीयता पर भी सवाल खड़े करता है।


क्या थी यह परीक्षा?

यह परीक्षा कर्मचारी चयन आयोग (SSC) द्वारा आयोजित मल्टी टास्किंग (नॉन-टेक्निकल) स्टाफ और हवलदार (सीबीआईसी व सीबीएन) परीक्षा-2025 थी। इसके तहत केंद्र सरकार के विभिन्न विभागों में समूह ‘ग’ के गैर-तकनीकी पदों और हवलदार के पदों पर भर्ती की जानी थी। कुल 5,464 पदों के लिए भर्ती प्रक्रिया चलाई जा रही थी, जिनमें 4,375 पद MTS और 1,089 पद हवलदार के थे। इन पदों के लिए देशभर से लाखों अभ्यर्थियों ने आवेदन किया था। परीक्षा 4 फरवरी से 15 फरवरी 2026 के बीच विभिन्न केंद्रों पर कंप्यूटर आधारित (ऑनलाइन) मोड में आयोजित की जा रही थी।


रिमोट सॉल्विंग गिरोह का मुख्य चेहरा कौन?

एसटीएफ की जांच में मुख्य आरोपी के तौर पर भास्कर चौहान का नाम सामने आया है। सूत्रों के मुताबिक, वह लंबे समय से इस तरह की गतिविधियों में शामिल था। बताया जा रहा है कि वह किसी स्थायी रोजगार में नहीं था और कथित तौर पर युवाओं के साथ मिलकर परीक्षा में गड़बड़ी कराने का नेटवर्क चला रहा था। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, वह आर्थिक दबाव में था और उस पर भारी कर्ज था। हाल ही में होटल खरीदने की बात भी सामने आई है। आरोप है कि जल्द पैसा कमाने के लिए उसने नकल माफिया के साथ हाथ मिला लिया।

फिलहाल मामले की जांच जारी है। पुलिस डिजिटल साक्ष्यों, सर्वर डेटा और नेटवर्क कनेक्शनों की फॉरेंसिक जांच कर पूरे नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने में जुटी है। जांच एजेंसियों का मानना है कि इस हाईटेक नकल रैकेट में और भी लोगों की संलिप्तता सामने आ सकती है। आने वाले दिनों में इस मामले में और खुलासे होने की संभावना है।

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