Union Budget 2026-27 ऐसा बजट है जो तात्कालिक राहत देने के बजाय आने वाले वर्षों की दिशा तय करने की कोशिश करता है। यह बजट शॉर्ट-टर्म खुशियों से ज्यादा लॉन्ग-टर्म प्लानिंग पर टिका नजर आता है। सरकार का भरोसा है कि इंफ्रास्ट्रक्चर, मैन्युफैक्चरिंग, टेक्नोलॉजी और मानव संसाधन में मजबूत निवेश के दम पर भारत की विकास यात्रा को आगे बढ़ाया जा सकेगा।
सरकार का दावा है कि अब तक लागू किए गए नीतिगत सुधारों की बदौलत देश ने 7 प्रतिशत से अधिक की आर्थिक वृद्धि हासिल की है और आने वाले वर्षों में भी स्थिरता के साथ तेज़ विकास बनाए रखा जाएगा। (फाइल फोटो)
लॉन्ग टर्म ग्रोथ पर जोर, पॉपुलर फैसलों से दूरी
वित्त मंत्री ने Union Budget 2026 पेश करते हुए यह स्पष्ट कर दिया कि सरकार की प्राथमिकता तात्कालिक लोकप्रिय घोषणाओं से ज्यादा दीर्घकालिक विकास और आर्थिक ढांचे को मजबूत करने की है। बजट को युवा शक्ति पर आधारित बताते हुए गरीबों के कल्याण, उत्पादकता बढ़ाने और सुधारों की निरंतरता पर खास फोकस किया गया है।
इसके साथ ही 16वें वित्त आयोग की रिपोर्ट भी सदन में पेश की गई, जिससे राज्यों की हिस्सेदारी और केंद्र-राज्य वित्तीय संतुलन को लेकर आगे की रूपरेखा सामने आई है।
अर्थव्यवस्था और फिस्कल हेल्थ: विकास के साथ नियंत्रण
बजट के जरिए सरकार ने यह संकेत दिया है कि तेज़ आर्थिक रफ्तार के बावजूद वित्तीय अनुशासन से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। 16वें वित्त आयोग की सिफारिशों के बाद राज्यों को करीब 1.4 लाख करोड़ रुपये मिलने का रास्ता साफ हुआ है, जिससे संघीय ढांचे को मजबूती मिलने की उम्मीद है।
सरकार के अनुमान के मुताबिक FY26 में Debt-to-GDP अनुपात 56.1 प्रतिशत रहेगा, जो FY27 में घटकर 55.6 प्रतिशत तक आ सकता है। वहीं FY26 में वित्तीय घाटा GDP का 4.4 प्रतिशत और FY27 में इसे 4.3 प्रतिशत तक सीमित रखने का लक्ष्य रखा गया है। हालांकि FY27 में सरकार लगभग 11.7 लाख करोड़ रुपये उधार लेगी, लेकिन सरकार का कहना है कि यह राशि ग्रोथ को सपोर्ट करने वाले कैपेक्स पर खर्च की जाएगी।
इंफ्रास्ट्रक्चर: विकास की रीढ़
Union Budget 2026-27 में इंफ्रास्ट्रक्चर को एक बार फिर आर्थिक विकास का सबसे मजबूत आधार बताया गया है। FY27 के लिए सरकार ने लगभग 12.2 लाख करोड़ रुपये के कैपिटल एक्सपेंडिचर का प्रस्ताव रखा है, जिससे सड़क, रेलवे, लॉजिस्टिक्स और शहरी ढांचे को नई गति मिलेगी।
इंफ्रा रिस्क गारंटी फंड के प्रस्ताव से बड़े प्रोजेक्ट्स में निजी निवेश से जुड़ा जोखिम कम होने की उम्मीद है। अगले पांच साल में 20 नए वॉटरवेज, सात हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर और नए डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर विकसित करने की योजना लॉजिस्टिक्स लागत घटाने और सप्लाई चेन को मजबूत करने की दिशा में अहम कदम मानी जा रही है।
इसके अलावा वाराणसी और पटना में शिप रिपेयर इकोसिस्टम, सी-प्लेन निर्माण के लिए इंसेंटिव और कार्बन कैप्चर योजना के लिए 20,000 करोड़ रुपये का प्रावधान सरकार के ग्रीन ट्रांजिशन एजेंडे को दर्शाता है।
मैन्युफैक्चरिंग और इंडस्ट्री: आत्मनिर्भरता की नई राह
बजट में मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को आत्मनिर्भर भारत की अगली कड़ी के रूप में पेश किया गया है। सरकार सेमीकंडक्टर मिशन के तहत ISM 2.0 लॉन्च करने जा रही है। वहीं इलेक्ट्रॉनिक्स पार्ट्स मैन्युफैक्चरिंग के लिए लगभग 40,000 करोड़ रुपये का प्रस्ताव रखा गया है।
रेयर अर्थ मैग्नेट कॉरिडोर, तीन नए केमिकल पार्क, कंटेनर मैन्युफैक्चरिंग के लिए 10,000 करोड़ रुपये और कंस्ट्रक्शन इक्विपमेंट्स के लिए नई स्कीम से इंडस्ट्रियल इकोसिस्टम को मजबूती मिलने की उम्मीद है। साथ ही 200 इंडस्ट्रियल कॉरिडोर को दोबारा सक्रिय करने की घोषणा से रोजगार और निवेश को बढ़ावा मिल सकता है।
फार्मा, बायोफार्मा और हेल्थ: भविष्य की तैयारी
सरकार ने बायोफार्मा सेक्टर को आने वाले समय की प्रमुख ग्रोथ स्टोरी बताया है। इसके लिए नई पॉलिसी और मैन्युफैक्चरिंग हब पर काम तेज करने के संकेत दिए गए हैं। अगले पांच साल में करीब 10,000 करोड़ रुपये का आवंटन बायोफार्मा मैन्युफैक्चरिंग को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने में मदद करेगा।
ग्लोबल स्टैंडर्ड ड्रग रेगुलेटर, मेडिकल टूरिज्म के लिए पांच हब, आयुर्वेद के तीन अखिल भारतीय संस्थान, रांची और तेजपुर में नेशनल मेंटल हेल्थ इंस्टीट्यूट और हर जिले में इमरजेंसी व ट्रॉमा सेंटर खोलने की घोषणाएं हेल्थ सेक्टर के विस्तार को दर्शाती हैं।
MSME, टेक्सटाइल और हैंडीक्राफ्ट: रोजगार पर फोकस
बजट में MSME और टेक्सटाइल सेक्टर को रोजगार सृजन के लिहाज से अहम माना गया है। SME ग्रोथ फंड के लिए 10,000 करोड़ रुपये और आत्मनिर्भर फंड के लिए 2,000 करोड़ रुपये का प्रावधान छोटे कारोबारियों को पूंजी तक बेहतर पहुंच दे सकता है।
TReDs प्राइसिंग बेंचमार्क, नई क्रेडिट गारंटी स्कीम, टेक्सटाइल पार्क और स्किलिंग योजनाएं मैन्युफैक्चरिंग और ग्रामीण रोजगार को मजबूती देने की दिशा में कदम हैं।
कृषि, ग्रामीण भारत और महिला उद्यमिता
किसानों की आय बढ़ाना बजट का एक प्रमुख उद्देश्य बताया गया है। इसके लिए तकनीकी सहायता, AI आधारित कृषि समाधान, फिशरीज रिज़र्वॉयर, हाई-वैल्यू फसलों को बढ़ावा और नारियल उत्पादन के लिए विशेष योजना लाई गई है।
काजू और कोको जैसी फसलों पर फोकस किसानों की आय को विविध बनाने की रणनीति का हिस्सा है। वहीं महिला उद्यमियों को सशक्त करने के लिए She-Marts के गठन की घोषणा भी बजट में की गई है।
टैक्स, मार्केट और कस्टम ड्यूटी: संतुलन की कोशिश
टैक्स मोर्चे पर बजट ने संतुलित रुख अपनाया है। इनकम टैक्स नियमों को सरल बनाने, छोटे टैक्सपेयर्स को राहत देने और विदेशी शिक्षा व मेडिकल खर्च पर TCS घटाने जैसे कदम उठाए गए हैं।
वहीं शेयर बायबैक पर कैपिटल गेन टैक्स और फ्यूचर्स-ऑप्शंस ट्रेडिंग पर STT बढ़ाकर सट्टेबाजी पर नियंत्रण की कोशिश की गई है। कस्टम ड्यूटी स्ट्रक्चर को आसान करते हुए न्यूक्लियर प्रोजेक्ट्स, क्रिटिकल मिनरल्स, ट्रेनिंग एयरक्राफ्ट पार्ट्स और 17 कैंसर दवाओं के इंपोर्ट पर ड्यूटी खत्म की गई है।
क्या होगा सस्ता, क्या पड़ेगा महंगा?
इस बजट के बाद कैंसर की दवाएं, कुछ मेडिकल उपकरण और ग्रीन एनर्जी से जुड़े उत्पाद सस्ते हो सकते हैं। वहीं फ्यूचर्स और ऑप्शंस ट्रेडिंग महंगी होगी और शेयर बायबैक पर टैक्स का बोझ बढ़ेगा।
कुल मिलाकर: राहत कम, दिशा साफ
Union Budget 2026-27 तात्कालिक राहत देने वाला बजट नहीं है, बल्कि यह आने वाले वर्षों की दिशा तय करता है। सरकार का भरोसा है कि मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर, मैन्युफैक्चरिंग, टेक्नोलॉजी और मानव पूंजी के दम पर भारत की विकास कहानी आगे बढ़ती रहेगी।




