देशभर में UGC के नए नियम 2026 को लेकर जारी बहस के बीच नगीना से सांसद और आज़ाद समाज पार्टी (कांशीराम) के प्रमुख चंद्रशेखर आज़ाद ने बड़ा कदम उठाया है। उन्होंने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को पत्र लिखकर मांग की है कि UGC के नए भेदभाव-निरोधक नियम केवल UGC से मान्यता प्राप्त संस्थानों तक सीमित न रहें, बल्कि IIT, NIT, IIIT, IIM, AIIMS, मेडिकल और इंजीनियरिंग कॉलेजों में भी समान रूप से लागू किए जाएं।
क्यों लिखा गया यह पत्र
चंद्रशेखर आज़ाद ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर शिक्षा मंत्री को भेजे गए पत्र को साझा करते हुए कहा कि UGC (उच्च शिक्षा संस्थानों में समानता के संवर्धन हेतु) विनियम, 2026 को लेकर जिस तरह का विरोध सामने आ रहा है, वह सामाजिक न्याय के मूल विचार के खिलाफ एक संगठित और भ्रामक प्रयास है।
उन्होंने कहा कि इन नियमों का उद्देश्य उच्च शिक्षा संस्थानों में जाति, वर्ग, धर्म, लिंग, जन्म स्थान या दिव्यांगता के आधार पर होने वाले भेदभाव को समाप्त करना है, खासकर अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, सामाजिक-शैक्षिक रूप से पिछड़े वर्ग और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के छात्रों के हितों की रक्षा करना।
UGC नियमों को बताया संविधान के अनुरूप
चंद्रशेखर आज़ाद ने पत्र में साफ कहा कि UGC के ये नियम भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14, 15, 16 और 21 की भावना के अनुरूप हैं। उनके मुताबिक, यह नियम उच्च शिक्षा को समानता, गरिमा और न्याय का वास्तविक माध्यम बनाने की दिशा में एक जरूरी और सकारात्मक कदम है।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि भीम आर्मी–आज़ाद समाज पार्टी (कांशीराम) इन नियमों का समर्थन करती है।
बड़ा सवाल: IIT-IIM और AIIMS क्यों बाहर?
पत्र में चंद्रशेखर आज़ाद ने एक अहम मुद्दा उठाते हुए कहा कि मौजूदा समय में यह भेदभाव-निरोधक व्यवस्था केवल UGC से मान्यता प्राप्त संस्थानों तक सीमित है।
जबकि IIT, NIT, IIIT, IIM, AIIMS, मेडिकल और इंजीनियरिंग कॉलेज जैसे कई प्रतिष्ठित केंद्रीय और स्वायत्त संस्थान UGC के अधिकार क्षेत्र में नहीं आते, जिस कारण वे इन नियमों से बाहर हैं।
उन्होंने कहा कि यह स्थिति बेहद चिंताजनक है, क्योंकि संस्थागत भेदभाव और मानसिक उत्पीड़न से जुड़ी सबसे ज्यादा शिकायतें इन्हीं संस्थानों से सामने आती रही हैं, जहां देश का भविष्य तय करने वाला प्रशासनिक, तकनीकी और नीतिगत नेतृत्व तैयार होता है।
‘बिना समान नियमों के सामाजिक न्याय अधूरा’
नगीना सांसद ने अपने पत्र में जोर देकर कहा कि जब तक सभी केंद्रीय और स्वायत्त उच्च शिक्षा संस्थानों में एक समान, कानूनी और निगरानी-समर्थ भेदभाव-निरोधक ढांचा लागू नहीं किया जाता, तब तक वंचित वर्गों के छात्रों के साथ होने वाला शोषण, अन्याय और अवसरों की असमानता खत्म नहीं हो सकती।
उनका कहना है कि केवल कुछ संस्थानों में नियम लागू करना और बाकी को बाहर रखना सामाजिक न्याय की अवधारणा को कमजोर करता है।
शिक्षा मंत्री से क्या मांग की गई
चंद्रशेखर आज़ाद ने शिक्षा मंत्री से आग्रह किया है कि—
- UGC (उच्च शिक्षा संस्थानों में समानता के संवर्धन हेतु) विनियम, 2026 को पूरी तरह प्रभावी ढंग से लागू किया जाए
- IIT, NIT, IIIT, IIM, AIIMS समेत सभी केंद्रीय और स्वायत्त संस्थानों में भी समान प्रकृति का कानून बनाया जाए
- इन संस्थानों के लिए कानूनी रूप से बाध्यकारी और निगरानी-आधारित भेदभाव-निरोधक ढांचा तुरंत तैयार किया जाए
ताकि उच्च शिक्षा व्यवस्था वास्तव में सामाजिक न्याय, समानता और संवैधानिक मूल्यों का मजबूत आधार बन सके।
अब आगे क्या होगा?
चंद्रशेखर आज़ाद की इस चिट्ठी के बाद UGC के नए नियमों को लेकर चल रही बहस और तेज़ हो गई है। सवाल यह है कि क्या केंद्र सरकार इन नियमों के दायरे को IIT, IIM, AIIMS जैसे केंद्रीय और स्वायत्त संस्थानों तक बढ़ाने पर विचार करेगी। आने वाले दिनों में शिक्षा मंत्रालय की प्रतिक्रिया और इस मुद्दे पर सरकार का रुख तय करेगा कि उच्च शिक्षा संस्थानों में समानता और भेदभाव-निरोधक व्यवस्था को लेकर आगे क्या दिशा तय होती है।



