महाराष्ट्र की राजनीति में साल 2026 एक टर्निंग पॉइंट के तौर पर दर्ज हो गया है। राज्य की 29 महानगरपालिकाओं में हुए चुनावों के नतीजों ने यह साफ कर दिया है कि शहरी महाराष्ट्र की राजनीति में अब सत्ता का संतुलन पूरी तरह बदल चुका है। इस बदलाव का सबसे बड़ा प्रतीक बनी है बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC)—वही नगर निगम, जो करीब ढाई दशक तक ठाकरे परिवार की राजनीतिक शक्ति का सबसे मजबूत किला माना जाता रहा।
करीब 25 साल बाद उद्धव ठाकरे की अविभाजित शिवसेना का गढ़ ढहता नजर आया, और पहली बार मुंबई की सत्ता की चाबी भारतीय जनता पार्टी–शिंदे शिवसेना गठबंधन (महायुति) के हाथ जाती दिख रही है। यह सिर्फ एक चुनावी जीत नहीं, बल्कि एक पूरे राजनीतिक युग के अंत का संकेत मानी जा रही है।
BMC में पहली बार BJP की निर्णायक बढ़त
मुंबई की 227 सीटों वाली BMC में बहुमत के लिए 114 सीटों की जरूरत होती है। मौजूदा रुझानों और नतीजों में तस्वीर साफ दिखाई देने लगी है।
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बीजेपी करीब 90 सीटों पर आगे/जीत दर्ज कर चुकी है
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शिवसेना (शिंदे गुट) लगभग 28 सीटों पर
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शिवसेना (यूबीटी) 63 सीटों तक सिमट गई
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कांग्रेस, एनसीपी और अन्य दल दहाई का आंकड़ा भी पार नहीं कर पाए
इन आंकड़ों के साथ यह लगभग तय माना जा रहा है कि महायुति का मेयर बनेगा। यह वही BMC है, जिस पर 1997 से ठाकरे परिवार की शिवसेना का नियंत्रण रहा और जिसे मुंबई की राजनीति का “पावर सेंटर” कहा जाता था।
29 महानगरपालिकाओं में BJP गठबंधन की सुनामी
मुंबई अकेली नहीं है। पूरे महाराष्ट्र में शहरी वोटर का रुझान लगभग एकतरफा नजर आया।
राज्य की 29 महानगरपालिकाओं में कुल 2869 वार्डों के लिए हुए चुनाव में—
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बीजेपी 1064 से ज्यादा वार्डों में आगे/जीत
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शिंदे शिवसेना 280+ वार्डों में
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कांग्रेस करीब 220 सीटों तक
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अन्य दल सीमित प्रभाव में सिमटते दिखे
यह परिणाम बताता है कि BJP गठबंधन ने सिर्फ मुंबई ही नहीं, बल्कि पुणे, नागपुर, नवी मुंबई, नासिक और अन्य बड़े शहरी केंद्रों में भी निर्णायक बढ़त बना ली है।
राज ठाकरे की MNS का सबसे खराब प्रदर्शन
इस चुनाव का सबसे चौंकाने वाला पहलू रहा महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना का प्रदर्शन।
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22 शहरों में पार्टी का खाता तक नहीं खुला
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मुंबई में सिर्फ 5 सीटों पर बढ़त
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पुणे और नासिक जैसे माने जाने वाले गढ़ों में भी पार्टी बुरी तरह पिछड़ गई
यह वही चुनाव था, जिसमें लंबे समय बाद उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे साथ आए थे। ठाकरे ब्रदर्स की यह सियासी नज़दीकी ज़मीनी स्तर पर वोट में तब्दील नहीं हो सकी और यह प्रयोग पूरी तरह फेल साबित हुआ।
ठाकरे परिवार का वर्चस्व क्यों टूटा?
राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, इसके पीछे कई बड़े कारण रहे—
पहला, शिवसेना की टूट। उद्धव ठाकरे और एकनाथ शिंदे के अलग होने से पारंपरिक शिवसेना वोट बैंक बंट गया।
दूसरा, शहरी मतदाता का फोकस अब इन्फ्रास्ट्रक्चर, गवर्नेंस और स्थिर प्रशासन पर ज्यादा दिखा।
तीसरा, BJP-शिंदे गुट का मजबूत संगठनात्मक नेटवर्क, बूथ लेवल मैनेजमेंट और आक्रामक प्रचार।
चौथा, ठाकरे परिवार के भीतर नेतृत्व को लेकर असमंजस और स्पष्ट सत्ता नैरेटिव की कमी।
और पांचवां, “मराठी मानुष” जैसे भावनात्मक मुद्दों का शहरी वोटर पर सीमित असर।
वहीं महायुति ने चुनाव को “स्थिर सरकार बनाम अस्थिर विपक्ष” के फ्रेम में पेश किया, जिसका फायदा उसे मिला।
BJP के लिए क्यों ऐतिहासिक है यह जीत
BJP के लिए यह चुनाव कई मायनों में मील का पत्थर माना जा रहा है।
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पहली बार BMC में बहुमत के बेहद करीब/बहुमत
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शहरी महाराष्ट्र में व्यापक और स्थायी पकड़
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मुंबई, पुणे, नागपुर जैसे आर्थिक केंद्रों में निर्णायक बढ़त
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2029 की राजनीति से पहले शहरी वोटबैंक पर मजबूत दावा
महाराष्ट्र महानगरपालिका चुनाव 2026 ने यह साफ कर दिया है कि शहरी राजनीति का चेहरा बदल चुका है।
जहां एक ओर BJP-शिंदे गठबंधन की जीत सत्ता परिवर्तन की कहानी लिख रही है, वहीं दूसरी ओर ठाकरे परिवार के 25 साल के वर्चस्व का अंत एक पूरे राजनीतिक अध्याय के समाप्त होने जैसा है।




