अगर ईरान में अमेरिका का दखल बढ़ा तो किसे होगा ज्यादा नुकसान? भारत या चीन?

अगर ईरान में अमेरिका का दखल बढ़ा तो किसे होगा ज्यादा नुकसान? भारत या चीन?

अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव एक बार फिर वैश्विक राजनीति के केंद्र में है। सैन्य चेतावनियों और कूटनीतिक दबाव के बीच यह सवाल अहम हो गया है कि अगर हालात बिगड़ते हैं और अमेरिका ईरान में सत्ता परिवर्तन या प्रत्यक्ष दखल की कोशिश करता है, तो इसका असर किन देशों पर सबसे ज्यादा पड़ेगा—भारत या चीन?

अमेरिका–ईरान रिश्तों की पृष्ठभूमि

1979 की इस्लामिक क्रांति के बाद से अमेरिका और ईरान के रिश्ते लगातार तनावपूर्ण रहे हैं। परमाणु कार्यक्रम, आर्थिक प्रतिबंध और पश्चिम एशिया में प्रभाव को लेकर दोनों देशों के बीच टकराव समय-समय पर तेज होता रहा है। हालिया घटनाक्रम ने इस आशंका को फिर हवा दी है कि टकराव और गहरा हो सकता है।

ईरान के भीतर आर्थिक और राजनीतिक दबाव

ईरान इस समय गंभीर आर्थिक चुनौतियों का सामना कर रहा है। मुद्रा में गिरावट, ऊंची महंगाई और लंबे समय से लागू अमेरिकी प्रतिबंधों ने हालात कठिन बना दिए हैं। इसके बावजूद सत्ता संरचना अब तक बनी हुई है, लेकिन बाहरी हस्तक्षेप की आशंका ईरान के साथ-साथ उसके साझेदार देशों के लिए भी चिंता का कारण है।

चीन का ईरान में बड़ा दांव

चीन ईरान का सबसे अहम रणनीतिक और आर्थिक साझेदार माना जाता है।
2021 में दोनों देशों के बीच 25 साल की दीर्घकालिक साझेदारी हुई थी, जिसके तहत ऊर्जा, परिवहन और बुनियादी ढांचे में बड़े निवेश की योजना है। ईरान चीन की बेल्ट एंड रोड पहल का भी एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।

इसके अलावा, प्रतिबंधों के बावजूद चीन ईरान से कच्चा तेल खरीदता रहा है, जो उसे अंतरराष्ट्रीय बाजार से सस्ते दामों पर मिलता है। इससे चीन की ऊर्जा सुरक्षा को बड़ा लाभ होता है।

सत्ता परिवर्तन की स्थिति में चीन को जोखिम

अगर ईरान में सत्ता परिवर्तन होता है और वहां अमेरिका समर्थित शासन आता है, तो चीन के लिए हालात मुश्किल हो सकते हैं।

  • सस्ते तेल की आपूर्ति बाधित हो सकती है

  • दीर्घकालिक निवेश और इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स पर असर पड़ सकता है

  • बेल्ट एंड रोड से जुड़े रणनीतिक हित कमजोर हो सकते हैं

ऐसे में सबसे बड़ा आर्थिक और रणनीतिक झटका चीन को लगने की आशंका जताई जाती है।

भारत पर असर सीमित क्यों?

भारत के ईरान के साथ संबंध मुख्य रूप से रणनीतिक और क्षेत्रीय संपर्क तक सीमित रहे हैं।
अमेरिकी प्रतिबंधों के बाद भारत पहले ही ईरान से तेल आयात काफी हद तक बंद कर चुका है। चाबहार बंदरगाह जैसे प्रोजेक्ट भारत के लिए अहम हैं, लेकिन कुल आर्थिक निर्भरता चीन की तुलना में कहीं कम है।

अगर अमेरिका और ईरान के बीच टकराव और गहराता है या ईरान में सत्ता परिवर्तन होता है, तो—

  • चीन को सबसे ज्यादा आर्थिक और रणनीतिक नुकसान हो सकता है

  • भारत पर असर पड़ेगा, लेकिन वह सीमित और संभालने योग्य रहेगा

यानी इस भू-राजनीतिक परिदृश्य में जोखिम उसी देश के लिए सबसे बड़ा है, जिसकी ईरान में हिस्सेदारी और निर्भरता सबसे ज्यादा है।

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