राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) की कार्यकारी अध्यक्ष और सांसद Supriya Sule ने स्थानीय निकाय चुनावों, पुणे नगर निगम के घोषणापत्र और गठबंधन की राजनीति पर खुलकर बात की। IANS को दिए इंटरव्यू में उन्होंने साफ कहा कि नगर निगम चुनाव धर्म नहीं, मूलभूत नागरिक सुविधाओं के मुद्दों पर लड़े जाने चाहिए।
‘नगर निगम चुनाव विकास के लिए होते हैं’
सुले ने कहा कि पानी, सफाई, वार्ड स्तर की समस्याएं—यही असली एजेंडा होना चाहिए। गठबंधनों के मौजूदा चलन पर उन्होंने नाराजगी जताते हुए कहा कि इससे लोकतंत्र कमजोर होता है।
BJP पर ‘तोड़-जोड़’ का आरोप
उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी में अब मेरिट का महत्व घटा है और टिकट वितरण में पुराने कार्यकर्ताओं की अनदेखी हो रही है। सुले के मुताबिक पार्टी में बड़ी संख्या में अन्य दलों से आए नेता निर्णय प्रक्रिया का हिस्सा हैं, जिससे वोटों का ट्रांसफर होता है, नए वोट नहीं जुड़ते।
महिलाओं पर फोकस: वादों से आगे काम जरूरी
महिला-केंद्रित योजनाओं पर बोलते हुए सुले ने कहा कि वादे पूरे होने चाहिए। उन्होंने पानी, सफाई, शिक्षा, आर्थिक मदद, ब्याज-मुक्त लोन और स्किल ट्रेनिंग को महिलाओं की प्राथमिक जरूरत बताया और कहा कि इससे आत्मनिर्भरता बढ़ेगी।
एनसीपी मर्जर पर फिलहाल विराम
एनसीपी के दोनों गुटों के मर्जर की अटकलों पर उन्होंने कहा कि मौजूदा गठबंधन पुणे नगर निगम चुनाव तक सीमित है; आगे का फैसला बाद में होगा।
ठाकरे बंधु साथ आए तो असर तय
शिवसेना (यूबीटी) और एमएनएस के संभावित साथ आने पर सुले ने कहा कि Uddhav Thackeray और Raj Thackeray—दोनों का मुंबई से भावनात्मक और ऐतिहासिक जुड़ाव है। मराठी भाषा और महाराष्ट्र के इतिहास पर उनकी आवाज का चुनावी असर जरूर दिखेगा।
कानून-व्यवस्था और विकास
उन्होंने कहा कि अपराध पर जीरो टॉलरेंस जरूरी है और पुणे में बढ़ते अपराध पर राज्य सरकार की जिम्मेदारी तय होती है। साथ ही, यह भी जोड़ा कि हर सरकार कुछ अच्छा काम करती है—विकास को नकारना सही नहीं।
पश्चिम बंगाल घटनाक्रम पर टिप्पणी
आई-पैक से जुड़े मामले पर सुले ने कहा कि जांच के तरीके लोकतंत्र के अनुरूप होने चाहिए और दस्तावेजों को लेकर की गई कार्रवाई गलत थी।
कुल मिलाकर, सुप्रिया सुले का संदेश साफ है—स्थानीय चुनावों में विकास, सुविधाएं और सुशासन ही केंद्र में रहें, और गठबंधन की राजनीति का असर जमीन पर कैसे पड़ता है, यह नतीजों में दिखेगा।




