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दुनिया के 10 सबसे ताकतवर देश कौन? भारत क्यों टॉप-10 से बाहर

दुनिया के 10 सबसे ताकतवर देश कौन? भारत क्यों टॉप-10 से बाहर

World Population Review ने साल 2026 के लिए दुनिया के सबसे ताकतवर देशों की सूची जारी की है। इस रैंकिंग में एक बार फिर अमेरिका पहले स्थान पर रहा है, जबकि रूस और चीन क्रमशः दूसरे और तीसरे नंबर पर हैं।

टॉप-10 से बाहर भारत, 12वें स्थान पर

इस सूची में सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था भारत टॉप-10 में जगह नहीं बना सका। रिपोर्ट के मुताबिक भारत को 12वां स्थान दिया गया है।
भारत न सिर्फ सबसे ज्यादा आबादी वाला देश है, बल्कि सैन्य ताकत के मामले में भी वह दुनिया के शीर्ष देशों में गिना जाता है, इसके बावजूद उसकी रैंकिंग टॉप-10 से बाहर रही।

किन मानकों पर तय होती है रैंकिंग?

रिपोर्ट के अनुसार, रैंकिंग तय करने के लिए केवल आर्थिक ताकत को आधार नहीं बनाया गया। इसके लिए कई वैश्विक मानकों को शामिल किया गया, जिनमें—

  • आर्थिक क्षमता

  • सैन्य संसाधन

  • तकनीकी विकास

  • जनसांख्यिकीय मजबूती

  • शासन और राजनीतिक स्थिरता

  • अंतरराष्ट्रीय संस्थानों में प्रभावी भागीदारी

इन सभी पहलुओं में लगातार बेहतर प्रदर्शन करने वाले देशों को ऊंची रैंक दी गई है।

क्यों पीछे रह गया भारत?

रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत की आर्थिक और सैन्य ताकत मजबूत है, लेकिन वैश्विक राजनीतिक प्रभाव, कूटनीतिक पहुंच और अंतरराष्ट्रीय गठबंधनों के मामले में उसका स्कोर टॉप-10 देशों की तुलना में कम रहा। इसी वजह से भारत इस बार शीर्ष-10 में जगह नहीं बना पाया।

टॉप-10 सबसे ताकतवर देश (2026):
अमेरिका, चीन, रूस, यूनाइटेड किंगडम, जर्मनी, दक्षिण कोरिया, फ्रांस, जापान, सऊदी अरब और इजराइल।

रैंकिंग तैयार करना क्यों है चुनौतीपूर्ण?

रिपोर्ट में कहा गया है कि किसी देश की ताकत सिर्फ सेना या अर्थव्यवस्था से नहीं मापी जा सकती। राजनीतिक प्रभाव, विदेश नीति, वैश्विक छवि और सांस्कृतिक असर भी किसी देश की शक्ति को तय करने में अहम भूमिका निभाते हैं। यही वजह है कि दुनिया के सबसे ताकतवर देशों की सूची तैयार करना एक जटिल प्रक्रिया है।

सर्वे के आधार पर होती है रैंकिंग

इस रैंकिंग को U.S. News & World Report, BAV Group और University of Pennsylvania के Wharton School के साथ मिलकर किए गए वैश्विक सर्वे के आधार पर तैयार किया गया है, जिसमें दुनियाभर के लोगों की राय ली जाती है।

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