पश्चिम बंगाल में प्रवर्तन निदेशालय (ED) की छापेमारी के बाद सियासी और कानूनी टकराव तेज हो गया है। तृणमूल कांग्रेस के आईटी सेल प्रमुख से जुड़े ठिकानों पर ईडी की कार्रवाई के बाद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने ईडी अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई और कोलकाता में विरोध मार्च का नेतृत्व किया। इसके बाद सबसे बड़ा सवाल यह उठने लगा है कि क्या बंगाल पुलिस वास्तव में ईडी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई कर सकती है?
क्या बंगाल पुलिस ईडी अधिकारियों पर केस दर्ज कर सकती है?
कानूनी तौर पर राज्य पुलिस को यह अधिकार है कि वह किसी भी केंद्रीय एजेंसी के अधिकारी के खिलाफ एफआईआर दर्ज करे, बशर्ते आरोप भ्रष्टाचार, रिश्वतखोरी, अधिकारों के दुरुपयोग या आधिकारिक ड्यूटी से बाहर किए गए आपराधिक कृत्य से जुड़े हों। ऐसे मामलों में राज्य पुलिस या अन्य जांच एजेंसियां प्रारंभिक जांच कर सकती हैं।
ईडी अधिकारियों को किस हद तक कानूनी सुरक्षा है?
ईडी अधिकारियों को भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 197 के तहत संरक्षण प्राप्त है। इस प्रावधान के अनुसार, यदि किसी सरकारी अधिकारी के खिलाफ उसकी आधिकारिक ड्यूटी के दौरान किए गए कार्यों को लेकर मुकदमा चलाना हो, तो इसके लिए केंद्र सरकार की पूर्व अनुमति जरूरी होती है।
हालांकि, यह सुरक्षा पूर्ण नहीं है। यदि आरोप यह साबित करते हैं कि कथित कृत्य आधिकारिक दायरे से बाहर है—जैसे जबरन वसूली, निजी दुर्व्यवहार या कानून का उल्लंघन—तो यह संरक्षण लागू नहीं होता।
FIR के बाद आगे की कार्रवाई कैसे होगी?
बंगाल पुलिस द्वारा एफआईआर दर्ज किया जाना कानूनी प्रक्रिया की शुरुआत है, लेकिन किसी भी गिरफ्तारी या अभियोजन से पहले अदालत की भूमिका अहम होगी। यदि मामला आधिकारिक ड्यूटी से जुड़ा माना जाता है, तो केंद्र सरकार की अनुमति अनिवार्य होगी। वहीं, अगर अदालत यह पाती है कि आरोप ड्यूटी से बाहर के हैं, तो कार्रवाई आगे बढ़ सकती है।
अदालतों ने ईडी की शक्तियों पर क्या कहा है?
बीते कुछ वर्षों में ईडी की कार्यप्रणाली पर न्यायिक निगरानी बढ़ी है। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि ईडी मनमाने ढंग से गिरफ्तारियां नहीं कर सकती और हर कार्रवाई के लिए ठोस सबूत दिखाना अनिवार्य है।
इसके अलावा, मद्रास हाई कोर्ट ने 2025 में कहा था कि ईडी कोई “सुपर कॉप” नहीं है और वह तभी कार्रवाई कर सकती है जब किसी अन्य एजेंसी द्वारा पहले से अपराध दर्ज किया गया हो।
ममता बनर्जी द्वारा ईडी अधिकारियों के खिलाफ दर्ज कराई गई एफआईआर ने केंद्र और राज्य सरकार के बीच टकराव को कानूनी मोर्चे पर ला दिया है। भले ही बंगाल पुलिस के पास कार्रवाई का अधिकार हो, लेकिन अंतिम निर्णय अदालत और केंद्र सरकार की अनुमति पर निर्भर करेगा। यह मामला आने वाले दिनों में संघीय ढांचे और केंद्रीय एजेंसियों की शक्तियों को लेकर बड़ी बहस का रूप ले सकता है।




