JNU नारेबाजी विवाद: ‘मोदी–शाह की कब्र…’ से मचा बवाल, BJP का पलटवार,जानिए पूरी कहानी

JNU नारेबाजी विवाद: ‘मोदी–शाह की कब्र…’ से मचा बवाल, BJP का पलटवार,जानिए पूरी कहानी

दिल्ली की Jawaharlal Nehru University (JNU) एक बार फिर सियासी तूफान के केंद्र में है। 5 जनवरी 2026 की रात साबरमती हॉस्टल के बाहर हुए एक विरोध प्रदर्शन के दौरान आपत्तिजनक नारे लगाए जाने के आरोपों ने देशभर में विवाद खड़ा कर दिया। सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो में “मोदी–शाह की कब्र खुदेगी” जैसे नारे सुनाई देने का दावा किया गया है। इसके बाद Bharatiya Janata Party (BJP) ने तीखा पलटवार करते हुए इसे “भारत-विरोधी सोच” करार दिया।

कैसे शुरू हुआ पूरा विवाद?

इस प्रदर्शन के पीछे दो बड़े कारण बताए जा रहे हैं—

(1) 5 जनवरी 2020 की JNU हिंसा की बरसी
5 जनवरी 2026 को JNU कैंपस में 2020 में हुई हिंसा को छह साल पूरे हुए। उस समय नकाबपोश हमलावरों द्वारा छात्रों और शिक्षकों पर हमले की घटना सामने आई थी।

  • JNUTA (शिक्षक संघ) ने इस दिन को “क्रूर हमले” की याद के तौर पर मनाया और कहा कि हमलावर आज भी पकड़े नहीं गए।

  • JNUSU (छात्रसंघ) और वामपंथी संगठनों ने 2020 की हिंसा के विरोध में ‘गुरिल्ला ढाबा’ जैसे प्रतीकात्मक कार्यक्रम आयोजित किए।

(2) उमर खालिद–शरजील इमाम की जमानत याचिका खारिज
इसी दिन Supreme Court of India ने 2020 के दिल्ली दंगा साजिश मामले में पूर्व JNU छात्रों Umar Khalid और Sharjeel Imam की जमानत याचिकाएं खारिज कर दीं। छात्र संगठनों ने इस फैसले के विरोध में और दोनों की रिहाई की मांग को लेकर प्रदर्शन किया। इसी दौरान नारेबाजी का वीडियो सामने आया।

क्या लगे नारे और क्यों भड़का मामला?

वायरल वीडियो के आधार पर आरोप है कि प्रदर्शन के दौरान प्रधानमंत्री Narendra Modi, गृह मंत्री Amit Shah और उद्योगपति गौतम अडानी के खिलाफ आपत्तिजनक नारे लगाए गए। BJP का कहना है कि यह लोकतांत्रिक विरोध नहीं, बल्कि हिंसा और नफरत को बढ़ावा देने वाला कृत्य है।

BJP का तीखा पलटवार

BJP प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने वीडियो साझा करते हुए आरोप लगाया कि उमर खालिद और शरजील इमाम के समर्थन में JNU में जो हुआ, वह विरोध नहीं बल्कि भारत-विरोधी सोच का प्रदर्शन है।
दिल्ली सरकार में मंत्री Kapil Mishra ने भी सोशल मीडिया पर कड़ा बयान देते हुए कहा कि “सांपों के फन कुचले जा रहे हैं, सपोले बिलबिला रहे हैं,” और कानून अपना काम कर रहा है।

पुलिस और प्रशासन का रुख

खबर लिखे जाने तक दिल्ली पुलिस के पास नारेबाजी को लेकर औपचारिक शिकायत दर्ज नहीं हुई थी, हालांकि वीडियो सामने आने के बाद स्वतः संज्ञान की संभावना जताई गई।
वहीं, JNU प्रशासन पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि आपत्तिजनक और भड़काऊ नारे आचार संहिता का उल्लंघन हैं और जरूरत पड़ने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।

लेफ्ट और छात्रसंघ का पक्ष

छात्रसंघ और वामपंथी संगठनों का कहना है कि—

  • प्रदर्शन 2020 की हिंसा की याद और न्यायिक फैसलों के विरोध में था।

  • लगाए गए नारे वैचारिक थे; किसी व्यक्ति को शारीरिक नुकसान पहुंचाने की मंशा नहीं थी।

  • पूरे मामले को जानबूझकर राजनीतिक रंग दिया जा रहा है।

एक और विवाद: लाइब्रेरी सर्विलांस

इसी बीच कैंपस में Facial Recognition सिस्टम और मैग्नेटिक गेट लगाने को लेकर भी विरोध चल रहा है। इस मुद्दे पर दिल्ली पुलिस ने JNUSU के कुछ पदाधिकारियों को नोटिस भेजे थे। छात्रों का आरोप है कि यह निगरानी और दमन की कोशिश है।

अब तक का निचोड़

  • 5 जनवरी 2020 की हिंसा की बरसी और सुप्रीम कोर्ट का फैसला—प्रदर्शन की पृष्ठभूमि

  • नारेबाजी के वीडियो से विवाद तेज

  • BJP का तीखा हमला, लेफ्ट का बचाव

  • पुलिस और प्रशासन अलर्ट मोड में

कुल मिलाकर, JNU एक बार फिर छात्र राजनीति, न्यायपालिका के फैसलों और सत्तारूढ़ दल के तीखे बयानों के टकराव का केंद्र बन गया है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि प्रशासन और पुलिस इस मामले में क्या कदम उठाते हैं और विवाद किस दिशा में जाता है।

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