दूषित पानी से मौत का मामला: हाईकोर्ट में सरकार की स्टेटस रिपोर्ट, चार मौतों का दावा, जानिए अब तक क्या हुआ

मध्य प्रदेश के इंदौर में दूषित पानी पीने से हुई मौतों के मामले ने सियासी और प्रशासनिक हलकों में हलचल मचा दी है। इस गंभीर मामले में राज्य सरकार ने शुक्रवार को हाईकोर्ट में अपनी स्टेटस रिपोर्ट पेश की, जिसमें अब तक सिर्फ चार मौतों की पुष्टि की गई है। जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए रिपोर्ट का अवलोकन किया और अगली सुनवाई की तारीख 6 जनवरी तय की है।

अब तक क्या-क्या हुआ?

इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में कुछ दिन पहले दूषित पेयजल सप्लाई के कारण उल्टी-दस्त का प्रकोप फैल गया। बड़ी संख्या में लोग बीमार पड़े, कई को अस्पताल में भर्ती कराया गया और कुछ मरीजों की हालत गंभीर बनी हुई है।
स्वास्थ्य विभाग की शुरुआती जांच में सामने आया कि पाइपलाइन में लीकेज के कारण पीने के पानी में गंदगी और सीवर का पानी मिल गया था।

सरकार की ओर से हाईकोर्ट में दी गई स्टेटस रिपोर्ट में कहा गया कि इस घटना में अब तक चार लोगों की मौत हुई है। हालांकि स्थानीय लोगों, सामाजिक संगठनों और कुछ जनप्रतिनिधियों का दावा है कि मौतों की संख्या इससे कहीं अधिक, 8 से 15 के बीच हो सकती है।

बार एसोसिएशन और स्थानीय दावे

बार एसोसिएशन के अध्यक्ष रितेश ईनाणी ने कोर्ट को बताया कि इलाके में कई मरीज अब भी गंभीर हालत में अस्पतालों में भर्ती हैं। उन्होंने यह भी कहा कि स्टेटस रिपोर्ट में मुआवजे की स्थिति और सभी मौतों का स्पष्ट विवरण नहीं दिया गया है, जिस पर अगली सुनवाई में विस्तार से बहस होगी।

मेयर और स्वास्थ्य विभाग का पक्ष

इंदौर के मेयर पुष्यमित्र भार्गव ने कहा कि स्वास्थ्य विभाग के रिकॉर्ड में चार मौतों की पुष्टि है, लेकिन उन्हें निजी तौर पर करीब 10 मौतों की जानकारी मिली है। वहीं, स्थानीय लोगों का दावा है कि इस प्रकोप में एक 6 महीने के बच्चे समेत 14 लोगों की मौत हुई है, हालांकि स्वास्थ्य विभाग ने इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।

मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) ने बताया कि प्रयोगशाला जांच में यह साफ हो चुका है कि पाइपलाइन लीकेज के चलते पानी दूषित हुआ, जिससे बीमारी फैली।

राहुल गांधी ने क्या कहा?

इस मामले को लेकर कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने मध्य प्रदेश सरकार और केंद्र पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा“मध्य प्रदेश अब कुप्रशासन का केंद्र बन चुका है। कहीं खांसी की सिरप से मौतें, कहीं सरकारी अस्पताल में बच्चों की जान लेने वाले चूहे और अब सीवर मिला पानी पीकर मौतें। जब-जब गरीब मरते हैं, मोदी जी हमेशा की तरह खामोश रहते हैं।”

राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि सरकार की प्राथमिकता में आम जनता की जान नहीं है और हर बार ऐसे मामलों को दबाने की कोशिश की जाती है।

अन्य नेताओं की प्रतिक्रियाएं

  • कांग्रेस नेताओं ने राज्य सरकार पर मौतों के आंकड़े छिपाने और प्रशासनिक लापरवाही का आरोप लगाया।

  • सत्तारूढ़ दल के नेताओं का कहना है कि सरकार पूरी गंभीरता से मामले की जांच कर रही है, दोषियों पर कार्रवाई होगी और प्रभावित परिवारों को मदद दी जाएगी।

  • स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने सुरक्षित पेयजल व्यवस्था सुनिश्चित करने और जिम्मेदार अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है।

आगे क्या?

हाईकोर्ट ने साफ संकेत दिए हैं कि मामले को हल्के में नहीं लिया जाएगा। अब 6 जनवरी की सुनवाई में सरकार को मौतों के आंकड़े, इलाज की स्थिति, मुआवजा और भविष्य में ऐसी घटनाएं रोकने के लिए उठाए गए कदमों पर विस्तृत जवाब देना होगा।

कुल मिलाकर, इंदौर का यह मामला अब सिर्फ स्वास्थ्य संकट नहीं, बल्कि प्रशासनिक जवाबदेही और राजनीतिक बहस का बड़ा मुद्दा बन चुका है।

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