नए साल 2026 की शुरुआत के साथ ही आम लोगों की रोजमर्रा की ज़िंदगी से जुड़े कई अहम नियमों में बदलाव लागू हो गए हैं। इन बदलावों का सीधा असर घरेलू बजट और खर्चों पर पड़ने वाला है। एलपीजी और पीएनजी गैस की कीमतों से लेकर कारों के दाम, बैंकिंग और डिजिटल पेमेंट नियम, यूपीआई, सिम वेरिफिकेशन, सरकारी योजनाएं और वेतन आयोग—कई ऐसे फैसले किए गए हैं जो नए साल को आर्थिक रूप से अहम बनाते हैं। जहां कुछ बदलाव राहत देने वाले हैं, वहीं कई फैसले खर्च बढ़ाने वाले साबित हो सकते हैं।
कॉमर्शियल एलपीजी सिलेंडर हुआ महंगा
1 जनवरी 2026 से 19 किलो वाले कॉमर्शियल एलपीजी गैस सिलेंडर की कीमतों में बढ़ोतरी कर दी गई है। सिलेंडर के दाम में अधिकतम 111 रुपये तक का इजाफा हुआ है।
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दिल्ली में इसकी कीमत 1580.50 रुपये से बढ़कर 1691.50 रुपये हो गई है।
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कोलकाता में दाम 1684 रुपये से बढ़कर 1795 रुपये पहुंच गए हैं।
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चेन्नई में यह सिलेंडर अब 1849.50 रुपये का हो गया है, जो पहले 1739.50 रुपये था।
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मुंबई में कीमत 1531.50 रुपये से बढ़कर 1642.50 रुपये कर दी गई है।
इस बढ़ोतरी का सीधा असर होटल, रेस्टोरेंट, ढाबों और छोटे व्यापारियों पर पड़ने की संभावना है। लागत बढ़ने से खाने-पीने की चीजों के दाम भी आगे चलकर बढ़ सकते हैं।
घरेलू उपभोक्ताओं को राहत, पीएनजी हुई सस्ती
नए साल पर घरेलू उपभोक्ताओं को राहत देते हुए पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG) की कीमतों में कटौती की गई है। इंद्रप्रस्थ गैस लिमिटेड ने पीएनजी की कीमत प्रति स्टैंडर्ड क्यूबिक मीटर 70 पैसे घटाने का ऐलान किया है।
इसके बाद दिल्ली में पीएनजी की नई कीमत 47.89 रुपये प्रति एससीएम तय की गई है।
इस फैसले से खासतौर पर शहरी इलाकों में रहने वाले उन परिवारों को फायदा मिलेगा, जो खाना पकाने के लिए पीएनजी का इस्तेमाल करते हैं। महंगाई के दौर में यह कटौती घरेलू बजट के लिए राहत मानी जा रही है।
कार खरीदना हुआ और महंगा
नए साल के साथ ही कार खरीदने वालों को भी झटका लगा है। 1 जनवरी 2026 से कई ऑटोमोबाइल कंपनियों ने अपने वाहनों की कीमतें बढ़ा दी हैं।
बीएमडब्ल्यू, रेनॉल्ट और निसान ने अपनी गाड़ियों के दाम 3,000 रुपये से लेकर तीन प्रतिशत तक बढ़ाने की घोषणा की है। इसके अलावा होंडा और टाटा मोटर्स ने भी संकेत दिए हैं कि 2026 मॉडल की कारें पहले के मुकाबले महंगी हो सकती हैं। ऐसे में अब नई कार खरीदने के लिए ग्राहकों को ज्यादा रकम चुकानी पड़ेगी।
बैंकिंग, एफडी, यूपीआई और सिम नियमों में बदलाव
बैंकिंग और डिजिटल पेमेंट से जुड़े नियमों में भी 1 जनवरी 2026 से बदलाव लागू हो गए हैं। ऑनलाइन फ्रॉड पर रोक लगाने के लिए यूपीआई और अन्य डिजिटल लेनदेन के नियमों को पहले से ज्यादा सख्त किया गया है।
इसके साथ ही सिम कार्ड वेरिफिकेशन की प्रक्रिया को भी और कड़ा कर दिया गया है, ताकि फर्जी और गलत इस्तेमाल पर नियंत्रण लगाया जा सके।
हालांकि, राहत की बात यह है कि एचडीएफसी बैंक, एसबीआई और पीएनबी समेत कई बैंकों ने नए साल से लोन की ब्याज दरों में कटौती की घोषणा की है, जिससे कर्ज लेने वालों को फायदा मिल सकता है।
पीएम किसान सम्मान निधि योजना में अहम बदलाव
पीएम किसान सम्मान निधि योजना के तहत भी कुछ महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं। उत्तर प्रदेश जैसे कई राज्यों में अब योजना का लाभ लेने के लिए यूनिक किसान आईडी अनिवार्य कर दी गई है।
इसके अलावा, यदि जंगली जानवरों के कारण फसलों को नुकसान होता है और उसकी जानकारी 72 घंटे के भीतर दी जाती है, तो अब उस नुकसान की भरपाई भी योजना के तहत की जा सकेगी।
आठवां वेतन आयोग लागू, लेकिन इंतजार अभी बाकी
केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनधारियों के लिए भी नया साल अहम साबित हुआ है। सातवें वेतन आयोग का कार्यकाल 31 दिसंबर 2025 को समाप्त हो गया था, जिसके बाद 1 जनवरी 2026 से आठवां वेतन आयोग औपचारिक रूप से लागू हो चुका है।
लंबे समय से इसका इंतजार किया जा रहा था, क्योंकि इससे वेतन और पेंशन में बढ़ोतरी की उम्मीद जुड़ी हुई है।
हालांकि विशेषज्ञों के मुताबिक, फिलहाल इसका असर केवल कागजी प्रक्रिया तक सीमित रहेगा। नई वेतन संरचना, फिटमेंट फैक्टर और भत्तों को लेकर सरकार की अंतिम अधिसूचना जारी होने के बाद ही कर्मचारियों और पेंशनधारियों को वास्तविक रूप से बढ़ी हुई सैलरी और एरियर का लाभ मिल पाएगा।
कुल मिलाकर, 1 जनवरी 2026 से लागू हुए ये बदलाव कुछ मामलों में राहत देने वाले हैं, लेकिन कई फैसले ऐसे भी हैं जो आम आदमी के खर्च को बढ़ा सकते हैं। ऐसे में नए साल की शुरुआत के साथ इन नियमों को समझना और उसी के अनुसार अपनी वित्तीय योजना बनाना बेहद जरूरी हो गया है।




