पुरस्कारों में गड़बड़ी नहीं, फिर IAS टीना डाबी और रिया डाबी को क्यों देनी पड़ी सफाई? जानिए पूरा मामला विस्तार से

पुरस्कारों में गड़बड़ी नहीं, फिर IAS टीना डाबी और रिया डाबी को क्यों देनी पड़ी सफाई? जानिए पूरा मामला विस्तार से

जल संचयन, जन भागीदारी (JSJB) अभियान से जुड़े राष्ट्रीय पुरस्कारों को लेकर सोशल मीडिया पर फैले विवाद के बीच अब केंद्र सरकार और जल शक्ति मंत्रालय ने स्थिति स्पष्ट कर दी है। सरकार ने साफ कहा है कि बाड़मेर और उदयपुर को मिले पुरस्कारों में किसी तरह की कोई गड़बड़ी नहीं हुई है। हालांकि भ्रामक तस्वीरों और गलत दावों के कारण विवाद खड़ा हुआ, जिसके चलते दोनों जिलों की वरिष्ठ अधिकारियों IAS टीना डाबी और उनकी बहन IAS रिया डाबी को सफाई देनी पड़ी।

मामला कहां से शुरू हुआ?

18 नवंबर 2025 को राष्ट्रपति द्वारा जल संचयन, जन भागीदारी (JSJB 1.0) अभियान के तहत उत्कृष्ट कार्य करने वाले जिलों को सम्मानित किया गया था।
बाड़मेर जिले को 2 करोड़ रुपये और उदयपुर जिले को 1 करोड़ रुपये का पुरस्कार दिया गया।

बाड़मेर में उस समय कलेक्टर के तौर पर टीना डाबी तैनात थीं, जबकि उदयपुर जिला परिषद की मुख्य कार्यकारी अधिकारी उनकी बहन रिया डाबी थीं। इसी वजह से सोशल मीडिया पर आरोप लगाए गए कि दोनों बहनों के जिलों को पुरस्कार दिलाने में फर्जी तस्वीरों का इस्तेमाल किया गया।

सोशल मीडिया पर क्या आरोप लगे?

सोशल मीडिया पर दावा किया गया कि उदयपुर में जल संरक्षण के नाम पर शादी का निमंत्रण पत्र पोर्टल पर अपलोड कर दिया गया। वहीं बाड़मेर में जल संरचनाओं की डुप्लीकेट तस्वीरें अपलोड की गईं।
मध्य प्रदेश के खंडवा जिले को लेकर भी आरोप लगे कि AI से जनरेट की गई तस्वीरों के आधार पर पुरस्कार हासिल किया गया।

इन आरोपों के आधार पर यह कहा गया कि राष्ट्रपति से पुरस्कार लेने में धांधली की गई।

केंद्र सरकार और जल शक्ति मंत्रालय का बयान

जल शक्ति मंत्रालय ने इन आरोपों को भ्रामक और तथ्यहीन बताया है। मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि जिन तस्वीरों को लेकर विवाद हुआ, वे जल संचयन, जन भागीदारी (JSJB) अभियान से संबंधित नहीं हैं।
ये तस्वीरें जल शक्ति अभियान – कैच द रेन (JSA-CTR) नाम के एक अलग पोर्टल से जुड़ी हैं।

मंत्रालय ने कहा कि दोनों अभियानों का डैशबोर्ड, सत्यापन प्रक्रिया और पुरस्कार प्रणाली पूरी तरह अलग है। जिन फोटो को लेकर हंगामा हुआ, उनका राष्ट्रपति द्वारा दिए गए पुरस्कारों से कोई संबंध नहीं है।

सरकार का सख्त रुख

केंद्र सरकार ने माना कि JSA-CTR पोर्टल पर कुछ जगहों पर लापरवाही हुई है। इसके बाद सभी जिला कलेक्टरों को ईमेल भेजकर निर्देश दिए गए कि दोषी अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए और सोशल मीडिया पर फैल रही गलत जानकारी का तथ्यों के साथ खंडन किया जाए।

पोर्टल पर डेटा अपलोडिंग अस्थायी रूप से रोक दी गई है और जिलों को गलत तस्वीरें हटाने या संशोधित करने का अधिकार दिया गया है। सूत्रों के अनुसार प्रधानमंत्री कार्यालय ने भी इस पूरे मामले का संज्ञान लिया है।

IAS टीना डाबी की सफाई

बाड़मेर की कलेक्टर टीना डाबी ने केंद्र सरकार को भेजे पत्र में साफ किया कि JSA-CTR पोर्टल पर कई बार प्रतीकात्मक या सैंपल तस्वीरें अपलोड की जाती हैं। कुछ तहसीलों में गलती से एक ही फोटो एक से अधिक बार अपलोड हो गई।

उन्होंने कहा कि यह प्रशासनिक चूक है, न कि पुरस्कार से जुड़ी कोई साजिश। संबंधित कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है और इन तस्वीरों का JSJB पुरस्कार से कोई लेना-देना नहीं है।

उदयपुर मामले में रिया डाबी की सफाई

उदयपुर में शादी का कार्ड अपलोड होने के मामले पर भी स्थिति स्पष्ट की गई।
उदयपुर कलेक्टर ने बताया कि यह फोटो ग्राम पंचायत के एक कनिष्ठ सहायक द्वारा गलती से अपलोड की गई थी। यह मामला भी JSA-CTR पोर्टल से जुड़ा है, न कि JSJB पुरस्कार से।

संबंधित कर्मचारी को निलंबित कर दिया गया है। जिला परिषद की मुख्य कार्यकारी अधिकारी रिया डाबी ने भी अपने पत्र में साफ किया कि इस फोटो का उदयपुर को मिले एक करोड़ रुपये के पुरस्कार से कोई संबंध नहीं है।

बाड़मेर और उदयपुर को पुरस्कार क्यों मिले?

बाड़मेर जिले ने 79 हजार से अधिक जल संरक्षण संरचनाएं बनाई थीं, जो देश में सबसे अधिक हैं।
उदयपुर जिले ने भी तय न्यूनतम लक्ष्य से कहीं अधिक जल संरचनाओं का निर्माण किया था।

इन्हीं ठोस आंकड़ों और सत्यापन के आधार पर दोनों जिलों को राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

मध्य प्रदेश सरकार का खंडन

मध्य प्रदेश सरकार ने भी खंडवा जिले को लेकर फैली खबरों को गलत बताया। सरकार ने कहा कि JSJB अभियान में फोटो और लोकेशन टैगिंग के जरिए निगरानी होती है। सत्यापन के लिए 339 केंद्रीय नोडल अधिकारी तैनात हैं।

इस अभियान में 1 प्रतिशत भौतिक और 99 प्रतिशत डिजिटल सत्यापन की प्रक्रिया अपनाई जाती है। इस बार 67 जिले, 6 नगर निगम और 1 ULB को शॉर्टलिस्ट किया गया था और कुल 100 पुरस्कार दिए गए।

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