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खालिदा जिया और भारत: रिश्तों की पूरी कहानी, BNP की नींव से लेकर सियासी विरासत तक

खालिदा जिया और भारत: रिश्तों की पूरी कहानी, BNP की नींव से लेकर सियासी विरासत तक

बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री और खालिदा जिया का नाम सिर्फ सत्ता और विपक्ष की राजनीति तक सीमित नहीं रहा, बल्कि उनके दौर में भारत–बांग्लादेश संबंधों ने भी कई उतार-चढ़ाव देखे। Bangladesh Nationalist Party (BNP) की संस्थापक नेता के रूप में उन्होंने पार्टी को जमीन से खड़ा किया और उसे देश की दो सबसे बड़ी राजनीतिक ताकतों में शामिल किया। उनके निधन के साथ बांग्लादेश की राजनीति का एक लंबा अध्याय समाप्त हो गया है।


भारत से रिश्ते: सहयोग, मतभेद और यथार्थ

खालिदा जिया के भारत के साथ रिश्ते हमेशा एक जैसे नहीं रहे। प्रधानमंत्री रहते हुए उन्होंने पड़ोसी देश के साथ संवाद बनाए रखा, लेकिन उनकी विदेश नीति अक्सर “राष्ट्रीय हित पहले” के दृष्टिकोण से संचालित रही।

  • उनके पहले कार्यकाल (1991–1996) में द्विपक्षीय संवाद बहाल हुआ और व्यापार व लोगों के आवागमन पर चर्चा आगे बढ़ी।

  • दूसरे कार्यकाल (2001–2006) में सीमा सुरक्षा, अवैध घुसपैठ और उत्तर-पूर्व भारत से जुड़े सुरक्षा मुद्दों पर भारत-बांग्लादेश के बीच सख्त बातचीत हुई।

राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, खालिदा जिया ने भारत के साथ रिश्तों में संतुलन रखने की कोशिश की—न तो पूरी तरह टकराव, न ही बिना शर्त नजदीकी। यही वजह रही कि उनके शासनकाल में मतभेदों के बावजूद संवाद के दरवाजे बंद नहीं हुए।


BNP के लिए खालिदा जिया का योगदान

खालिदा जिया ने BNP को केवल एक राजनीतिक दल नहीं, बल्कि एक संगठित आंदोलन के रूप में खड़ा किया।

  • सैन्य शासन के खिलाफ लोकतांत्रिक संघर्ष का नेतृत्व

  • संसदीय लोकतंत्र की बहाली

  • पार्टी के भीतर संगठनात्मक ढांचे को मजबूत करना

उनके नेतृत्व में BNP दो बार सत्ता में लौटी और एक मजबूत विपक्ष के रूप में भी उभरी। भ्रष्टाचार के आरोप, जेल और लंबी बीमारी के बावजूद पार्टी पर उनकी पकड़ बनी रही।


हसीना बनाम खालिदा: दो ध्रुवों की राजनीति

बांग्लादेश की राजनीति दशकों तक शेख हसीना और खालिदा जिया की प्रतिद्वंद्विता के इर्द-गिर्द घूमती रही। अवामी लीग बनाम BNP की इस जंग ने देश को दो राजनीतिक ध्रुवों में बांटा। समर्थकों के लिए खालिदा जिया लोकतंत्र की प्रतीक थीं, तो आलोचकों के लिए विवादों से घिरी नेता।


परिवार और अगली पीढ़ी

खालिदा जिया की राजनीतिक विरासत उनके परिवार से गहराई से जुड़ी रही।

  • तारिक रहमान: BNP के कार्यकारी अध्यक्ष, वर्षों से पार्टी की रणनीति और संगठन संभाल रहे हैं।

  • छोटे बेटे अराफात रहमान का पहले ही निधन हो चुका है।

  • पोती जायमा रहमान को पार्टी की नई पीढ़ी के चेहरे के रूप में देखा जा रहा है, जो भविष्य में सक्रिय भूमिका निभा सकती हैं।

खालिदा जिया के बाद अब पार्टी की नैतिक, राजनीतिक और भावनात्मक जिम्मेदारी पूरी तरह तारिक रहमान के कंधों पर है।


खालिदा जिया के बाद तारिक रहमान की बढ़ी जिम्मेदारी

खालिदा जिया के निधन ने BNP को भावनात्मक झटका दिया है, लेकिन साथ ही यह नेतृत्व परिवर्तन का निर्णायक मोड़ भी है।

  • तारिक रहमान 17 साल बाद देश लौटे हैं

  • फरवरी 2026 के आम चुनाव में BNP का नेतृत्व करेंगे

  • उन्हें प्रधानमंत्री पद के मजबूत दावेदारों में गिना जा रहा है

विशेषज्ञ मानते हैं कि अब तारिक रहमान को न सिर्फ पार्टी को एकजुट रखना है, बल्कि जनता की सहानुभूति को राजनीतिक समर्थन में भी बदलना होगा।


आखिरी विदाई और भारत का संदेश

बांग्लादेश में आज (31 दिसंबर 2025) को खालिदा जिया को पूरे राजकीय सम्मान के साथ सुपुर्द-ए-खाक किया जाएगा। इस मौके पर कई देशों के प्रतिनिधि ढाका पहुंचे हैं। भारत की ओर से विदेश मंत्री एस जयशंकर विशेष रूप से ढाका गए और उन्होंने खालिदा जिया के बेटे तारिक रहमान को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का शोक-पत्र सौंपा।

भारत में बांग्लादेश के उच्चायुक्त रियाज हामिदुल्लाह ने बताया कि जयशंकर ने भारत की जनता और सरकार की ओर से संवेदना व्यक्त की और लोकतंत्र में खालिदा जिया के योगदान को स्वीकार किया।

यह दौरा शेख हसीना के सत्ता छोड़ने के बाद जयशंकर का पहला बांग्लादेश दौरा है, जिसे दोनों देशों के बीच तनाव के दौर में अहम माना जा रहा है। जयशंकर और तारिक रहमान की मुलाकात व हैंडशेक—जिसमें जायमा रहमान भी मौजूद रहीं—को कूटनीतिक संकेत के रूप में देखा जा रहा है, खासकर ऐसे समय में जब क्षेत्रीय राजनीति में नई हलचल है।

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