त्रिपुरा छात्र हत्या मामला: पुलिस की भूमिका पर उठे सवाल, परिवार की इंसाफ की मांग,जानें मामले में अब तक क्या-क्या हुआ?

त्रिपुरा छात्र हत्या मामला: पुलिस की भूमिका पर उठे सवाल, परिवार की इंसाफ की मांग,जानें मामले में अब तक क्या-क्या हुआ?

देहरादून में त्रिपुरा के छात्र एंजेल चकमा की मौत के बाद मामला लगातार तूल पकड़ता जा रहा है। परिवार ने पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए इंसाफ की मांग की है। आइए जानते हैं इस मामले में अब तक क्या-क्या हुआ—

घटना कैसे हुई?
यह घटना 9 दिसंबर को उत्तराखंड के देहरादून जिले के सेलाकुई इलाके में हुई। एंजेल चकमा एक निजी विश्वविद्यालय में एमबीए अंतिम वर्ष का छात्र था। वह अपने छोटे भाई माइकल के साथ बाजार गया था, तभी छह युवकों के एक समूह से उसका सामना हुआ।

झगड़े की शुरुआत कैसे हुई?
परिवार के अनुसार, आरोपियों ने पहले माइकल के साथ बदसलूकी की। जब एंजेल ने विरोध किया तो उस पर नस्लीय टिप्पणियां की गईं। उसे “चाइनीज” और “चाइनीज मोमो” जैसे शब्द कहे गए। एंजेल ने खुद को भारतीय बताया, लेकिन इसके बावजूद आरोपियों ने हमला कर दिया।

हमला कितना गंभीर था?
परिजनों का आरोप है कि एंजेल पर चाकू, लोहे के हथियार और कड़े से वार किया गया। उसे गर्दन और पीठ में गंभीर चोटें आईं। हालत नाजुक होने पर उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां वह 17 दिनों तक जिंदगी और मौत से जूझता रहा। 26 दिसंबर को इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।

पुलिस की भूमिका पर सवाल क्यों?
परिवार का कहना है कि घटना के तुरंत बाद एफआईआर दर्ज नहीं की गई। उनके मुताबिक, छात्र संगठनों और वरिष्ठ अधिकारियों के दबाव के बाद ही मामला दर्ज हुआ। हालांकि पुलिस का दावा है कि शिकायत मिलते ही जांच शुरू कर दी गई थी।

अब तक क्या कार्रवाई हुई?
पुलिस के अनुसार, इस मामले में छह लोगों की पहचान की गई थी। इनमें से पांच को गिरफ्तार किया जा चुका है, जिनमें दो नाबालिग शामिल हैं। एक आरोपी नेपाल का बताया जा रहा है, जो फरार है। उसकी गिरफ्तारी के लिए 25 हजार रुपये का इनाम घोषित किया गया है और पुलिस की टीम नेपाल भेजी गई है।

नस्लीय हमला या आपसी झगड़ा?
परिवार और कई सामाजिक संगठनों का कहना है कि यह साफ तौर पर नस्लीय हमला था, क्योंकि एंजेल को उसकी पहचान और शक्ल के आधार पर निशाना बनाया गया। वहीं पुलिस का कहना है कि फिलहाल यह मामला आपसी विवाद का प्रतीत होता है और नस्लीय एंगल की जांच की जा रही है।

राजनीतिक और सरकारी प्रतिक्रिया
इस घटना पर उत्तराखंड, त्रिपुरा, असम और मेघालय के मुख्यमंत्रियों ने दुख जताया है और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का भरोसा दिलाया है। उत्तराखंड सरकार ने कहा है कि फरार आरोपी को जल्द गिरफ्तार किया जाएगा।

परिवार की मांग
एंजेल चकमा के पिता का कहना है कि उन्होंने अपना बेटा खो दिया है और अब उन्हें सिर्फ न्याय चाहिए। परिवार की मांग है कि मामले को नस्लीय हिंसा मानते हुए सभी दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा दी जाए।

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