उन्नाव रेप मामले के दोषी पूर्व विधायक Kuldeep Sengar को हाल ही में मिली राहत के बाद देश की राजनीति और सड़कों पर फिर उबाल देखने को मिला। मुंबई से लेकर दिल्ली के जंतर मंतर तक विरोध-प्रदर्शन हुए और एक बार फिर यह सवाल उठा कि क्या गंभीर अपराधों में दोषियों को राहत मिलना पीड़िता के न्याय के साथ समझौता है?
क्या है उन्नाव रेप मामला?
2017 में उन्नाव की एक नाबालिग लड़की ने तत्कालीन भाजपा विधायक कुलदीप सेंगर पर रेप का आरोप लगाया था। पीड़िता ने आरोप लगाया कि राजनीतिक प्रभाव के चलते पुलिस ने शुरुआत में मामला दर्ज नहीं किया। बाद में मामला तूल पकड़ने पर CBI जांच हुई और 2019 में अदालत ने कुलदीप सेंगर को रेप का दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई। इसके अलावा पीड़िता के पिता की हिरासत में मौत और सड़क हादसे जैसे मामलों ने इस केस को और भयावह बना दिया।
जमानत से क्यों मचा बवाल?
हाल में Delhi High Court से कुलदीप सेंगर को कुछ मामलों में राहत मिलने की खबर सामने आई। इसी को लेकर विपक्ष ने सवाल उठाए कि जब एक गंभीर अपराध में दोष सिद्ध हो चुका है, तब ऐसी राहत का संदेश समाज में क्या जाएगा?
कांग्रेस का आरोप है कि ऐसे फैसले महिलाओं की सुरक्षा को कमजोर करते हैं और “बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ” जैसे नारों की हकीकत पर सवाल खड़े करते हैं।
मुंबई में यूथ कांग्रेस का अनोखा प्रदर्शन
28 दिसंबर को Indian National Congress की मुंबई इकाई, खासकर यूथ कांग्रेस ने इस फैसले के खिलाफ प्रदर्शन किया।
मुंबई युवक कांग्रेस की अध्यक्ष Zeenat Shabrin के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं ने सांताक्रूज से चर्चगेट तक लोकल ट्रेन में सफर करते हुए बैनर और तख्तियां हाथों में लेकर जनसंवाद किया। यात्रियों को उन्नाव केस की पूरी जानकारी दी गई और यह सवाल उठाया गया कि क्या रसूखदार दोषियों के लिए कानून अलग है? कार्यकर्ताओं ने साफ कहा कि जब तक पीड़िता को पूरा न्याय नहीं मिलता, तब तक उनका संघर्ष जारी रहेगा।
जंतर मंतर पर भी उठा इंसाफ का स्वर
इसी दिन दिल्ली के Jantar Mantar पर भी कई सामाजिक संगठनों और कांग्रेस नेताओं ने विरोध प्रदर्शन किया। बड़ी संख्या में महिलाओं ने सुप्रीम कोर्ट से हस्तक्षेप की मांग की।
कांग्रेस नेता Udit Raj ने कहा कि पार्टी पूरी मजबूती के साथ पीड़िता और उसके परिवार के साथ खड़ी है और उन्हें उम्मीद है कि Supreme Court of India से न्याय मिलेगा।
राहुल गांधी से मिल चुकी हैं पीड़िता, विपक्ष का सरकार पर हमला
उन्नाव रेप मामले में पीड़िता इससे पहले कांग्रेस नेता Rahul Gandhi से भी मुलाकात कर चुकी है। यह मुलाकात उस वक्त हुई थी जब मामला देशभर में चर्चा का विषय बना हुआ था। पीड़िता और उसके परिवार ने राहुल गांधी के सामने अपनी आपबीती रखी थी और सुरक्षा व न्याय की गुहार लगाई थी।
मुलाकात के बाद राहुल गांधी ने कहा था कि “देश में अगर एक बेटी को भी इंसाफ नहीं मिलता, तो यह पूरे सिस्टम की विफलता है।” उन्होंने भरोसा दिलाया था कि कांग्रेस पार्टी पीड़िता के साथ मजबूती से खड़ी है और न्याय मिलने तक आवाज उठाती रहेगी।
विपक्ष का सरकार पर सीधा हमला
वर्तमान में कुलदीप सेंगर को राहत मिलने के बाद विपक्ष ने एक बार फिर सरकार पर तीखा हमला बोला है। कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों का कहना है कि—
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गंभीर अपराधों में दोषियों को राहत मिलना महिलाओं की सुरक्षा पर सवाल है
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राजनीतिक संरक्षण के चलते न्याय की प्रक्रिया कमजोर हो रही है
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सरकार “बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ” जैसे नारों के पीछे छिपकर असल मुद्दों से बच रही है
विपक्ष का साफ कहना है कि अगर दोषी रसूखदार है और फिर भी उसे राहत मिलती है, तो आम पीड़िता न्याय की उम्मीद कैसे करे? कांग्रेस नेताओं ने दो टूक कहा कि जब तक उन्नाव रेप पीड़िता को पूरा और स्थायी न्याय नहीं मिलता, तब तक युवक कांग्रेस और पूरी पार्टी सड़कों से लेकर संसद तक संघर्ष जारी रखेगी।
पीड़िता की मां की दर्दभरी अपील
जंतर मंतर पर पीड़िता की मां का भावुक बयान भी सामने आया। उन्होंने कहा कि उनके बच्चे सड़कों पर भटक रहे हैं, सुरक्षा हटा ली गई है और परिवार को लगातार धमकियां मिल रही हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदर्शन के दौरान उनके बच्चों के साथ मारपीट भी हुई। पीड़िता की मां ने मांग की कि कुलदीप सेंगर को या तो फांसी दी जाए या उम्रकैद की सजा मिले। साथ ही उन्होंने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री Yogi Adityanath से मामले में हस्तक्षेप करने और सेंगर को पार्टी से बाहर करने की अपील की।
बड़ा सवाल
उन्नाव रेप केस केवल एक अपराध का मामला नहीं, बल्कि यह भारत की न्याय व्यवस्था, राजनीतिक संरक्षण और महिलाओं की सुरक्षा से जुड़ा बड़ा सवाल बन चुका है। कुलदीप सेंगर को मिली किसी भी तरह की राहत पर उठ रहा विरोध यही बताता है कि समाज का एक बड़ा वर्ग अब “दोषी को सजा” से कम कुछ भी स्वीकार करने को तैयार नहीं है।




