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चीन ने अमेरिका को दिया करारा झटका, 20 अमेरिकी डिफेंस कंपनियों पर लगाया प्रतिबंध; ताइवान मुद्दे पर बढ़ा तनाव

चीन ने अमेरिका को दिया करारा झटका, 20 अमेरिकी डिफेंस कंपनियों पर लगाया प्रतिबंध; ताइवान मुद्दे पर बढ़ा तनाव

चीन और अमेरिका के बीच रिश्तों में एक बार फिर तीखापन देखने को मिल रहा है। ताइवान को हथियारों की बिक्री को लेकर भड़के चीन ने अमेरिका की 20 रक्षा कंपनियों और उनसे जुड़े कई अधिकारियों पर कड़े प्रतिबंध लगा दिए हैं। इस कदम को बीजिंग ने अपनी “रेड लाइन” पार करने के जवाब के तौर पर बताया है, जिससे वॉशिंगटन में भी हलचल बढ़ गई है।

चीन के विदेश मंत्रालय ने शुक्रवार (26 दिसंबर 2025) को बताया कि अमेरिका द्वारा ताइवान को हथियार बेचने के फैसले के बाद यह कार्रवाई की गई है। मंत्रालय के मुताबिक, इन प्रतिबंधों के तहत 10 व्यक्तियों और 20 अमेरिकी डिफेंस कंपनियों को निशाना बनाया गया है। प्रतिबंधित सूची में Boeing की सेंट लुइस ब्रांच समेत कई बड़ी कंपनियां शामिल हैं।

चीन में एंट्री बैन, संपत्तियां फ्रीज

चीन के विदेश मंत्रालय ने साफ किया कि प्रतिबंध के दायरे में आने वाली कंपनियों और उनके वरिष्ठ अधिकारियों की चीन में मौजूद सभी संपत्तियां फ्रीज कर दी जाएंगी। इसके साथ ही, इन कंपनियों और व्यक्तियों के चीन में प्रवेश पर भी पूरी तरह से रोक लगा दी गई है। चीनी संस्थाओं और नागरिकों को भी इन कंपनियों के साथ किसी भी तरह के कारोबारी संबंध रखने से मना किया गया है।

प्रतिबंधित कंपनियों में एंडुरिल इंडस्ट्रीज (Anduril Industries) से जुड़े संस्थापक और नौ वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल हैं। इसके अलावा Northrop Grumman Systems Corporation और L3 Harris Maritime Services जैसी कंपनियां भी चीन की कार्रवाई की जद में आई हैं।

ताइवान को हथियार बिक्री बना विवाद की जड़

दरअसल, पिछले हफ्ते अमेरिका ने ताइवान को करीब 11.1 अरब डॉलर के हथियारों की बिक्री की घोषणा की थी। इसी फैसले के बाद चीन ने सख्त रुख अपनाते हुए प्रतिबंधों का ऐलान किया। बीजिंग का कहना है कि ताइवान चीन के मूल हितों से जुड़ा मुद्दा है और इसमें किसी भी तरह का बाहरी हस्तक्षेप बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

“रेड लाइन” पार करने का आरोप

चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि चीन-अमेरिका संबंधों में ताइवान का मुद्दा एक ऐसी रेड लाइन है, जिसे पार नहीं किया जा सकता। प्रवक्ता ने चेतावनी दी कि ताइवान से जुड़े किसी भी उकसावे वाले कदम का चीन कड़ा जवाब देगा। साथ ही अमेरिका से अपील की गई कि वह ताइवान को हथियारों की आपूर्ति तुरंत बंद करे।

ट्रंप के कदम से और भड़का विवाद

इस महीने की शुरुआत में अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने एक अहम कानून पर हस्ताक्षर किए थे, जिससे ताइवान और अमेरिका के रिश्तों को मजबूती मिली। यह कानून Taiwan Assurance Implementation Act के नाम से जाना जाता है। इसके तहत अमेरिकी विदेश विभाग को ताइवान के साथ अमेरिका की नीति और जुड़ाव के दिशानिर्देशों की हर पांच साल में समीक्षा करनी होगी।

ताइवान ने इस कानून का स्वागत किया है, जबकि चीन ने इसे अपने आंतरिक मामलों में सीधा हस्तक्षेप बताते हुए सख्त आपत्ति जताई है। बीजिंग का कहना है कि इस तरह के कदम क्षेत्रीय शांति और स्थिरता के लिए खतरा हैं।

बढ़ती टेंशन, रिश्तों पर असर

चीन के ताजा फैसले के बाद साफ है कि आने वाले दिनों में चीन-अमेरिका संबंधों में और तल्खी आ सकती है। ताइवान को लेकर जारी खींचतान अब सीधे तौर पर आर्थिक और रणनीतिक प्रतिबंधों तक पहुंच चुकी है, जिसका असर वैश्विक राजनीति और डिफेंस इंडस्ट्री पर भी पड़ सकता है।

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