2017 का उन्नाव रेप केस देश के सबसे चर्चित और संवेदनशील मामलों में से एक रहा है। इस मामले में आरोपी रहे पूर्व बीजेपी विधायक कुलदीप सिंह सेंगर को अब Delhi High Court से बड़ी राहत मिली है। कोर्ट ने उम्रकैद की सजा पर रोक लगाते हुए उन्हें शर्तों के साथ जमानत दे दी है। आइए जानते हैं इस पूरे मामले की पूरी टाइमलाइन और अब तक की कहानी।
कब और कैसे हुआ था मामला?
पीड़िता ने आरोप लगाया था कि जून 2017 में कुलदीप सेंगर ने उत्तर प्रदेश के उन्नाव जिले में उसके साथ दुष्कर्म किया। उस समय कुलदीप सेंगर उन्नाव की बांगरमऊ विधानसभा सीट से बीजेपी विधायक थे।
पीड़िता का कहना था कि घटना के बाद जब वह शिकायत लेकर थाने और नेताओं के पास गई, तो उसकी सुनवाई नहीं हुई और उसे लगातार डराया-धमकाया गया।
पीड़िता ने क्या कहा?
पीड़िता ने सार्वजनिक तौर पर आरोप लगाया था कि उसे और उसके परिवार को लंबे समय तक न्याय नहीं मिला। उसने कहा कि—
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आरोपी एक प्रभावशाली नेता था
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पुलिस ने शुरुआत में FIR दर्ज नहीं की
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परिवार को धमकियां दी गईं
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न्याय के लिए उसे दिल्ली तक आना पड़ा
पीड़िता ने यह भी कहा था कि अगर मामला देश के सामने नहीं आता, तो शायद उसे कभी न्याय नहीं मिलता।
कहां-कहां हुई सुनवाई?
शुरुआत में केस उत्तर प्रदेश की अदालतों में चला, लेकिन सुरक्षा और निष्पक्षता को देखते हुए Supreme Court of India ने 2019 में बड़ा आदेश दिया।
सुप्रीम कोर्ट ने—
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उन्नाव रेप से जुड़े चारों मामलों की सुनवाई दिल्ली ट्रांसफर की
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आदेश दिया कि सुनवाई रोजाना हो
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और 45 दिनों के भीतर फैसला सुनाया जाए
इसके बाद केस की सुनवाई दिल्ली की ट्रायल कोर्ट में शुरू हुई।
निचली अदालत ने क्या कहा?
दिल्ली की निचली अदालत ने दिसंबर 2019 में कुलदीप सेंगर को दोषी करार दिया।
कोर्ट ने अपने फैसले में कहा—
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आरोपी एक चुना हुआ जनप्रतिनिधि था
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जनता ने उस पर भरोसा किया, लेकिन उसने उस भरोसे को तोड़ा
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अपराध बेहद गंभीर और घिनौना है
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सजा में किसी भी तरह की नरमी का कोई आधार नहीं है
इसके बाद कोर्ट ने सेंगर को आजीवन कारावास (उम्रकैद) की सजा सुनाई और पीड़िता व उसके परिवार की सुरक्षा के निर्देश दिए।
अब तक कितने साल की सजा काट चुका है सेंगर?
कुलदीप सेंगर को 2018 में गिरफ्तार किया गया था।
वह तब से लगातार जेल में रहा है।
अब तक वह करीब 7 साल से ज्यादा समय जेल में बिता चुका है, जिसमें—
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ट्रायल का समय
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सजा के बाद की अवधि
शामिल है।
इसी आधार पर उनकी ओर से सजा पर रोक और जमानत की मांग की गई थी।
दिल्ली हाई कोर्ट ने अब क्या फैसला दिया?
दिल्ली हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच ने—
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उम्रकैद की सजा पर अंतरिम रोक लगाई
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15 लाख रुपये के निजी मुचलके पर जमानत दी
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तीन जमानतदार पेश करने का आदेश दिया
कोर्ट ने साथ ही सख्त शर्तें भी लगाईं।
जमानत की मुख्य शर्तें
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पीड़िता से 5 किलोमीटर के दायरे में नहीं जाएगा
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दिल्ली में ही रहेगा
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पीड़िता को धमकाने या संपर्क करने पर रोक
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पासपोर्ट ट्रायल कोर्ट में जमा
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हर सोमवार पुलिस को रिपोर्ट
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शर्तों के उल्लंघन पर जमानत रद्द
आगे क्या?
इस मामले की अगली सुनवाई 15 जनवरी 2026 को होगी।
अगर भविष्य में हाई कोर्ट सजा को बरकरार रखता है, तो कुलदीप सेंगर को दोबारा जेल जाकर बाकी सजा काटनी होगी।




