बांग्लादेश में भारत विरोधी आग फैलाने वाले 5 विलेन कौन? पढ़िए पूरी लिस्ट

बांग्लादेश में भारत विरोधी आग फैलाने वाले 5 विलेन कौन? पढ़िए पूरी लिस्ट

बांग्लादेश के 5 “खलनायक” कौन?

बांग्लादेश में अंतरिम सरकार बने करीब डेढ़ साल बीत चुके हैं, लेकिन हालात सुधरने के बजाय और बिगड़ते दिख रहे हैं। राजनीतिक अस्थिरता, हिंसा और कट्टरपंथ में तेज़ी आई है। यूनुस सरकार को समर्थन देने वाले कई समूह अब सरकार पर सुधारों में देरी, न्याय न मिलने और सेक्युलर सोच से हटने जैसे आरोप लगा रहे हैं।
इसी बीच इंकलाब मंच के प्रवक्ता शरीफ उस्मान हादी की हत्या ने आग में घी डालने का काम किया है।

विशेषज्ञों का कहना है कि फरवरी 2026 के चुनाव से पहले देश को अस्थिर करने की रणनीति के तहत हालात बिगाड़े जा रहे हैं, जिसका सबसे ज्यादा असर अल्पसंख्यकों—खासतौर पर हिंदुओं—पर पड़ रहा है। UN ह्यूमन राइट्स की रिपोर्ट बताती है कि अगस्त 2024 से मार्च 2025 के बीच 2,300 से ज्यादा घटनाएं दर्ज हुईं, जिनमें मंदिरों पर हमले, संपत्ति की लूट और हत्याएं शामिल हैं।

इन हालात के पीछे सिर्फ सरकार की नीतियां ही नहीं, बल्कि ये 5 बड़े खिलाड़ी भी जिम्मेदार माने जा रहे हैं—


1. कट्टरपंथ को मजबूत करता जमात-ए-इस्लामी

शेख हसीना के दौर में प्रतिबंधित रहा यह संगठन यूनुस सरकार के आते ही फिर सक्रिय हो गया। चुनाव सुधारों की मांग के साथ-साथ यह समूह अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा और एंटी-इंडिया प्रदर्शनों में भी आगे दिख रहा है।
विशेषज्ञों के मुताबिक, इस संगठन पर पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI से नजदीकी के आरोप लगते रहे हैं। हादी की हत्या से जमात-ए-इस्लामी को राजनीतिक फायदा मिलने की भी आशंका जताई जा रही है।


2. शरिया कानून की पैरवी करने वाला हिफाजत-ए-इस्लाम

ईस्ट एशिया फोरम की रिपोर्ट के अनुसार, यह संगठन सुन्नी इस्लामवादी नेटवर्क और बड़े मदरसा ढांचे पर टिका है। महिलाओं के अधिकार, समान संपत्ति कानून और सेक्युलर सुधारों का यह खुला विरोध करता है।
इस संगठन के नेता मामुनुल हक ने यूनुस से मुलाकात कर शरिया कानून लागू करने का दबाव भी बनाया। हसीना सरकार ने जिस संगठन पर पाबंदी लगाई थी, उसे मौजूदा दौर में फिर से खुली छूट मिल गई।


3. ISIS जैसे झंडे लहराने वाला हिज्ब-उत-तहरीर

एस. राजारतनम स्कूल ऑफ इंटरनेशनल स्टडीज की रिपोर्ट बताती है कि यह संगठन सोशल मीडिया और कॉलेज-यूनिवर्सिटी नेटवर्क के जरिए युवाओं को तेजी से जोड़ रहा है।
2009 में प्रतिबंधित इस संगठन को 2024 में राहत मिली। यह खिलाफत की बहाली और शरिया व्यवस्था की वकालत करता है। ढाका में हुए इसके प्रदर्शनों में ISIS से मिलते-जुलते झंडे लहराए गए, जिससे सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ गई।


4. कट्टर इस्लामिक एजेंडा चलाने वाला इंकलाब मंच

अल जज़ीरा की रिपोर्ट के मुताबिक, जुलाई 2024 के छात्र आंदोलन के बाद इस संगठन का गठन हुआ। इसके प्रमुख नेता शरीफ उस्मान हादी खुले तौर पर भारत-विरोधी और कट्टर विचारधारा से जुड़े थे।
हादी की हत्या के बाद इंकलाब मंच ने सरकार को गिराने तक की धमकी दी। हिंसा इस हद तक बढ़ी कि मीडिया संस्थानों पर हमले और अखबारों के दफ्तर जलाए गए। संगठन देश में सख्त इस्लामिक संस्कृति लागू करने की बात करता है।


5. मामुनुल हक और मुफ्ती जशीमुद्दीन रहमानी का बढ़ता असर

मुफ्ती जशीमुद्दीन रहमानी अल-कायदा से जुड़े आतंकी संगठन अंसारुल्लाह बंग्ला टीम (ABT) का प्रमुख रहा है। यूनुस सरकार के दौरान उसकी रिहाई ने भारत की सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी, क्योंकि यह संगठन स्लीपर सेल्स के जरिए नेटवर्क फैलाने की कोशिश करता रहा है।
वहीं मामुनुल हक हिंसा भड़काने के मामलों में जेल जाने के बाद फिर सक्रिय हो गया है और शरिया आधारित नीतियों को सरकारी ढांचे में लागू करने की वकालत कर रहा है।


भारत विरोधी माहौल कैसे बन रहा है?

इन सभी संगठनों की साझा रणनीति—शरिया कानून की मांग, महिलाओं के अधिकारों पर रोक और भारत के खिलाफ ज़हर फैलाना—देश को और अस्थिर कर रही है। कई रिपोर्ट्स में इनके पाकिस्तान और अन्य विदेशी ताकतों से संबंधों का भी ज़िक्र है।
आरोप यह भी हैं कि यूनुस सरकार इन समूहों पर प्रभावी नियंत्रण नहीं कर पा रही, जिसके चलते बांग्लादेश में हिंसा बढ़ी है और अल्पसंख्यकों की सुरक्षा पर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है।

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